संस्करण: 14 अक्टूबर-2013

मौका परस्त मोदी और

बदजुबान समर्थक

 

? विवेकानंद

       गुजरात के मुख्यमंत्री को आजकल शौचालय से प्रेम हो गया है, और उनके शौचालय प्रेम की सुगंध में भाजपा सराबोर है। हालांकि पिछले साल जब कांग्रेस नेता और मंत्री जयराम रमेश ने ऐसी ही बातें कहीं थीं तो उनके दरबाजे पर पेशाब की गई थी और पेशाब से भरी बोतलें रखीं गईं थीं, लेकिन मोदी ने जब कहा कि देवालय से पहले शौचालय जरूरी है तो भाजपा के लिए वह पवित्र हो गया। हालांकि तथाकथित विकसित गुजरात में ही इसकी हकीकत कड़वी है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक वहां मात्र 34 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को शौचालय उपलब्ध थे, जबकि राय सरकार ने उसे बढाकर 84 प्रतिशत बताया था। बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार द्वारा जो प्रशासन और सुशासन के मुद्दे उठाए जा रहे हैं, वह तो एक मुखौटा हैं, असली बात सांप्रदायिक धुव्रीकरण की है।

              गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, कर्नाटक हिमाचल और उत्तराखंड सहित 7 राज्यों में कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने है और देश के यादातर रायों में बीजेपी मौजूद ही नहीं है। बीजेपी विकास के जिस गुजरात मॉडल के अनोखा होने का दावा कर रही है और उसके बारे यह कहा जा रहा है उसे हर राय में लागू किया जाना चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि वहां सामाजिक क्षेत्र के आंकडे बिगडे हुए हैं। उनके विकास और भ्रष्टाचार का झूठ भी कैग खोल चुका है। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात का हर तीसरा बच्चा कुपोषण का शिकार है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि पूरक आहार प्रोग्राम के लिए 223 लाख 14 हजार बच्चे योग्य थे, लेकिन इनमें से 63 लाख 37 हजार बच्चे छूट गए। यही नहीं, लड़कों के तुलना में लड़कियों की हालत और भी खराब है। लड़कियों के पोषण कार्यक्रम में 27 से 48 फीसदी तक कमी देखी गई। रिपोर्ट की मानें, तो गुजरात में एक करोड़ 87 लाख लोगों को आईसीडीएस यानी बाल विकास योजना का फायदा नहीं मिल पाया है। ये योजना बच्चों को कुपोषण से बचाने का काम करती है। 9 से 40 फीसदी केंद्रों में साफ पानी, टॉयलेट और इमारत की सुविधा नहीं है। राय में 75,480 आंगनवाड़ी केंद्रों की जरूरत थी जबकि केवल 52,137 केंद्रों को ही मंजूरी दी गई जिसमें से 50, 225 ही काम कर रहे हैं। इससे साफ होता है कि गुजरात का विकास केवल शहरों में है, जिसमें अधिकांशत: खुद गुजरातियों की मेहनत का नतीजा है जबकि कुछ उद्योगपतियों को मिल रही राय में अनाप-शनाप सुविधाओं के दम पर चमकदमक दिख रही है। बावजूद इसके भाजपा और मोदी झूठ पर झूठ बोले जा रहे हैं। गुजरात में जो औद्योगीकरण और शहरीकरण हुआ, वह साल 2000 के पहले की बात है और इन दोनों मामले में आज भी देश में दूसरे-तीसरे स्थान पर है। गुजरात के विकास मॉडल का जो ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वह हकीकत से परे है। प्रति व्यक्ति आय के मामले में गुजरात देश में नौवें स्थान पर है। अब भाजपा कैग रिपोर्ट को झुठला रही है, लेकिन 2जी स्पेक्ट्रम मामले में कैग जिसके लिए भगवान कृष्ण हैं, वह गुजरात के कुपोषण के मामले में खलनायक कैसे बन गई। 2जी मामले में बीजेपी कैग को ऊंचाई पर बैठाती है और जब गुजरात के कुपोषण के बारे में उसकी रिपोर्ट आती है, तो उसके बारे में यह कहती है उसने अपना काम सही नहीं किया।

            गुजरात में विकास वर्ष 2000 के पहले की स्थिति में आज भी है। वह किसी एक व्यक्ति के कारण नहीं, बल्कि इसका श्रेय वहां के पूरे समाज को जाता है, क्योंकि उनके खून में व्यापार बहता है, लेकिन भाजपा का अपना कोई दीन धर्म नहीं है, उसके नेताओं को झूठ बोलने में महारथ हासिल है इसलिए वे हर मामले में झूठ बोलते हैं, चाहे विकास हो या आतंक। जब आतंकी हमले होते हैं तो पार्टी राष्ट्रवादी हो जाती है। केंद्र सरकार को नाकाम सरकार घोषित कर देती है, जबकि इसी पार्टी के पीएम इन वेटिंग और बाबा के भगवान नरेंद्र मोदी उस समुद्री सीमा की सुरक्षा में घोर लापरवाही का नमूना पेश करते हैं, जहां से घुसकर पाकिस्तानी आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला किया था। कैग की रिपोर्ट की मानें तो मोदी सरकार जनवरी 2005 में गृह मंत्रालय से पास की गई तटीय सुरक्षा योजना को अपने यहां लागू करा पाने में नाकाम रही। रिपोर्ट में बताया गया है कि गुजरात में 10 तटीय पुलिस स्टेशन 2 तटीय चेक पोस्ट और 46 तटवर्ती आउट पोस्ट बनाए जाने थे। इस काम के लिए गुजरात को 30 बोट, वाहन, फर्नीचर और दूसरे साजो-सामान मुहैया कराए गए। इसके बावजूद, मोदी सरकार ने पूरी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। यह उन्हीं मोदी की सरकार का सच है, जिन्होंने विधानसभा चुनावों के दौरान सरक्रीक का सबसे बड़ा झूठ बोला था। आज उनका झूठ सबके सामने है।

            पिछले दिनों दागियों को बचाने वाले अध्यादेश को लेकर भी भाजपा हर कदम पर दोहरा रवैया अपनाती नजर आई। पहले सर्वदलीय बैठक में समर्थन किया। जब बिल रायसभा में आया, तो विरोध की बजाए उसे संसदीय समिति को भेजने का प्रस्ताव किया और जब अध्यादेश आया तो उसका विरोध किया, लेकिन कांग्रेस राहुल गांधी ने खेल बिगाड़ दिया तो उसके विरोध से सच सामने आ गया। मान लेते हैं कि इसके पीछे राहुल गांधी का स्वार्थ था, लेकिन फिर भी उनके कारण राजनीति की सफाई ही होगी। लेकिन भाजपा की प्रतिक्रिया से ऐसा आभास होता था कि मानो सबसे यादा दुख इसी पार्टी को है। होगा भी क्यों नहीं। उसके अपने सबसे प्रिय नेता अपने ही ऐसे मंत्री को मंत्रिमंडल में बनाए हुए हैं, जिसको कोर्ट बाकायदा सजा सुना चुकी है। बहरहाल, भाजपा के लिए दूसरी पार्टी का नेता ही बदमाश और भ्रष्टाचारी होता है, अपनी पार्टी और अपनी पाली में आने वाला नेता पाक साफ होता है। भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा जितनी दोगली पार्टी कोई दूसरी नहीं हा सकती। उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने सारी नैतिकता को नेपथ्य में धकेल दिया और बसपा से भ्रष्टाचार के आरोप में अपनी पार्टी से निकाले गए बाबू सिंह कुशवाहा और बादशाह सिंह को गले लगा लिया। लोकसभा चुनाव में भी यही करने जा रहे हैं। एक ओर दागियों को बचाने वाले अध्यादेश का विरोध करते हैं दूसरी ओर दागियों को गोद में बैठाते हैं। खबर है कि विभिन्न मामलों में आरोपी चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू सिंह से लेकर अशोक दोहरे तक को भाजपा ने गले लगा लिया है। जबकि कुछ अन्य आपराधिक प्रकृति के नेताओं से मोहब्बत परवान चढ़ रही है।

             इसका दूसरा पहलू भी देखें। जब तक जेडीयू से गठबंधन था तब तक भाजपा को यह पता नहीं था कि नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद के साथ मिलकर चारा घोटाले के पैसे खाए हैं लेकिन अब चूंकि जेडीयू गठबंधन तोड़ चुका है इसलिए अब भाजपा को पता चला कि नीतीश ने चारा घोटाले का एक करोड़ रुपया खाया है। हाल ही में बिहार के भाजपा नेता सुशील मोदी ने एक के बाद एक चार ट्वीट किए और बताने की कोशिश की कि चारा घोटाले में केवल पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ही नहीं, वर्तमान सीएम नीतीश के हाथ भी रंगे हुए हैं। उन्होंने श्याम बिहारी सिन्हा के हवाले से लिखा है कि नीतीश कुमार को एक करोड़ रुपए पहुंचाए गए थे। हालांकि सिन्हा का निधन हो चुका है। यह कागज मोदी को आज ही मिले या पहले से उनके पास मौजूद हैं, पता नहीं, लेकिन इतना तय है कि यदि जेडीयू बीजपी गठबंधन आज जिंदा होता तो शायद यह कभी सामने नहीं आते। तब नीतीश पाक साफ होते, बेहद ईमानदार और कर्मठ मुख्यमंत्री होते। लेकिन अब वक्त बदल गया है इसलिए नीतीश कुमार बेईमान हो गए हैं।

             और अंत में, मोदी के भक्त योगगुरु और उन तमाम तथाकथित संतों के लिए विशेष श्लोकनुमा आईना, जो धर्म प्रवचन और योग शिविर के बहाने भाजपा और मोदी गान करते हैं। आम समझाइश समझ में नहीं आएगी, इसलिए कूटनीति के महारथी आचार्य चाणक्य के शब्द याद दिला रहे हैं-

            आचार्य चाणक्य ने कहा है:

            पक्षिणां काकश्चाण्डाल पशूनां चैव कुक्कुर:।

            मुनीनां पापश्चाण्डाल: सवेर्षुनिंदक:॥

           अर्थात: पक्षियों में कौवा नीच है। पशुओं में कुत्ता नीच है। जो तपस्वी पाप करता है वह घिनौना है, लेकिन जो दूसरों की निंदा करता है वह सबसे बड़ा चांडाल है।

           भाजपा से जुड़े जितने भी तथाकथित संत हैं, उन्हें इससे शिक्षा लेनी चाहिए। खासतौर से नरेंद्र मोदी समर्थक उन महोदय को, जो खुद को सिर्फ इसलिए संत कहते हैं क्योंकि एक तो उनका विवाह नहीं हुआ, दूसरा वे योग के कुछ आसन करना जानते हैं, तीसरा भगवा गमझे से तन ढंकते हैं। बताते हैं कि अपने गुरू जिन्होंने उनको नेत्र योति प्रदान की थी, उन्हीं के पास से मिले एक आयुर्वेद चिकित्सा के ग्रंथ के आधार पर कुछ दवाएं बनाकर अपना कारोबार चला रहे हैं। आरोप हैं कि इस कारोबार में करोड़ों रुपए का आयकर अब तक दबा चुके हैं। इनके मुखारविंद से संतों जैसे शब्द शायद ही कभी सुने गए हों, इन्हें परनिंदा में रस मिलता है। भगवान को छोड़कर आजकल राष्ट्रसेवा की आड़ में नरेंद्र मोदी की भक्ति में लीन हैं। मोदी को देश का सबसे अच्छा नेता और शासक मानते हैं। उनकी खामियों पर अपना भगवा गमछा डालते रहते हैं और सुर्खियों में रहने के लिए सद्वचनों को छोड़कर बेहद गंदे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।

? विवेकानंद