संस्करण: 15 अप्रेल-2013

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मध्य प्रदेश में उमा प्रवेश

       किसी भी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन में यह कोशिश की जाती है कि पार्टी के संगठन का गठन ऐसा हो जिससे वह पहले की तुलना में और भी अच्छी तरह काम करे व लोकप्रियता हासिल करे, किंतु राजनाथ सिंह को मजबूरन भाजपा का राष्ट्रीय अधयक्ष बनाये जाने के बाद घोषित की गयी राष्ट्रीय कार्यकारिणी लोकतंत्र की दिशा में जाती हुयी दिखाई नहीं देती। देश भर के निष्पक्ष प्रिंट और विजुअल मीडिया ने भाजपा के इस कदम की एक स्वर से निन्दा की है व भाजपा का पेड मीडिया भी इसकी प्रशंसा नहीं कर सका अपितु उसने मौन रहना ही ठीक समझा।

?   वीरेन्द्र जैन


क्या एक मुसलमान

धर्मनिरपेक्ष हो सकता है?

       लोगों की याददाश्त बहुत कमजोर होती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की विगत दिनो अजमेर यात्रा के दौरान शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा दिये गये बयान के रूप में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना को हमने नजरअंदाज कर दिया है। ठाकरे ने अजमेर में ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के प्रमुख दीवान जेनुल अबेदिन अली खान की खूब तारीफ की क्योंकि उन्होने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विरूद्ध साहर्सपूणै बयान देते हुये कहा था कि उन्हे भारत में प्रवेश करने से पहले भारतीय सैनिकों के कटे हुये सिर लेकर आना चाहिये।

? के एस चलम


महिलाओं के सामने झूठे दांवे करते रहे मोदी ?

       हते हैं कि आदमी के अवचेतन में एक बार जो विकृति या आदत बैठ जाती है वह आसानी से नहीं जाती। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी कुछ ऐसा ही है। पिछले दिनों फिक्की के कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी जी ने आधी आबादी की पूरी परिक्रमा कर डाली, मां और महिला शक्ति का गुणगान भी किया, लेकिन आदत से मजबूर खुद को झूठ बोलने से रोक नहीं पाए। महिलाओं ने मोदी के लिए ताली क्या बजाई मोदी शुरू हुए तो फिर रुके ही नहीं। स्कूल में बच्चियों की पढ़ाई,अस्पताल की दवाई तक और मकान की रजिस्ट्री से लेकर कारोबार उन्होंने अपनी पीठ थपथपाई। लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है।

? विवेकानंद


आडवाणी चरित्रम, देवा न जानम

         ताजा समाचारों के अनुसार भूतपूर्व पी0एम0 इन वेटिंग लालकृष्ण आडवाणी जी ने भाजपा कार्यकर्ताओं का आह्वान किया है कि अयोध्या कांड के लिये गर्व का अनुभव करें।  आडवाणी जी के मन में कब क्या चलता रहता है, समझ पाना कठिन है।  दिसंबर 1992 में जब बाबरी मस्जिद ढहाई जा रही थी तब आडवाणी उस मंच पर आसीन थे जहां से कारसेवकों की विधवंसक गतिविधियों, जिसमें पत्रकारों से दुर्वयसवहार से ले कर बाबरी विध्वंस तक शामिल हैं, को संचालित किया जा रहा था।

? मोकर्रम खान


'बातें हैं-बातों' का क्या !

      क्सर बड़े-बुजुर्गों के मुंह से सुनने में आता रहता है-'बातें ही, बातें हैं भैया!' बातों में धारा ही क्या है? वैसे देखा जाय तो 'बात' भी कोई बुरी बात नहीं है, 'बातों' के भी कोई न कोई मतलब हुआ करते हैं, राजनीति-प्रधान इस युग में किसी का मान-सम्मान, लिहाज, शर्म, हया, दया, करुणा या संवेदनाएं खारिज होती जा रही है।

 ?   राजेन्द्र जोशी


शिक्षा के गलियारों में अप्रेल फूल

                  भारतीय संविधान के निती निर्देशक सिधदांत में किये गये 86 वें संशोधान के अनुसार धारा 21 ए के तहत देश में 6 से 14 साल की उम्र  के प्रत्येक बच्चे को मुफत एंव अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है। इसके लिए भारतीय संविधान के 45 वें अनुच्छेद में संशोधन किया गया। बच्चों के लिए मुफत और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम संसद में वर्ष 2009 में पारित हुआ। इसे 1 अप्रैल 2010 से भारत भर में प्रत्येक राज्य में लागू कर दिया गया। इस अधिनियम के लागू होने के बाद यह माना जा रहा था कि अब सभी गरीब बच्चों को आसानी से शिक्षा उपलब्ध हो जायेगी। इस अधिनियम को लागू हुए 3 वर्ष हो गए लेकिन अब भी शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों को पूरी तरह नहीं मिल सका है।  

? अमिताभ पाण्डेय


मध्यप्रदेश में मनमर्जी का राज

      ध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने कई मामलों में कीर्तिमान स्थापित किए हैं। खासतौर पर कुछ जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर इस सरकार की राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हुई है। इतना ही नहीं, किसानों की खुशहाली के लिए भी इस सरकार के मुखिया को राष्ट्रीय स्तर पर नवाजा जा चुका है। यह बात अलग है कि इस मामले में भी मुख्यमंत्री के सलाहकारों ने आंकड़ों की हेराफेरी कर केंद्र सरकार को गुमराह किया।

? महेश बाग़ी


कौशल विकास केन्द्र: आजीविका सृजन के नए केंद्र

      इंडिया केंन्द्र सरकार ने वर्ष 2013-14 में 90 लाख व्यक्तियों को कौशल प्रदान करने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए एक हजार करोड़ रूपये का प्रावधान भी रखा है। साथ ही केंन्द्र सरकार का लक्ष्य है कि 12 वीं योजना के दौरान 5 करोड़ व्यक्ति दक्षता प्राप्त करेंगें। वास्तव में केंन्द्र सरकार यह कदम के समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने का एक सशक्त कदम है।

? डॉ. सुनील शर्मा


क्रांतिकारी अशफाकउल्ला खां और बिस्मिल की याद को स्थायी बनाने के लिये

समाज और सरकार ने कुछ नहीं किया

        सा कम ही होता हैं कि एक ही शहर के दो महान सपूत क्रांति के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान बनायें। परन्तु यह अद्भुत सौभाग्य उत्तर प्रदेश के शहर शाहजहांनापुर को प्राप्त है। अभी हाल में शाहजहांनापुर में इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन की राष्ट्रीय परिषद का सम्मेलन आयोजित था। मैं इस सम्मेलन में भाग लेने गया था। सम्मेलन के दौरान, मैंने स्थानीय आयोजकों से अनुरोधा किया कि मैं दोनों शहीदों के घरों को देखना चाहूँगा और उनके परिवारजनों से मिलना चाहूंगा। 

? एल.एस.हरदेनिया


जरुरी है प्लास्टिक थैलियों का परिमार्जन

       देश की राजधानी दिल्ली समेत आधा दर्जन से अधिक राज्यों ने अपने यहाँ प्लास्टिक थैलियों के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाते हुए इसे दंडनीय घोषित कर दिया है। कुछ खास तरह के उत्पादों जैसे तम्बाकू व गुटखों आदि की प्लास्टिक पैकिंग पर सर्वोच्च न्यायालय ने पूरे देश में रोक लगा रखी है। अनुमान है कि देश के अन्य राज्य भी जल्द ही प्लास्टिक थैलियों के उपयोग पर रोक लगायेगें। हमारे दैनिक जीवन में किस तरह से प्लास्टिक थैलियों का प्रयोग मौजूद है, यह इसी से जाना जा सकता है कि बीते तीन-चार दशक में यह लगभग 400 गुना तक बढ़ गया है।

 

? सुनील अमर


इंसाफ की मुश्किलें

        न्यायिक सुधार और कानूनी प्रक्रियाओं में बदलाव हो, यह प्रतिबध्दता एक बार फिर सरकार ने दोहराई है। हाल ही में राजधानी दिल्ली में राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्यों को आश्वासन दिया कि लंबित मुकदमों पर धयान देने के लिहाज से निचली न्यायपालिका के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए केंद्र से और अधिक पैसा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को खास तौर से न्यायिक क्षेत्र के लिए पैसा देने के लिहाज से केंद्र सरकार, 14वें वित्त आयोग के साथ मिलकर काम करेगी और उससे यह अनुरोध भी करेगी कि सिर्फ क्रूरतम अपराधों के मामलों के लिए ही नहीं बल्कि......

? राहुल शर्मा


पेटेंट बनाम बौध्दिक

संपदा हड़पने की चालाकी

       श्चिमी देशों द्वारा अस्तित्व में लाया गया पेटेंट एक ऐसा कानून है, जो व्यक्ति या संस्था को बौध्दिक संपदा का अधिकार देता है। मूल रुप से यह कानून भारत जैसे विकासशील देशों के पारंपरिक ज्ञान को हड़पने की दृष्टि से ईजाद में लाया गया। क्योंकि यहां जैव विविधाता के अकूत भंडार होने के साथ,उनके नुस्खे मानव व पशुओं के स्वास्थ्य लाभ से भी जुड़े हैं। इन्हीं पारंपरिक नुस्खों का अधययन करके उनमें मामूली फेरबदल कर उन्हें एक वैज्ञानिक शब्दावली दे दी जाती है    

? प्रमोद भार्गव


  15अप्रेल-2013

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