संस्करण: 15दिसम्बर-2008

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मध्यप्रदेश में चुनावी नतीजे

जनता जीती-विपक्ष के मुद्दे हारे

निर्वाचन 2008 में पांच राज्यों के जो चुनाव परिणाम आये हैं, उनसे यह स्पष्ट हो गया है कि विभिन्न राजनैतिक दलों ने चुनाव प्रचार के दौरान अपनी अपनी प्रतिद्वंद्वी पार्टियों और उम्मीदवारों के खिलाफ भ्रष्टाचार कुप्रशासन, भय आतंक और भाई भतीजावाद के जितने भी आरोप लगाये थे  >राजेन्द्र जोशी


म.प्र. विधानसभा चुनाव परिणाम

यह तकनीकी जीत नैतिक हार जैसी है!

मध्यप्रदेश में भाजपा की सत्ता बच गयी। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि भाजपा को सत्ता से बाहर करने में कुछ लोगों ने काँग्रेस उम्मीदवारों से उम्मीद लगा रखी थी पर काँग्रेस के उम्मीदवार सफल नहीं हो सके-उम्मीदवार इसलिए क्योंकि यहाँ काँग्रेस ने पार्टी स्तर पर >वीरेन्द्र जैन


उमा अध्याय का अंत

सोमालिया के बंदरगाह पर जल दस्युओं ने फिरौती की भारी रकम प्राप्त होने के बाद दो माह से बंधाक भारतीयों को छोड़ा। लगातार अपहरण, फिरौती, हिंसा से भारत सहित अन्य देशों को काफ़ी क्षति हो रही है। नौसेना से संबध्द मुम्बई के मेरीटाइम हिस्ट्री सोसायटी के सलाहकार प्रो.बी. अरूणाचलम के मुताबिक, जब से समुद्री व्यापार आरंभ हुआ, तब से लुटेरे अपना आतंक से वसूली में जुट गये।  >महेश बाग़ी


क्या साम्प्रदायिकता के आधार पर बने वोट बैंक ने भाजपा को पुन: सत्ता में बैठाया है?

क्या भारतीय जनता पार्टी अकेले ''विकास'' के नारे पर चुनाव जीती है? इस प्रश्न का उत्तर पूरी तरह ''हाँ'' में नहीं दिया जा सकता। कारण स्पष्ट है क्योंकि विकास का जबरदस्त भ्रम जाल बिछाने के साथ साथ भारतीय जनता पार्टी ने बहुत ही विस्तृत रणनीति के अन्तर्गत >एल.एस.हरदेनिया


ध्वस्त हुआ बसपा का अखिल भारतीय आधार

दलित हितों की रक्षा और सर्वजन के नारे के बूते दिल्ली की सत्ता हथियाने की दौड़ में लगी मायावती का स्वप्न तो चकनाचूर हुआ ही बहुजन समाज पार्टी का अखिल भारतीय आधार भी धवस्त हो गया। परिपक्व व जागरूक मतदाता ने इतनी समझदारी दिखाई कि सत्ता की चाबी अपने हाथ लगने और तीसरी ताकत के रूप में दम भरने वाले अन्य राष्ट्रीय >प्रमोद भार्गव


आतंकवाद अर्थात प्रश्न शस्त्र एवं शास्त्र का!

रतवर्ष में आतंकवाद की जितनी पिछली गतिविधियां हुई है, उनसे यह स्पश्ट होता है कि आतंकवाद का वर्तमान संस्करण सुव्याख्यायित प्रबंधन और सुव्यवस्थित प्रशिक्षण का संयुक्त प्रतिफल है। इस ''संयुक्त प्रतिफल''में जब नवीनतम घातक तकनीक का भी समावेश >पुनीत कुमार


अब तो पाक को सबक सिखाना चाहिए

पैदा होने के चंद महीने बाद बच्चा हाथ-पांव मारना शुरू कर देता है, कुछ साल बाद लड़खड़ाकर चलना सीख जाता है, कुछ और वक्त बाद अपने काम खुद करने लगता है और 20-22 तक आते-आते इतना परिपक्व हो जाता है कि अपने फैसले खुद ले सके लेकिन आजादी के 61 साल बाद भी भारत इतना >नीरज नैयर


रूस के साथ करार से बढ़ी दोस्ती

रूस और भारत के मध्य परमाणु करार समझौते से धीमी गति से चल रही दोस्ती में अब सक्रियता आ रही है। यह बदलती वैश्विक कूटनीति में भारत के लिए लाभप्रद होगा। अमेरिका पर निर्भरता और एकध्रुवीय व्यवस्था से बढ़ी निरंकुशता पर नियंत्रण के लिए >अंजनी कुमार झा


बिगड़ती जलवायु, बिगड़ता स्वास्थ्य

मानव जनित ग्रीन हाउस गैसों विशेषकर कार्बन डाय ऑक्साइड के उत्सर्जन से होना वाला खतरा नि:संदेह अब कोई अटकलबाजी का खेल नहीं रह गया है। वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैसों के बढ़ते जमाव के प्रलयकारी परिणाम अब हमारे सामने आने लगे हैं। ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में बढ़ोत्तरी से वायुमंडल के तापमान में वृध्दि हो रही है। >डॉ. सुनील शर्मा


आधी आबादी के संकट और उनसे बचने के नारी सुरक्षा कानून

आजादी प्राप्ति के बाद से ही देश के राजनेताओं, कर्णधारों और कानूनविदों द्वारा समय-समय पर कानूनों के निर्धारण महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के समय समय पर दिये जाते रहे हैं। इन तमाम कोशिशों के बावजूद आधी आबादी आज भी संकट में ही हैं। >डॉ.राजश्री रावत ''राज''


धूर्त प्रोग्रामों से जरा बचके...

दुनिया में अच्छे लोग होते हैं तो बहुत गंदे, धूर्त लोग भी होते हैं. यह बात कम्प्यूटर अनुपयोगों और प्रोग्रामों में भी लागू होती है. इंटरनेट के सर्वत्र आसान पहुँच और बढते पयोगों के कारण बहुत पहले से धूर्त्तों को भी यहाँ अपनी कलाकारी दिखाने, जालसाजी फैलाने, शिकार फांसने की जमीन दिखाई देने लगी थी. इंटरनेट पर धूर्तताई दिनोंदिन बढनी ही है, >रविशंकर श्रीवास्तव


वाह रे मोबाइल

आधुनिक विज्ञान ने कम्प्यूटर के क्षेत्र में एक ऐसी चंचल संतान को जन्म दिया है जिसने आज सारे स्थावर जगत में बड़ी हलचल मचा दी हैं। इस मोबाइल नाम के न चलने वाले यंत्र की चपलता का ठीक से अनुमान लगाना भी आज सब के बूते की बात नहीं। जैसे कभी कभी किसी बड़े अमीर व्यक्ति का नाम गरीबदास >डॉ. देवप्रकाश खन्ना


15दिसम्बर2008

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