संस्करण: 14  नवम्बर- 2011

आइना देखें अन्ना-आडवाणी और संघ

? विवेकानंद

               महात्मा गांधी के सिध्दांत के सिध्दांतों की दुहाई देकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं उनकी असलियत यह है कि उनके मंच पर शराब माफिया केसरिया दुपट्टा डालकर ससम्मान विराजते हैं। अपने प्रचार के लिए रुपए बंटवाते हैं,अपने अधिकारों से अधिक धनराशि वसूलकर यात्राएं करते हैं,स्वयं को महान साबित करने के लिए राष्ट्रद्रोह की बातें करते हैं और मौका मिलने पर न केवल भ्रष्टाचार की जड़ों में पानी डालते हैं,बल्कि स्वयं भी भरपूर भ्रष्टाचार करते हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी ही लड़ाई में सबसे अधिक उत्साहित हैं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी। संघ अन्ना हजारे का समर्थन कर रहा है और भाजपा के मौजूदा सबसे बुजुर्ग नेता,लालकृष्ण आडवाणी। आडवाणी जी इन दिनों भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता को जागरूक करने के लिए जन चेतना यात्रा निकाल रहे हैं। यह यात्रा कितनी स्वार्थी है इसका उदाहरण मोदी-आडवाणी विवाद में पहले ही मिल चुका है। इस यात्रा के प्रचार के लिए पहले मध्यप्रदेश के सतना जिले में पत्रकारों को रुपए बांटे गए, जब आडवाणी जी से इस बावत सवाल किए गए तो उन्होंने जानकारी होने से इंकार कर दिया और मामले में सख्त कार्रवाई का आदेश भी प्रदेश पार्टी नेतृत्व को सुना दिया। यही आडवाणी जी जब गुजरात पहुंचे तो उनके मंच की शोभ एक ऐसा आदमी बढ़ा रहा था जो न केवल अवैध शराब का कारोबार करता है,बल्कि उसके ऊपरढाई दर्जन केस दर्ज हैं। हम उसे भीड़ का हिस्सा मान लेते अगर वह भीड़ के साथ आडवाणी के आस-पास खड़ा होता,लेकिन वह बकायदा केसरिया दुपट्टा डाले मंच पर आडवाणी जी के पास खड़ा था।सुखा पटेल नाम के इस व्यक्ति का मामला तीन साल पहले विधानसभा में उठाया गया था। गुजरात पुलिस की लिस्ट में सुखा पटेल मोस्ट वांटेड है और पुलिस ने उसे सुरक्षित रखा है। बहरहाल भाजपा ने इसे भीड़ का ही एक हिस्सा करार दिया है,लिहाजा मान लेते हैं कि यह एक संयोग है। लेकिन आगे भाजपा ने जो किया उसे संयोग नहीं माना जा सकता। जिस भ्रष्टाचार के खिलाफ भाजपा नेता जन चेतना यात्रा निकाल रहे हैं पार्टी उसी भ्रष्टाचार की दलदल में धंसी है। और मजेदार बात यह है कि यह मामला उसी दौरान सामने आया है जब आडवाणी जी अपनी रथनुमा बस पर सवार होकर कहते हैं कि मनमोहन सिंह सरकार के भ्रष्टाचार ने देश की नाक कटवा दी। आडवाणी जी पंजाब में आपकी पार्टी ने देश की नाक कितनी ऊंची है, जरा देख लीजिए। पंजाब सरकार ने जालंधर में 19 करोड़ रुपए की जमीन भाजपा को महज 55लाख रुपए में दे दी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जालंधर अमृतसर नेशनल हाइवे पर सूर्या एन्क्लेव की 18हजार स्कवायर फीट की व्यवसायिक भूमि का टुकड़ा भाजपा को दिया गया है। इससे सरकारी खजाने को साढ़े 18 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। जबकि इसके आसपास की जमीन को सरकार नीलामी के जरिए बेचकर करोड़ों कमा रही है। क्या यह भ्रष्टाचार नहीं है?

               अब थोड़ा पीछे चलते हैं और चाल, चेहरा और चरित्र की बात करने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का चरित्र देखते हैं। कर्नाटक में भूमि घोटाले से संबंधित लोकायुक्त की रिपोर्ट आने के बाद बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाया गया था। येदियुरप्पा भूमि घोटाले में शामिल हैं यह अधूरा सत्य है,पूर्ण सत्य यह है कि उन्होंने आरएसएस को मलाई खिलाने के बाद मलाई खाई है। जांच में जो दस्तावेज मिल रहे हैं उनके मुताबिक येदुरप्पा ने मुख्यमंत्री रहते हुए आरएसएस के लोगों और संघ से जुड़ी संस्थाओं को करोड़ों रुपये की जमीन सस्ते दामों में दिलवा दीं और राय के खजाने को चूना लगने दिया। दस्तावेजों के मुताबिक संघ से जुड़े 6 संगठनों, सात नेताओं को करीब 50 करोड़ रुपये से भी यादा मूल्य की जमीन महज एक-दो लाख रुपये में दे दी गई। इसका सबसे यादा फायदा संघ से जुड़ी संस्था राष्ट्रोत्थान परिषद को मिला। बैंगलोर के सदाशिवनगर में 846 वर्ग मीटर की जगह 30 साल की लीज पर मात्र 43 रुपये में दे दी गई। संघ से जुड़ी 5 जन सेवा विद्या केंद्र, संस्कार भारती, हिंदू जागरण वैदिक, महिला दक्षता समिति और अनंता शिशु निवास को बीडीए की जमीन दी गई। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे के समर्थन में गरजने वाले संघ के पास इसका कोई उत्तर नहीं है, लेकिन ऐसा हुआ है इसकी पुष्टि राष्ट्रोत्थान संस्था ने यह कहते हुए कर दी कि येदुरप्पा ने कोई गलत काम नहीं किया है,क्योंकि इससे पहले कांग्रेस और जेडीएस सरकारों ने भी उन्हें जमीन दी है।

               अब जरा दूसरे गांधी के नाम से सुर्खियां बटोर रहे अन्ना हजारे जी से भी रूबरू हो लें। अन्ना ईमानदार हैं इसमें किसी को संदेह नहीं,लेकिन जनलोकपाल बिल की लड़ाई में वे इतने आग बढ़ चुके हैं कि उन्हें भी झूठ का सहारा लेना पड़ा। किरण बेदी,अरविंद केजरीवाल और प्रशांत भूषण पर जब बाहर से आरोप लगे तो कहा गया कि टीम को तोड़ने की कोशिश की जा रही है, लेकिन ताुब की बात यह है कि उस शख्स ने आरोप लगाए जो कई दिनों तक न केवल अन्ना के साथ रहा, बल्कि टीम और अन्ना के बीच होने वाली बातों का भी साक्षी रहा, तो उसके विषय में भी यही कहा गया। सबसे दुर्भाग्यजनक स्थिति रही कि यह स्वयं अन्ना ने कहा। जबकि उसने जो आरोप लगाए हैं उसके संबंध में सारे सबूत भी सामने रख दिए हैं, टीम के जिन सदस्यों पर आरोप लगे हैं उनकी भी बोलती बंद है, पर अन्ना उनका बचाव कर रहे हैं। यह कैसी ईमानदारी की लड़ाई है?श्रीश्री रविशंकर भी अन्ना हजारे की तर्ज पर भ्रष्टाचार के लिए चार दिन की यात्रा पर निकले। श्रीश्री के विषय में कुछ भी कहना घोर अपराध जैसा है,लेकिन उनसे यह प्रश्न पूछा जा सकता है कि महासत्संग की यात्रा केवल वहीं से क्यों निकाली जा रही है, जो कांग्रेस प्रभाव वाले क्षेत्र हैं? क्या कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की बात सच साबित नहीं हो रही है? जब उन्होंने कहा था कि श्रीश्री अन्ना की तरह आंदोलन करने जा रहे हैं तब श्रीश्री की इस यात्रा की जानकारी किसी को नहीं थी। यहां तक कहा गया था कि यह दिग्विजय सिंह का सिगूफा है, आखिरकार श्रीश्री ने यात्रा का ऐलान किया। यह पहला सत्य था, और जब यह बात सत्य है तो इसमें विश्वास करने की गुंजाइश बढ़ जाती है कि उन्होंने आरएसएस-भाजपा के जिन प्लान ए,बी,सी,डी की बात कही है वह भी सत्य हैं।


? विवेकानंद