संस्करण: 15 अगस्त- 2011

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अपमान को पुनर्परिभाषित  

करने की जरूरत

    ह परम्परा सी बन गयी है कि प्रति वर्ष स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के बाद हर क्षेत्र से दो एक समाचार ऐसे आते हैं जिनमें राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का समाचार होता है। यह अपमान शाम को झंडा न उतारने या झंडे को उल्टा फहराये जाने से सम्बन्धित होता है। इस खबर के बाद कभी पता नहीं चलता कि ऐसे कितने मामलों में क्या हुआ और इस 'अपराध'के लिए किसी को दण्ड मिला या नहीं मिला। लगता है कि ........

  ? वीरेन्द्र जैन


शातिर अपराधियों को चुनाव लड़ने से

रोकने की सरकार की  कोशिश

     केंद्र सरकार ने ऐसी पहल की है कि आने वाले दिनों में अपराधियों के लिए चुनाव लड़ पाना बिलकुल असंभव हो जाएगा। कानून मंत्रालय ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद के विचार के लिए एक  प्रस्ताव भेजा है जिसमें सुझाया गया है कि उन लोगों पर भी चुनाव लड़ने से रोक लगा दी जाए जिनको ऊपर किसी गंभीर अपराध के लिए चार्ज शीत दाखिल कर दी गयी है ।

? शेष नारायण सिंह


बिना विपक्ष के प्रजातंत्र की परिभाषा अधूरी !

इसका मतलब यह नहीं, कि किसी राजनेता के व्यक्तिगत जीवन पर विपरीत टिप्पणी की जाय !

      भारत के प्रजातंत्र की यह एक सही और उचित पहचान है कि यहां, जहां अपने विचार अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता हर नागरिक को प्राप्त है,वहीं परस्पर एक-दूसरे के प्रति सौहार्द्रपूर्ण बर्ताव करने और प्रजातांत्रिक ढंग से मर्यादा की लकीर के भीतर एक राजनैतिक दल के नेताओं को दूसरे राजनैतिक दलों की नीतियों और कार्यक्रमों पर टिप्पणियां करने का हक भी हासिल है न, कि   

? राजेन्द्र जोशी


सरकारी सेवकों का आरएसएस से संबध्द होना

 प्रजातंत्र के लिए गंभीर खतरा है

    भी हाल में भारत सरकार ने मध्यप्रदेश सरकार को परामर्श दिया है कि वह अपने उस आदेश को वापिस ले जिसके अन्तर्गत मध्यप्रदेश शासन ने सरकारी सेवकों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में भाग लेने की छूट दी है। मध्यप्रदेश शासन ने यह आदेश 2006 में जारी किया था। उस समय उसका विरोध हुआ था। इस तरह का आदेश गुजरात में उस समय जारी हुआ था। जब केशूभाई पटेल वहां के मुख्यमंत्री थे। 

? एल.एस.हरदेनिया


जलवायु परिवर्तन :

भारत चिंतित क्यों

    लवायु परिवर्तन का विषय पिछले कुछ वर्षों से घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा है। विश्व के कुछ देशों को छोड़कर लगभग सभी किसी न किसी रूप में जलवायु परिवर्तन की विपदा से प्रभावित पाए गये हैं। जलवायु परिवर्तन से आशय जलवायु का वह परिवर्तन है जिसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कारण मानव क्रियाकलाप है जो वैश्विक वातावरण में बदलाव करते हैं।

? शब्बीर कादरी


आरक्षण : फिल्म से

भयभीत राजनीति

   चूंकि भीतर से राजनीति का चेहरा विद्रूप व विकृत है, इसलिए वह एक ऐसी 'आरक्षण' नाम की फिल्म से भयभीत है जिसमें आरक्षण के कथित रूप को एक सामाजिक बुराई के रूप में दिखाया गया है। हालांकि फिल्म में केवल जातीय आरक्षण को नहीं दर्शाया गया है,बल्कि भारी-भरकम कैपिटेशन फीस लेकर मेडीकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले की सुविधा को भी एक ज्वलंत मुद्दे के रूप में दर्शाया गया है।

? प्रमोद भार्गव


अग्रणी संस्थानों में यह क्या हो रहा है ?

यौन प्रताडना की कड़वी हक़ीक़त

       किसी भी संस्थान या जगह पर यौन उत्पीड़न होना तथा उस पर कार्रवाई नहीं होना दोहरा अपराध है। व्यक्ति विशेष द्वारा किए जानेवाले इस अपराध पर यदि उस संस्थान का प्रशासन सुस्ती बरतता है तो पीड़ित के साथ दोहरा अन्याय होता है। यही स्थिति देश भर में अग्रणी माने जानेवाले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में घटित यौन उत्पीड़न की कई घटनाओं में सामने आयी है।

? अंजलि सिन्हा


संदर्भ : राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कोष का गठन

असंगठित क्षेत्र के कामगारों को
मिलेगी अब सामाजिक सुरक्षा

    मारे मुल्क की आबादी में असंगठित क्षेत्र के कामगारों की तादाद कोई 43 करोड़ है। यह कामगार खेतिहर मजदूर से लेकर निर्माण कार्यों में लगे हुए मजदूर हैं। इन मजदूरों के अलावा एक बड़ी संख्या बीड़ी मजदूरों,रिक्शा चलाने वाले,बुनकरों,ताड़ी निकालने वालों और ऐसे ही कई छोटे-छोटे काम कर अपना परिवार चलाने वालों की है। जाहिर है, यह कामगार बेहद अनिश्चित हालात में अपना और अपने परिवार का जीवन गुजर बसर करते हैं।

? जाहिद खान


एक अजब प्राणी-हमारा पुलिसमैन

     मारी पृथ्वी के कोने-कोने में छितरे एक अज़ब से प्राणी पुलिस मैन की यह गाथा है, जोकि पृथ्वी पर फैली विशाल, विविध-मानव जाति का एक अदना-सा अंश है। कहते है पहले तो ये पुलिस मैन केवल नर ही होते थे पर अब करीब एक शताब्दी हो गई जब से महिला पुलिस यानि वुमैन पुलिस भी होने लगी हैं। तब से पुलिस मैनों की संख्या लगभग सभी देशों में खूब बढ़ गई है।

? डॉ. देवप्रकाश खन्ना


क्या मध्यप्रदेश में अब ग़रीब
अपमानित किये जाएंगे ?

    निश्चय ही यदि गरीबी की मार झेल रहे लोगों को सरकार द्वारा घोषित रूप से अपमानित होने के लिए भी तैयार रहना पड़े तो यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण होगा ? मध्यप्रदेश के 53 लाख से अधिक निर्धन परिवारों के घरों के सामने 'अन्त्योदय परिवार' लिखने के प्रस्ताव को यदि हरी झण्डी मिल गई तो यह सामाजिक भेदभाव बढ़ाने में ही सहायक होगा। सन् 2009-10 के आंकड़ों के अनुसार, मधयप्रदेश में कुल 53.48 लाख बीपीएल परिवार है।

? डॉ. गीता गुप्त



  15 अगस्त-2011

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