संस्करण: 15 जुलाई -2013

उनको कह दो कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता  

? शेष नारायण सिंह

                बोधगया के महाबोधि मंदिर में हुए धमाकों के दो दिन बाद चार लोगों को शक की बिना पर हिरासत में लिया गया। दिल्ली के एक नामी अखबार ने उनके नाम भी बता दिया। आनंद प्रकाश,गुंजन पटेल,हसन मालिक और प्रियंका नाम के यह लोग बोधगया के तथागत होटल में ठहरे हुए थे। यह होटल महाबोधि मंदिर के पास ही है। धमाके के दिन सुबह छ बजे ही होटल से चेक आउट कर गए थे लेकिन तीन दिन बाद तक गया में ही घूम घाम रहे थे। जांच एजेंसियोंको शक शायद इसी आधार पर था कि धमाके शुरू होने के तुरंत बाद यह लोग होटल से तो बाहर हो गए लेकिन बाद में भी शहर में मौजूद थे। धमाके के पहले वाली रात की जो सी सी टी वी फुटेज बरामद हुई है उसमें भी यह लोग बहुत ही संदिग्ध तरीके से मंदिर के परिसर में घूमते हुए नजर आ रहे हैं। जांच एजेंसियों को शक इसलिए भी हुआ कि यह लोग सात जुलाई को भी आधी रात के बाद मंदिर परिसर में अजीबो गरीब तरीके से टहलते नजर आये थे। इनसे पूछताछ चल रही है। अभी कुछ भी कहना संभव नहीं है । सच्चाई जांच के बाद ही सामने आयेगी । इस बीच इंडियन मुजाहिदीन की तरफ से ट्वीट किये गए कुछ सन्देश भी कुछ अखबारों में छाप दिए गए हैं । और दावा किया गया है कि इंडियन मुजाहिदीन ने बोधगया धमाकों की  जिम्मेदारी ले ली  है और अब मुंबई को अपना अगलानिशाना बताया है। जो चार लोग पकडे गए थे और बाद में छोड़ दिए गए उनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है । बस इतना मालूम है कि अगर उनके नाम अब्दुल,रहमान या कुछ इस तरह के होते तो अपने देश के टी वी चौनलों में उनके नाम बहुत ही बुलंद आवाज में सुनायी पड़ रहे होते और आर एस एस की कृपा से दिल्ली में रह रहे बहुत सारे पत्रकार उनकी मंशा का विश्लेषण कर रहे होते। उस हालत में जांच एजेंसियां बहुत ही भरोसे का कम  करती पायी जा  रही होतीं और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत मानी जा  रही होतीं। लेकिन उनके नाम ऐसे थे कि आर एस एस वालों का कोई फायदा नहीं हो रहा था इसलिए टी वी  चौनलों पर सन्नाटा ही छाया रहा  क्योंकि पकडे  गए संदिग्धा लोगों के नाम ऐसे  हैं जिससे इन चौनलों के  राजनीतिक आकाओं का काम पूरा नहीं होता॥

                इस सूचना के सार्वजनिक हो जाने के बाद यह पक्का है कि अगर जल्द से जल्द बोधगया के अभियुक्तों को पकड़ न लिया गया तो मुंबई पर खतरा आ सकता है।जब दिल्ली पुलिस की जांच में पकडे गए इंडियन मुजाहिदीन के लोगों से पूछताछ से यह पता चल गया था कि उनका कोई मोडयूल बोधगया पर हमला करने वाला था तो बोधगया कि सुरक्षा बहुत ही चौकस की जानी चाहिए थी क्योंकि इस जानकारी के बाद बोधगया पर खतरा डबल हो गया था। सबसे बड़ा खतरा तो इंडियन मुजाहिदीन के उस मोडयूल से था जिसको  वहाँ हमला करने का जिम्मा दिया गया था लेकिन दूसरा आतंकवाद के उस मोडयूल से था  जो इंडियन मुजाहिदीन को कटघरे में खडा करना चाहता था। क्यंकि यह तय था कि बोधगया में हमला कोई भी करेगा शक हर हाल में इंडियन मुजाहिदीन पर ही जाएगा।  जहां तह इंडियन मुजाहिदीन की बात है उनके संगठन ने देश में कई जगह आतंकवादी हमले किये हैं । उससे जुड़े हुए बहुत आतंकवादी पकडे भी गए हैं और उन पर मुकदमा भी चल रहा है । देश के दुश्मन आतंकवादी संगठनों में इंडियन मुजाहिदीन एक प्रमुख नाम है। इसके बावजूद यह भी सही नहीं है कि देश में हर आतंकवादी वारदात में इंडियन मुजाहिदीन ही शामिल होते हैं । अपने देश में बहुत सारे आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं और सब अपने मकसद को हासिल करने के लिए काम कर रहे हैं । कुछ आतंकवादी संगठनों का  यही काम है कि वे वारदात करके हट जाएँ और  उनके दुश्मन संगठन का नाम आ जाए । ऐसा अपने देश में कई बार हो चुका है । कई मामलों में तो आर एस एस से जुड़े लोग भी आतंकवादी वारदात करते पकडे गए हैं और उनपर मुकदमे भी चल रहे है ।इसी तरह का एक मामला  राजस्थान के अजमेर में हुआ बम धमाका है ।जिस केस में  आर एस एस के एक बड़े नेता पर अजमेर के धमाकों में शामिल होने की साजिश में मुकदमा चलेगा।

                महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारी स्वर्गीय हेमंत करकरे  ने जब महाराष्ट्र में हुए कुछ आतंकवादी हमलों में  आर एस एस से जुड़े कुछ लोगों पकड़ा और उनपर अपराध में शामिल होने संबंधी चार्जशीट दाखिल हो गयी तब से यह बात सार्वजनिक हुई कि आर एस एस हिंसा को राजनीति का हथियार बनाता है  और उसका भी आतंकवादी मोडयूल है । अब तो यह भी साबित हो गया है कि आर एस एस के बहुत बड़े नेता भी आतंकवादी वारदातों की योजना बनाने में शामिल होते हैं । गुजरात का नरसंहार, मालेगांव बम विस्फोट , हैदराबाद के धमाके कुछ ऐसे काम हैं जिनमें आर एस एस के वरिष्ठ नेता खुद ही शामिल पाए गए हैं ।मालेगाँव की मस्जिद में बम विस्फोट करने की अपराधी ,साधवी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और उनके गिरोह के बाकी आतंकवादियों के ऊपर महाराष्ट्र में संगठित अपराधों को कंट्रोल करने वाले कानून,मकोका के तहत बुक किया गया है ।मालेगांव के धमाकों के गिरोह को उस वक्त के महाराष्ट्र के एंटी टेररिस्ट स्क्वाड के प्रमुख, शहीद हेमंत करकरे ने पकड़ा था ।

                साधवी प्रज्ञा ठाकुर और उनके साथियों की गिरफ्तारी भारतीय न्याय प्रक्रिया के इतिहास में एक संगमील माना जाएगा । प्रज्ञा ठाकुर और ले कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित की मालेगांव धमाकों के मामले में गिरफ्तारी ने देश की एकता और अखंडता की रक्षा के मामले में एक अहम भूमिका निभाई थी। मुसलमानों के खिलाफ चल रही आर एस एस की मुहिम के तहत यह लोग कहते फिरते थे कि सभी मुसलमान आतंकवादी नहीं होते लेकिन सभी आतंकवादी मुसलमान होते हैं ।अब यह कहा जा रहा है कि कोई भी हिंदू आतंकवादी नहीं होता लेकिन अगर कोई हिंदू आतंकवाद की वारदात में शामिल होता है तो वह पक्के तौर पर आर एस एस  का सदस्य होता है ।अब तो आर एस एस के आतंकवादी मोडयूल को सभी जान गये हैं। अजमेर के धमाकों में भी आर एस एस के फुल टाइम कार्यकर्ता और बड़े नेता,इन्द्रेश कुमार पकडे गए तो साफ हो गया कि आर एस एस ने बाकायदा आतंकवाद के लिए एक विभाग बना रखा है। 2010 में उत्तार प्रदेश के कुछ जिम्मेदार संघ प्रचारकों से सी बी आई ने पकड़ा था । कानपुर में अशोक बेरी और अशोक वार्ष्णेय से उन दिनों सी बी आई ने कड़ाई से पूछ ताछ की थी। अशोक बेरी आर एस एस के क्षेत्रीय प्रचारक थे और आधे उत्तार प्रदेश के इंचार्ज थे। वे आर एस एस की केंदीय कमेटी के भी सदस्य थे ।अशोक वार्ष्णेय उनसे भी ऊंचे पद पर थे। वे कानपुर में रहते थे और प्रांत प्रचारक थे । उनके ठिकाने पर  2010 में एक भयानक धमाका हुआ था। बाद में पता चला कि उस धमाके में कुछ लोग घायल भी हुये थे। घायल होने वाले लोग बम बना रहे थे। सी बी आई के सूत्र बताते हैं कि उनके पास इन लोगों के आतंकवादी घटनाओं में शामिल होने के पक्के सबूत हैं और हैदराबाद की मक्का मस्जिद , अजमेर और मालेगांव में आतंकवादी धमाके करने में जिस गिरोह का हाथ था, उस से उत्तर प्रदेश के इन दोनों ही प्रचारकों के संबंधों की पुष्टि हो चुकी हैं ।

               आर एस एस के आतंकवाद के काम का अब पर्दाफाश हो चुका है। राम जन्मभूमि को मुद्दा बना कर उन्होंने राजनीति के लिए नयी पिच तैयार करने का फैसला जनवरी 1986 में ले लिया था। हुआ यह था कि जब इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद हुए चुनावों में कांग्रेस ने भी साफ्ट हिन्दुत्व का खेल चल दिया तो , बी जे पी और आर एस एस जैसे संगठनों के लिए कोई स्पेस नहीं बचा था। उन दिनों अरुण नेहरू नाम के एक कारपोरेट नेता कांग्रेस के भाग्यविधाता हुआ करते थे ।  उन्होंने हिसाब किताब लगाया और देखा कि मुसलमानों के वोट की परवाह किये बिना अगर साफ तरीके से हिन्दूवादी पार्टी के ढाँचे में कांग्रेस को ढाल दिया जाए तो बहुत दिन तक राज किया जा सकता था। 1984 में बी जे पी हार गयी । आर एस एस को अपने लिए जमीन तलाशनी थी, लिहाजा उस वक्त के आर एस एस के बड़े नेताओं की एक बड़ी बैठक जनवरी 1985 में कलकत्ता में बुलाई गयी जिसमें संघ के बड़े नेताओं के अलावा बी जे पी के लाल कृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी की भी शामिल हुए । तय पाया गया कि हिन्दुत्व का ऐसा काम शुरू किया जाए जिसे कांग्रेस के साफ्ट हिंदुत्व वाली लाइन कहीं से चुनौती न दे सके।  बाबरी मस्जिद का मुद्दा निकाला गया। और बात चल पड़ी। कांग्रेस के उस वक्त की समझ में ही नहीं आया कि हमला हुआ कहाँ से है और उस वक्त के कांग्रेसी नेता , संघी जाल में फंसते गए। भगवान राम को केंद्र में रख कर संघियों ने राजनीतिक अभियान शुरू किया और कांग्रेसियों की अदूरदर्शिता के चलते बी जे पी को भगवान राम  की पार्टी के रूप में पहचाना जाने लगा । जिसका चुनावी फायदा बाद में बीजेपी को खूब हुआ।

                उसके बाद गुजरात में नरेंद्र मोदी ने संघी फासिज्म की शुरुआती चाल चल दी। मुसलमानों को सरकारी तौर पर खत्म करने का अपना काम शुरू कर दिया जिसकी वजह से पूरे देश में संघी आतंकवाद के खिलाफ माहौल बनने लगा ।एक बार तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम ने भगवा आतंकवाद कह दिया था,जो वास्तव में हिन्दू धर्म से जुड़ा रंग माना जाता है । आर एस एस ने  बहुत हल्ला मचाया और एक बार फिर अपने को भगवा रंग और हिंदुओं का ठेकेदार बताने की कोशिश की लेकिन कांग्रेस ने फौरन डैमेज कंट्रोल की बात शुरू कर दी। कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने मुंबई की एक सभा में भगवा साफा बाँधा कर दिन भर का कार्यक्रम चलाया और बाद में कहा कि हिन्दू धर्म इस देश में बहुत बड़ी आबादी का धर्म है लेकिन उनमें बहुत मामूली संख्या में लोग बी जे पी के साथ हैं । दिग्विजय सिंह ने कहा कि हिन्दुओं के अलावा अन्य धार्मों के लोग भी भगवा रंग को पवित्र मानते हैं इसलिए किसी एक पार्टी को भगवा रंग का इंचार्ज नहीं बनने दिया जाएगा। वह हमारा रंग है । और उस पर हर भारतवासी का बराबर का अधिकार है । दिग्विजय सिंह ने कहाकि संघी आतंकवाद को भगवा आतंकवाद कह कर पी चिदंबरम ने गलती की लेकिन यह भी सच है कि बी जे पी हर उस इंसान की प्रतिनिधि नहीं है जो भगवा रंग को सम्मान देता है।

                बहरहाल मुसलमानों को आतंकवादी  बताने की आर एस एस की कोशिश को एक और झटका लग सकता है अगर गया के महाबोधि मंदिर में हुए हमले के लिए जिन संदिग्धों को पकड़ा गया है,उनसे कोई ऐसी सूचना मिल जाए जो जांच को असली अपराधियों तक पंहुचा दे । लेकिन अभी बहुत  जल्दी है , जांच का काम पूरा होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी लेकिन संघ की इस लाइन को तो नकारना ही होगा जिसमें मुसलमानों को ही आतंकवादी बताया जाता है क्योंकि अभिनव भारत वाले शुध्द रूप से आतंक के सहारे ही हिंदुत्व का परचम लहराना चाहते हैं और अभिनव भारत राजनीतिक हिंदुत्व के आदि पुरुष वी डी सावरकर का मूल संगठन है।

? शेष नारायण सिंह