संस्करण: 14 अक्टूबर-2013

मोदी के बाद एपको से चिपके शिवराज

? हस्तक्षेप से साभार

       सोशल मीडिया पर गुजरात के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना में कुछ लिखने वालों पर एक खास किस्म के प्राणी गालियों की बौछार करते हुए दौड़ पड़ते हैं। हालात यहाँ तक बिगड़े हुए हैं कि एक वरिष्ठ पत्रकार को अपना टि्वटर एकाउंट कुछ समय के लिए बंद करना पड़ता है। आरोप लगे कि ऐसी निकृष्ट हरकतें करने वाले दरअसल पेड वर्कर हैं जिन्हें एक विदेशी मूल की पीआर एजेंसी ने हायर किया हुआ है। इसी आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह सूचना भी आयी थी कि सोशल मीडिया में टि्वटर पर नमो के आधो से ज्यादा फर्जी फॉलोवर हैं। तभी यह शक और गहरा गया था कि जरूर इस गाली गलौच करने वाली गुण्डा वाहिनी के पीछे कोई संगठित कंपनी है।

             आरोप लगे थे कि तथाकथित मुख्य धारा के मीडिया में मोदी को सुपरमैन और विकास का महापुरूष दिखाने का खेल भी एक पीआर एजेंसी का ही था। हमने पहले भी खबर प्रकाशित की थी कि कैसे इस पीआर कंपनी ने एक बार इजराइल को भी नक्शे से गायब कर दिया था। उत्ताराखण्ड त्रासदी को समय भी मोदी 15000 गुजरातियों को बचा कर ले गए, यह अफवाह खबर बनाकर तथाकथिक मुख्यधारा के मीडिया में परोसने का काम भी इस कंपनी का कौशल बताया गया था। 23 जून 2013 की सुबह खबर चलना शुरू हो गयी कि उन्होंने उत्तराखंड की दुर्गम पहाड़ियों में फँसे हुये 15000 गुजरातियों को तलाश लिया और उनको वापस गुजरात भेज दिया। मोदीत्व के प्रभाव वाले चैनलों की यह मुख्य खबर थी। किसी ने एक सेकण्ड के लिये भी नहीं सोचा कि इस कारनामे को अंजाम देने के बारे में मोदी की पी आर एजेन्सी से आयी हुयी खबर को जाँच परख कर चलाया जाये।

            अप मोदी सरकार की इस पीआर कंपनी पर मधय प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का दिल आ गया है। हस्तक्षेप को जो दस्तावेज हाथ लगे हैं उसके मुताबिक मधय प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2013-14 में विशेष प्रचार अभियानों के लिए एपको के अहमदाबाद स्थित भारतीय फ्रेंचाइजी मेसर्स आकृति प्रमोशन्स एण्ड मीडिया लिमिटेड ( एन एप्को) को हायर कर लिया है।

            ''मध्य प्रदेश माधयम'' के पत्र संख्या मप्रमा/परियोजना/2013/08-। के मुताबिक एपको की इस फ्रेंचाइजी जो काम सौंपे गए उनमें ''सोशल मीडिया का संचालन प्रतिदिन करना'' और ''सक्षम स्वीकृति प्राप्त कर सामग्री अपलेड करना'' शामिल है। साथ ही ''सोशल मीडिया से जुड़े फेसबुक, वेबसाइट, ब्लाग्स, यूटयूब आदि पर प्रतिदिन कमेंट्स अपलोड करना, लोगों की प्रतिक्रिया से रोजाना अवगत कराना, इनका व्यवस्थित संपादन करना, प्रतिदिन कार्यक्रमों के फोटो-वीडियो आदि को वेबसाइट पर अपलोड करना'' का जिम्मा भी इसी कम्पनी के पास है।

           इसके अलावा मुख्यमंत्री के सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की उनकी वेबसाइट पर इंटरनेट द्वारा लाइव स्ट्रीमिंग का काम भी इस कम्पनी को करना है। कार्य आदेश के मुताबिक इन कार्यों के  लिये उक्त संस्था की टीम म.प्र. में अधिाकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेगी, उक्त कार्यों के लिये एजेंसी अपने 2 विशेषज्ञ और 2 तकनीकी व्यक्तियों की सेवाएं उपलब्धा करायेगी और भोपाल में अपना कार्यालय खोलेगी।

            सोशल मीडिया का नियमित प्रतिदिन अपलोडिंग, संचालन एवं संधारण, कंसल्टिंग, सुपरविजन, क्रियेटिव एण्ड मेनपावर कास्ट एसोसिएचेड, प्रतिदिन इंपेक्ट रिपोर्ट के लिये दस लाख रुपये प्रतिमाह की दर तय की गयी है। जबकि वेबसाइड डेवलपमेंट,अपडेशन सोशल मीडिया प्रोफाइल एप्स एण्ड मेनेजिंग लाईव स्ट्रीमिंग आफ इवेंट (विबकास्टिंग), लाइव स्ट्रीमिंग प्रशिक्षण के लिये 14,35,000/- की दर तय की गयी है।

            इसलिये अब अगर सोशल मीडिया पर नमो भक्तों की तरह शिवभक्तों का भी ताण्डव और गाली-गलौज देखने को मिले या मुख्यधारा मीडिया में कहीं कोई ऐसी खबर देखने को मिले कि 500 साईकिल रिक्शा से शिव जी आसमान में 5000 फिट की ऊँचाई पर उड़े तो हौले से मुस्कराइएगा और ''एपको से चिपको'' का स्मरण कीजिएगा।

           हरदा ने साबित किया कि विकास का मॉडल गुजरात से मप्र पहुँच चुका है और अब पीआर कंपनी भी...

? हस्तक्षेप से साभार