संस्करण: 14 अक्टूबर-2013

कुछ शहर बन गये हैं, मरीजों के साथ

? राजेन्द्र जोशी

       मारे यहां का हर शहर और हर गांव अपनी एक अलग विशेषता लिए होता है। कतिपय विशेषताओं की वजह से उस स्थान की प्रसिध्दी दूर-दूर तक फैल जाती है। कई गांव वहां की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की वजह से मशहूर होते हैं। कुछ गांव वहां पैदा होने वाली फसलों की वजह से, वहां पैदा होने वाले फल-फूलों और सब्जियों की वजह से तो कुछ वहां विभिन्न पर्वों और उत्सवों के मौकों पर भरने वाले मेलों की वजह से अपनी पहचान बना लेते हैं। साथ ही कुछ गांव वहां निवास करने वाले अति विशिष्ट व्यक्तियों और वहां से बहने वाली नदियों और वहां मौजूद मंदिर-मस्जिदों की विशेषताओं के कारण जाने जाते हैं। इसी तरह शहरी क्षेत्रों की भी पहचान कायम हो जाती है। कुछ शहर औद्योगिक केन्द्रों से, कुछ वहां की उच्चस्तरीय शिक्षण संस्थाओं की वजह से या व्यावसायिक केन्द्र होने के नाते अपना अस्तित्व बना लेते हैं।

             इन कारणों के अलावा भी बहुत से ऐसे कारण होते हैं जिसकी वजह से कुछ शहरों की ख्याति दूर-दूर तक फैल जाती है। शहरों पर आबादी का दबाव बढ़ता रहता है। इसकी वजह यह है कि शहरों में ही लोगों को शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं। हालांकि गांवों में भी कृषि आधारित व्यवसाय और कृषि उत्पादन के क्षेत्र रोजगार के लिए उपलब्धा हैं किंतु मनुष्य की प्रवृत्ति सदैव चमक-दमक वाले सर्व सुविधायुक्त क्षेत्र में रहने की होती है। और यह सुविधा उन्हें गांवों के बजाय शहरों में ज्यादा मिल जाया करती हैं। शिक्षा और रोजगार के अलावा वर्तमान दौर में शहरी क्षेत्र स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी हो गये हैं। शहरी क्षेत्रों में उद्योग और व्यवसाय की बहुलता की तरह ही अब स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्र पर भी व्यवसायिकता ने अपनी पकड़ बना ली है।

             शासन की ओर से भी शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र पर नियंत्रण किया जाता है। इन क्षेत्रों का संचालन हालांकि सरकार के अधाीन होता है किंतु निजी क्षेत्र में इन क्षेत्रों का संचालन बढ़ गया है। निजी क्षेत्र में शिक्षण संस्थाओं की तरह ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बदलाव आया है। चिकित्सा व्यवस्था के लिए निजी क्षेत्रों के मुखातिब होना लोगों की एक तरह से मजबूती बन गई है। इसका कारण यह है कि कतिपय कारणों से शासन की व्यवस्था के प्रति जनता की विश्वसनीयता कम हो गई है। क्योंकि शासकीय संस्थाओं में चिकित्सा विशेषज्ञों की कमी होती है और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ अपनी पदस्थापना से कतराते जाते हैं। शासन की व्यवस्थाऐं अपने सीमित साधनों के माध्यम से ही संभव होती है। इस दृष्टि से विभिन्न बीमारियों के मरीजों को विषय में विशेषज्ञों की सेवाएं नहीं मिल पाती है। ग्रामीण क्षेत्र की तो चिकित्सा सेवा बुरी तरह से प्रभावित हो जाती है क्योंकि कोई भी चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पदस्थापना नहीं चाहता है।

            समुचित चिकित्सा सुविधा हर जगह नहीं होती। ग्रामीण और कतिपय शहरी क्षेत्रों के मरीजों के उपचार के लिए देश के कतिपय बड़े शहर ही अपनी बेहतर चिकित्सा सेवा के लिए प्रसिध्द हैं। कुछ शहर की चिकित्सा संस्थायें सचमुच में मरीजों के उपचार की शिक्षा में अच्छा काम कर रही है। कोई परिवार अपने किसी सदस्य की बीमारी के उपचार के लिए यह नहीं देखता कि इसमें कितना पैसा लगेगा या कितने दिन किसी बड़े शहर में मरीज की चिकित्सा में लगेंगे। उसे तो इस बात से मतलब होता है कि मरीज को सही इलाज सही वक्त पर मिल जाय। मरीज को उसकी बीमारी से संबंधित विषय का विशेषज्ञ शहरी अस्पतालों में ही उपलब्ध होता है। मुंबई, दिल्ली, चैन्नई, जैसे शहरों की ओर अक्सर लोग अपने मरीजों को लेकर जाया करते हैं और वहां से वे सफल होकर लौटते भी हैं। नई दिल्ली का भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (आई.आई.एम.) इस दिशा में भारत के कोने कोने से आने वाले मरीजों का बेहतर इलाज कर रहा है। क्योंकि इस संस्थान प्राय: सभी तरह के रोगों के विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध हो जाती हैं। केंसर और हृदय रोगों के मरीजों को अक्सर मुंबई ले जाया जाता है क्योंकि छोटी-मोटी बीमारियों के साथ ही इन प्राणघातक बीमारियों के लिए बेहतर से बेहतर सुविधाएं वहां मौजूद हैं। आंखों के इलाज के लिए चेन्नई ने अपनी अलग पहचान बना ली है। यहां नेत्र विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं की वे सभी मरीज प्रशंसा करते सुने गये हैं जो वहां अपनी आंखों का परीक्षण और उपचार कराकर लौटते हैं।

            इन शहरों के साथ ही नागपुर शहर ने भी चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली है। नागपुर में भी प्राय: प्रत्येक क्षेत्र के चिकित्सा विशेषज्ञ उपलब्धा हैं। निजी क्षेत्र में चिकित्सा सेवा यहां की एक महत्वपूण्र पहचान बन गई है। महाराष्ट्र के अलावा उसके आसपास के राज्यों के मरीजों को नागपुर में निजी क्षेत्र की स्वास्थ्य संस्थाओं की सेवाओं का लाभ उठाते देखा जा सकता है। नागपुर की चिकित्स सेवा, जो निजी क्षेत्र में फैली है, उनमें इलाज के लिए नागपुर पहुंचने वाली ट्रेनों बसों और निजी वाहनों से प्रतिदिन प्राय: हर रोग के मरीजों को आते-जाते देखा जाता है। जबलपुर से नागपुर जाने वाली ट्रेन को एम्बुलेंस की संज्ञा दे दी है। नागपुर के प्राय: प्रत्येक घर मरीज मेहमानों से भरे रहते हैं। इसका कारण यह है कि वहां निजी क्षेत्र की चिकित्सा सेवा के प्रति लोगों में विश्वास की भावना है। निजी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा होने के बावजूद वहां ऐसा महसूस नहीं होता कि उन्हें चिकित्सा के नाम पर लूटा जा रहा है। वहां इलाज भी बेहतर होता है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण ही कतिपय शहर विशेषकर नागपुर एक तरह से मरीजों के लिए तीर्थ जैसे लगने लगे हैं।

? राजेन्द्र जोशी