संस्करण: 15 जुलाई -2013

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फासीवादी राजनीति के उभार को समझना

बहुत जरूरी है

       फासीवादी ताकतें अपने आपको महिमामंडित करने और अपनी विचारधारा को जनता की राष्ट्रीय भावना बताने का कोई अवसर नहीं चूकतीं। पूरी दुनिया में यही परम्परा है। अपने देश में सक्रिय फासीवादी ताकतें अपने महिमामंडन के लिए विदेशी पी आर कंपनियों तक का सहयोग लेने में संकोच नहीं करतीं। इनके पूर्व भी फासीवाद की यही प्रथा रही है। जर्मनी के तानाशाह हिटलर ने जर्मनी को यहूदीमुक्त कराने का नारा दिया था।   

? दिग्विजय सिंह

(महासचिव, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी)


प्रधानमंत्री पद के लिये

वोटों का धर्वीकरण

वह शासन कैसे अच्छा हो सकता है जो साम्प्रदायिकता की दरार को चौड़ा करता है जिसके परिणामस्वरूप शासन की अच्छी योजनाएँ खतरे में पड़ जाये?

       29 जून 2013 को, जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सैयद जफर महमूद ने मुसलमानों की वास्तविक स्थिति और भाजपा की आधिकारिक वेबसाइट पर उनके चित्रण के विषय में नरेंद्र मोदी के समक्ष एक प्रस्तुति दी। उनके द्वारा कई चिन्ताजनक मुद्दे उठाये गये जिसमें एक निबंध भी शामिल है जिसमें कहा गया है कि सभी मुस्लिम महिलाओं को मंगलसूत्र पहनना चाहिए। साथ ही इसमें 2002के गुजरात दंगों के प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिये बनाई गई कॉलोनियों की हालत का मुद्दा भी उठाया गया जो मीलों लंबे कचरे के ढेर के बाजू में बनी हुई है जहाँ एक बार भी मोदी ने जाकर नही देखा।

? पवन के. वर्मा

(लेखक एक प्रसिध्द रचनाकार, पूर्व राजनयिक, एवं वर्तमान में बिहार के मुख्यमंत्री के सलाहकार है. उक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं।)


उनको कह दो कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता

      बोधगया के महाबोधि मंदिर में हुए धमाकों के दो दिन बाद चार लोगों को शक की बिना पर हिरासत में लिया गया। दिल्ली के एक नामी अखबार ने उनके नाम भी बता दिया। आनंद प्रकाश,गुंजन पटेल,हसन मालिक और प्रियंका नाम के यह लोग बोधगया के तथागत होटल में ठहरे हुए थे। यह होटल महाबोधि मंदिर के पास ही है। धमाके के दिन सुबह छ बजे ही होटल से चेक आउट कर गए थे लेकिन तीन दिन बाद तक गया में ही घूम घाम रहे थे। जांच एजेंसियोंको शक शायद इसी आधार पर था कि धमाके शुरू होने के तुरंत बाद यह लोग होटल से तो बाहर हो गए लेकिन बाद में भी शहर में मौजूद थे।

 ? शेष नारायण सिंह


और कितने राघवजी ?

      विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ी एवं विधानसभा के आसन्न सत्र का सामना कर रही किसी सरकार के लिए इससे बड़ी शर्मनाक स्थिति और कुछ नहीं हो सकती थी कि उसके एक अग्रणी मंत्री को यौन शोषण के आरोप में रूखसत कर दिया जाए। बहरहाल, जिस तरह आननफानन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने वरिष्ठ मंत्री राघवजी - जो पिछले दस साल से राज्य का वित्त मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण महकमा देख रहे थे - को पदत्याग का निर्देश दिया है, वह इसी बात की ताकिद करता है कि प्रथमदृष्टया अर्थात प्राइमा फेसी, उन्होंने उन आरोपों पर सन्देह नहीं किया है।

? सुभाष गाताड़े


लोकतंत्र में लोकप्रियतावाद के साथ सार्वजनिक जीवन में शुचिता के सवाल

         1985 में जब संसद ने दल बदल विरोधी कानून पास किया तो उन लोगों को बड़ा धक्का लगा था जो अपनी खरीद फरोख्त की ताकत की दम पर सरकारों को बनाने बिगाड़ने का खेल खेलते थे और इसी की दम पर कई सरकारों को अपने पास गिरवी रख कर अपनी मनमर्जी के कानून और नीतियां बनवाते रहते थे। यह कानून सचमुच में एक क्रांतिकारी कानून था क्योंकि इससे देश में व्यक्तियों के प्रतिनिधित्व की जगह दलों को महत्व मिला था और जिस दल के कार्यक्रम और घोषणापत्र के आधार पर कोई व्यक्ति चुन कर सदन में पहुँचता था उसके अनुशासन में रहना जरूरी हो गया था।  

 ?   वीरेन्द्र जैन


अब राजनीतिक संगठन हो चुका है आरएसएस...?

           राष्ट्रीय स्वयं संघ यानि आरएसएस ने कभी यह स्वीकार नहीं किया उसका भारतीय जनता पार्टी के मामलों में देखल है। आएसएस के मौजूदा और पूर्व में जितने भी मुखिया रहे हैं वे गाहे-गवाहे यही कहते रहे हैं कि भाजपा और उसके अंदरूनी मामलों में आरएसएस का दखल नहीं। लेकिन,भाजपा की पैदाईश से ऐसा शायद कोई वक्त रहा हो जब आरएसएस के नीतिनियंताओं ने भाजपा नेताओं को और उसकी नीतियों को नियंत्रित न किया हो। यह कहना अतिश्योक्ति न होगी कि भाजपा में चपरासी से लेकर और प्रधानमंत्री तक की नियुक्ति और चुनाव का निर्णय पर्दे के पीछे आरएसएस ही करता है।  

? विवेकानंद


भाजपा फिर रामभरोसे

      भाजपा फिर अयोध्या लौटी है। ये भी कह सकते हैं कि लौटाई गयी है। डेढ़ दशक से अधिक समय तक राम को ठंढ़े बस्ते में डाले रहकर इधर-उधर भटकने के बाद उसे याद आया है कि धार्मिक कट्टरता के बिना उसका उध्दार नहीं। भाजपा के नये खेवैया नरेन्द्र मोदी और उनके सह-मल्लाह अमित शाह, दोनों ने अपनी दृष्टि साफ कर दी है। बीती छह जुलाई को अमित शाह ने अयोध्या पहुॅचकर भाजपाई कार्यकर्ताओं को अपने दिल का ई.सी.जी. दिखाते हुए बताया कि आज भी वहाँ राम मंदिर निर्माण का सपना बसता है। 

? सुनील अमर


झूठी मुठभेड़ के आरोप में गुजरात के अनेक पुलिस अधिकारी थानों के स्थान पर जेल में हैं

      त्तराखंड में आई भीषण तबाही में हजारों व्यक्तियों ने अपने प्राण गंवाये, हजारों अपने परिजनों से बिछड़ गये। असंख्य व्यक्ति अपनों की अनंत खोज में अभीभी लगे हुये हैं। सेना ने अद्वितीय कार्य किया। अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को बाहर निकाला। कहीं रस्सी के सहारे तो कभी अपने शरीर को सड़क की तरह इस्तेमाल करने देकर। जो लोग बच कर वापस अपने घर पहुंच गये हैं, वे अभी भी उस सदमें से उबर नहीं पाये हैं। परंतु कुछ नेताओं को न तो त्रासदी से कुछ लेना देना है न ही पीडितों से,उन्हें हर जगह केवल राजनीतिक लाभ ढूंढना है।

? एल.एस.हरदेनिया


तुम मुझे वोट दो-मैं तुम्हें खाना खिलाऊंगा

प्रलोभनों की घोषणाओं पर

उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी

        त्ता पर काबिज रहने की तिकड़मबाजियों का कहीं अंत नहीं दिखाई देता। झूठे वायदों, घोषणाओं मुफ्त के प्रलोभनों और आश्वासनों के राजनैतिक पैतरों पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी ने कई राजनैतिक दलों की चालों को मात दे दी है। कुछ राज्यों में विधनसभा के निर्वाचन के साथ ही 2014 की प्रथम तिमाही के बाद लोकसभा के चुनाव भी होने हैं। यही वह समय है जब राजनीति का माहौल उबाल पर देखा जाता है।

? राजेन्द्र जोशी


मप्र में मनमर्जी का राज

       स्वर्णिम मध्यप्रदेश का सब्जबाग दिखाने वाली शिवराज सरकार ने प्रदेश को खोखला कर दिया है। एक ओर जहां नौकरशाहों के भ्रष्टाचार पर पर्दा डाला जा रहा है,वहीं दूसरी ओर ईमानदार अफसर सरकार की तानाशाही के शिकार हो रहे हैं। अवैध खनन के मामले में तो जैसे सरकार ने आंखें ही मूंद ली हैं। नतीजतन प्रदेशभर में जहां खनिज संपदा का अवैध दोहन हो रहा है,वहीं सरकारी खजाने को करोड़ों-अरबों की चपत लग रही है। गले-गले तक कर्ज मे डूबे प्रदेश को इस दलहन से उबारने की बजाय शिवराज सरकार उसे और रसातल में ले जा रही है। इससे प्रशासनिक ढांचा चरमराने के साथ-साथ भ्रष्ट अफसरान के हौसले बुलंद हो रहे हैं।    

 

? महेश बाग़ी


क्या शरिया अदालतों का गठन ही विकल्प है मुस्लिम महिलाओं के लिए ?

        पारिवारिक मामलों में मुस्लिम महिलाओं के उत्पीड़न तथा उसके खिलाफ न्याय की लड़ाई में अक्सर ही इस बात की चर्चा रहती है कि वे इसके लिए कहां जाएं? समुदायविशेष के होने के नाते पर्सनल कानूनों का सहारा लें या एक नागरिक होने के नाते संविधनप्रदत्त अधिकारों की रक्षा के लिए बने कानूनों का सहारा लें। पिछले दिनों अहमदाबाद में आयोजित एक सम्मेलन ने इस सवाल को नए सिरे से मौजूं किया है।

? अंजलि सिन्हा

सज़ाएँ

      पिछले महीने जब मेरा बेटा स्कूल का गृहकार्य किसी कारणवश नहीं कर पाया, तो सज़ा के रुप में उसे उसी गृहकार्य को दस बार करने के लिए दोबारा दिया गया। उस दिन अपना स्कूल का कार्य निपटने के लिए उसने तब तक खाना नहीं खाया,जब तक उसका गृहकार्य पूरा समाप्त नहीं हो गया। बिल्कुल यही स्थिति मेरे बेटी की भी है। कई बार उसके मुॅह से सुन चुकी हूॅ कि हमारी मेम छड़ी रखती हैं और यदि कोई बच्चा शरारतकरें या पढ़ाई ना करे तो मेम बहुत ज़ोर से गुस्सा होती हैं, फिर पनिश भी करती हैं।

? राखी रघुवंशी


अन्ना की यात्रा से नहीं बदलेगा भ्रष्ट व्यवहार

        भ्रष्टाचार के संदर्भ में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा तैयार की गई अंतराष्ट्रीय सूची मे भारत का स्थान 94 वें नंबर पर है। पहले और दूसरे नंबर पर डेनमार्क और फिनलैण्ड जैसे देश है,जहॉ भ्रष्टाचार लगभग न के बराबर है। उल्लेखनीय है कि देशभर में पिछले तीन सालों से भ्रष्टाचार के विरोधा में जन आंदोलन चल रहें है। भ्रष्टाचार मिटाने के लिए जनसेवक यात्राएॅ निकाल रहें है और आम आदमी को डायरेक्ट कनेक्शन कर बिजली की चोरी को भी प्रोत्साहित कर रहें है। लेकिन भ्रष्टाचार है कि बढ़ता ही जा रहा है।

? डॉ. सुनील शर्मा


तेजाबी हमलों पर

विराम की पहल कब ?

       ह सर्वविदित है कि तेज़ाब का प्रहार महिलाओं के जीवन को हमेशा के लिए नारकीय बना देता है। इससे शरीर के अंग पूर्णत: नष्ट अथवा इस कदर विकृत हो जाते हैं कि दीर्घकालिक महंगी चिकित्सा के बावजूद उसकी भरपाई संभव नहीं हो पाती। वर्ष 2005 में एक युवक का प्रेम-प्रस्ताव देने के कारण दिल्ली की सोलह वर्षीया लक्ष्मी पर तीन युवकों ने तेज़ाब फेंक दिया। जिससे उसकी आंखें, नाक, कान, व गर्दन जल गए। हाथों पर गहरे जख्म हो गए।   

 

? डॉ. गीता गुप्त


  15 जुलाई -2013

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