संस्करण: 14 अक्टूबर-2013

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गटरसफाई का 'आध्यात्मिक अनुभव'

जनाब मोदी के ऐसे विचारों पर चर्चा क्यों नहीं ?

       क्या मल उठाने या गटर साफ करने के काम को - जिसने लाखों लोगों को बेहद अपमानजनक स्थितियों में पीढ़ी दर पीढ़ी ढकेला है -आध्यात्मिक अनुभव कहा जा सकता है ? निश्चित ही नहीं, यह अलग बात है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी, जो इन दिनों प्रधानमंत्री के प्रत्याशी के तौर पर देश के अलग हिस्सों में भ्रमण कर रहे हैं, इस मसले पर बिल्कुल अलग ढंग से सोचते हैं।    

? सुभाष गाताड़े


मौका परस्त मोदी और

बदजुबान समर्थक

        गुजरात के मुख्यमंत्री को आजकल शौचालय से प्रेम हो गया है, और उनके शौचालय प्रेम की सुगंध में भाजपा सराबोर है। हालांकि पिछले साल जब कांग्रेस नेता और मंत्री जयराम रमेश ने ऐसी ही बातें कहीं थीं तो उनके दरबाजे पर पेशाब की गई थी और पेशाब से भरी बोतलें रखीं गईं थीं, लेकिन मोदी ने जब कहा कि देवालय से पहले शौचालय जरूरी है तो भाजपा के लिए वह पवित्र हो गया। हालांकि तथाकथित विकसित गुजरात में ही इसकी हकीकत कड़वी है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक वहां मात्र 34 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को शौचालय उपलब्ध थे, जबकि राय सरकार ने उसे बढाकर 84 प्रतिशत बताया था। 

? विवेकानंद


मोदी, हिटलर और प्रचार

       क्या नरेन्द्र मोदी और एडॉल्फ हिटलर के बीच कोई समानता है? यह बुध्दिजीवी लोगों के मन में पैदा होने वाला सवाल है। यदि आप यह सवाल खुद मोदी या उनके अनुयायियों से पूछे तो आपको इसका जवाब न तो सकारात्मक मिल सकता है और न ही नकारात्मक। गोधरा के दंगों की घटना के पूर्व मोदी का व्यक्तित्व और प्रभामण्डल न तो गुजरात की राजनीति में ज्यादा प्रभावकारी था और न ही गुजरात के बाहर बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण था। सिर्फ गोधरा की घटना के बाद ही नरेन्द्र मोदी हिन्दुओं के मसीहा के रूप में उभरे। उन्होने कुछ दिनों पूर्व ही समाचार एजेंसी रायटर को दिये साक्षात्कार में खुद को हिन्दू राष्ट्रवादी घोषित किया है।

 ? अल्का गंगवार


मोदी के बाद एपको से चिपके शिवराज

      सोशल मीडिया पर गुजरात के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना में कुछ लिखने वालों पर एक खास किस्म के प्राणी गालियों की बौछार करते हुए दौड़ पड़ते हैं। हालात यहाँ तक बिगड़े हुए हैं कि एक वरिष्ठ पत्रकार को अपना टि्वटर एकाउंट कुछ समय के लिए बंद करना पड़ता है। आरोप लगे कि ऐसी निकृष्ट हरकतें करने वाले दरअसल पेड वर्कर हैं जिन्हें एक विदेशी मूल की पीआर एजेंसी ने हायर किया हुआ है। इसी आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह सूचना भी आयी थी कि सोशल मीडिया में टि्वटर पर नमो के आधो से ज्यादा फर्जी फॉलोवर हैं। 

? हस्तक्षेप से साभार


बाहुबलियों की तरह व्यवहार करते भाजपा नेता

         देश की आंतरिक सुरक्षा और जाँच एजेंसियों की स्थापना सुरक्षा और जाँच के लिए ही की गयी है और उन एजेंसियों ने जिन  महत्वपूर्ण कार्यों को किया है उनकी सूची बहुत लम्बी है। पिछले कुछ वर्षों से इन एजेंसियों का काम बहुत ही कठिन हो गया है क्योंकि उन्हें उन लोगों की जाँच करना पड़ रही है जो अवैधा ढंग से एकत्रित धन के सहारे या तो राजनेता बन गये हैं या धार्मिक वेषभूषा में घूम सरल स्वभाव लोगों को बरगला कर अटूट सम्पत्ति खड़ी कर चुके  हैं। ये दोनों ही तरह की ढालें उन सन्दिग्धों ने कानून से अपनी सुरक्षा के लिए लगा रखी हैं।

 ?   वीरेन्द्र जैन


तीसरे मोर्चे पर व्यर्थ की परेड

           न् 2014 में संपन्न होने जा रहे लोकसभा के आम चुनाव में देश की जनता के सामने गैर कांग्रेस तथा गैर भाजपा का मजबूत राजनैतिक विकल्प रखने के लिए माकपा नेता प्रकाश करात भले ही समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के साथ मिलकर लंबे समय से एक प्रयास करते हुए दिख रहे हों लेकिन, जिस तरह से मुलायम सिंह यादव ने यह कहकर कि आम चुनाव बाद ही तीसरे मोर्चे के गठन पर कोई बात हो सकती है, ने तीसरे मोर्चे के गठन की सारी संभावनाओं पर ही पूर्ण विराम लगा दिया है। 

? हरे राम मिश्र


खदान घोटालों में मध्यप्रदेश ने

कर्नाटक को पीछे छोड़ा

      दानों के मामले में मध्यप्रदेश, कर्नाटक की येदियुरप्पा सरकार से प्रतियोगिता करते नजर आ रहा है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 08 अक्टूबर 2013  को पारित आदेश से स्पष्ट रूप से ऐसा ही प्रतीत होता है। सर्वोच्च न्यायालय ने खदानों के आवंटन में यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश से शिवराज सिंह चौहान की सरकार की प्रतिष्ठा को गहरा धाक्का लगा है। इसके अतिरिक्त, मेडीकल कालेजों में प्रवेश के मामले में भ्रष्ट तरीके अपनाने के जो सनसनीखेज मामले उजागर हुए हैं वे भी भाजपा सरकार के खाते में ही जायेंगे।

?  एल.एस.हरदेनिया


मध्यप्रदेश में

जिन्दगी की जंग हारते बच्चे

      ध्यप्रदेश में चुनावी रैलियों पर करोड़ों रूपए खर्च करने वाली भाजपा सरकार भूख, गरीबी और विभिन्न बिमारियों के कारण लगातार हो रही बच्चों की मौत पर ध्यान नहीं दे रही है। शायद यही कारण है कि मध्यप्रदेश में जन्म के एक वर्ष के भीतर मरने वाले बच्चों की मृत्यदर पूरे भारत में सबसे अधिक है। यहां सरकार के पास चुनावी तमाशों पर खर्च करने के लिए तो करोड़ों रूपए है लेकिन भूख और बिमारी से बच्चों को बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। बच्चों के कल्याण के दावे कागजी साबित हो रहे है।  

 

? अमिताभ पाण्डेय


कुछ शहर बन गये हैं, मरीजों के साथ

        मारे यहां का हर शहर और हर गांव अपनी एक अलग विशेषता लिए होता है। कतिपय विशेषताओं की वजह से उस स्थान की प्रसिध्दी दूर-दूर तक फैल जाती है। कई गांव वहां की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की वजह से मशहूर होते हैं। कुछ गांव वहां पैदा होने वाली फसलों की वजह से, वहां पैदा होने वाले फल-फूलों और सब्जियों की वजह से तो कुछ वहां विभिन्न पर्वों और उत्सवों के मौकों पर भरने वाले मेलों की वजह से अपनी पहचान बना लेते हैं। साथ ही कुछ गांव वहां निवास करने वाले अति विशिष्ट व्यक्तियों और वहां से बहने वाली नदियों और वहां मौजूद मंदिर-मस्जिदों की विशेषताओं के कारण जाने जाते हैं।   

? राजेन्द्र जोशी


तेलंगाना पर अब

तकरार बंद होनी चाहिए

       केन्द्र सरकार के अलग तेलंगाना पर मुहर लगाने के दो महीने से अधिक समय बाद, कैबिनेट ने तेलंगाना गठन के गृह मंत्रालय के प्रस्ताव को हाल ही में अपनी मंजूरी दे दी और तौर-तरीकों को तय करने के लिए मंत्रियों का एक समूह (जीओएम) गठित करने का फैसला किया। विभाजन के लिए बनाए गए मंत्रियों के समूह की अध्यक्षता वित्ता मंत्री पी चिदंबरम करेंगे। मंत्री समूह विशेष वित्तीय मदद के मुद्दे पर भी विचार करेगा, जो सीमांध्र को उसकी पृथक राजधानी बनाने और पिछड़े वर्ग की विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से जरूरी होगा। नया राज्य बनाने की इस पूरी प्रक्रिया में कोई पांच से छह महीने तक का वक्त लगेगा।      

 

? जाहिद खान


ईवीएम विश्वसनीयता का सवाल

        हाल ही में ईवीएम में कुछ ऐसे सुधार किए गए हैं जिससे मतदाता को एक प्रिंट आउट भी प्राप्त होगा जिससे यह मालूम हो सके कि मतदाता का वोट उस प्रत्याशी को मिल चुका है जिसे उसने चुना है। इस व्यवस्था को कुछ राजनीतिक दलों विशेषकर भाजपा की ओर से जताई गई आशंकाओं के मददेनजर लाया जा रहा है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार ईवीएम मशीनों में  अब प्रत्याशी को नकारने हेतु एक बटन और जोड़े जाने की सिफारिश भी की गई है जिसक ी सहायता से मतदाता अपने क्षेत्र के प्रत्याशी के संबंध में इस बटन का उपयोग कर अपना मत इस प्रकार व्यक्त कर सकेगा कि इनमें से कोई नहीं।  

? शब्बीर कादरी


16 अक्टूबर विश्व खाद्य दिवस पर विशेष

सबके मुंह में हो निवाला

       संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन की एक रपट के अनुसार, समूचे विश्व में पिछले दो सालों में भुखमरी घटी है परन्तु आज भी हर आठवां व्यक्ति भूख से पीड़ित है। वर्ष 2000में संयुक्त राष्ट्र ने कई लक्ष्य निधर्ाारित किए थे। पहला लक्ष्य था वर्ष 2015 तक अत्यधिक गरीबी और भूख को आधा कम कर देने का। और सचमुच, वर्ष 1991-92 के बाद दुनिया में भूख में 91 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसमें सबसे अधिक योगदान चीन और वियतनाम का है।    

 

? डॉ. गीता गुप्त


  14 अक्टूबर-2013

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