संस्करण: 15सितम्बर-2008

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पूर्वांचल में हिन्दुराष्ट्र ?

क्या पूर्वी उत्तर प्रदेश 'गुजरात' पैटर्न पर हिन्दुत्व की नयी प्रयोगशाला बनने की ओर बढ़ रहा है या जनतांत्रिक एवम कम्युनिस्ट आन्दोलन लम्बी परम्परा आज भ इस विघटनकारी प्रयोग को शिकस्त देने की स्थिति >सुभाष गाताड़े


लोकतंत्र और पारदर्शिता
लोकतंत्र, जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा संचालित शासन पध्दति है। इसलिए इस पध्दति में पारदर्शिता भी अनिवार्य है। यही कारण है कि अंतत: जानने का अधिकार जनता को देना   >वीरेन्द्र जैन


अंतर्राष्ट्रीय परमाणु बाजार में भारत का ऐतिहासिक प्रवेश विपक्षी दल पचा नहीं पा रहे हैं यह उपलब्धि

भारत के लिए 7 सितम्बर 2008 का दिन वह ऐतिहासिक दिन है जिस दिन अंतर्राष्ट्रीय परमाणु बाजार में शान से प्रवेश करते हुए भारत ने अपने स्वर्णिम भविष्य की राह के अवरोधों को पार करते हुए अपनी विकास-यात्रा के सपनों को साकार कर लिया है।विगत 34 वर्षों से भारत पर   >राजेन्द्र जोशी


  

खुल गये तरक्की के दरवाजे
रमाणु करार पर एनएसजी की मुहर लगने  के  बाद भारत  का परमाणु वनवास तो खत्म हुआ ही है साथ ही उसकी तरक्की के  दरवाजे भी खुल गये हैं. करार  के बाद देश में चल रही बिजली की किल्लत से मुक्ति मिलने  के साथ-साथ लाखों रोजगार भी उपलब्ध होंग   >नीरज नैयर


अल्पसंख्यकों पर हो रही ज्यादतियाँ

देश की एकता के लिये घातक

उड़ीसा समेत देश के अनेक स्थानों में हुई घटनाओं ने ईसाईयों के मन में असुरक्षा  की भावना पैदा कर दी है। उड़ीसा की घटनाओं के बाद मध्यप्रदेश में भी ईसाईयों, उनके पूजा स्थलों और उनके द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाओं पर हमले हुए हैं।ईसाईयों के साथ देश के एक >एल.एस.हरदेनिया


जन आशीर्वाद यात्रा-फ्लाप शो

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर इन दिनों एक अजीब-सा जुनून सवार है। उनका दावा है कि वे फिर से सत्ता प्राप्त कर इतिहास रचेंगे। इसके लिए वे हर जायज-नाजायज़ तरीके अपनाने से भी नहीं चूक रहे हैं। पहले उन्होंने अलग-अलग वर्गों की  एक दर्ज़न से अधिक पंचायतें कर घोषणाओं के पहाड़ खड़े कर दिए। >महेश बाग़ी


कानपुर बम विस्फोट की तहकीकात

से हो सकते हैं अहम खुलासे

हमारे मुल्क के अंदर अभी हालिया सालों में घटी आतंकवाद की छोटी-बड़ी वारदातों के पीछे केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों के कुछ अफसरों का शक चरम हिन्दू कट्टरपंथियों संगठनों की तरफ रहा है और खुफिया एजेंसिया आतंकी घटनाओं के स्वरूप को देखकर सरकार >जाहिद खान


सामाजिक चेतना ही स्वस्थ भारत की कुंजी है
 हाल ही में एच.आई.व्ही पॉजिटिव एवं एड्स से संबंधित दो ऐसे मामले प्रकाश में आए हैं जो तथाकथित आधुनिक सभ्य समाज की संवेदनहीनता को उजागर करते हैं। संयोगात्-पहला मामला मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का है, जहाँ अकस्मात रेल से   >डॉ.गीता गुप्त


''युवाओं में प्रतिष्ठित ब्रांडों के प्रति बढ़तआकर्षण''
आज समय बहुत बदल गया है, अपने निर्णय खुद लेने वाले, उच्च आकांक्षा और सब कुछ हासिल कर लेने की चाह रखने वाले युवा वर्ग पर आज मार्केटर्स की निगाहें हैं। अब वह जमाना नहीं रहा, जब अभिभावक ही बच्चों की खरीददारी का निर्णय  >स्वाति शर्मा


प्राकृतिक आपदाओं में आदमी
वसुधैव कुटुम्बकम् अर्थात् विश्व बंधुत्व की भारतीय अवधारणा प्राकृतिक संपदा के सीमित उपभोग के साथ वैश्विक सामुदायिक हितों से जुड़ी थी लेकिन ग्लोबलाईजेशन अर्थात विश्व ग्राम की अमेरिकी अवधारणा औद्योगिक प्रोद्यौगिकी विस्तार के बहाने ऐसे हितों की नीतिगत पोषक बन गई  > प्रमोद भार्गव


ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था और परम्परागत ज्ञान

प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी का कहना है कि 11 वीं पंचवर्षीय योजना मूल रूप से ज्ञान निवेश की योजना है। प्रधानमंत्री का यह कथन यू.पी.ए. सरकार की शिक्षा तथा ज्ञान आघारित अर्थ्रव्यवस्था के विकास के लिये प्रतिबध्दता को प्रदर्शित करता है। वास्तव में यू.पी.ए.   >डॉ. सुनील शर्मा


ऑंखों को लगी कंप्यूटर की नजर
हमेशा से आवश्यकता आविष्कार की जननी रही है। अंधेरे से लड़ने के लिए थॉमस अल्वा एडिसन ने बिजली के बल्ब की खोज की और हमने अपनी रातों की नींद उड़ाकर मोतियाबिंद जैसे रोगों की संख्या में बढ़ोतरी की। धीरे-धीरे आविष्कार बढ़ते गए और हमारी बीमारियाँ भी। >डॉ. महेश परिमल


 
15सितम्बर2008

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