संस्करण: 14  नवम्बर- 2011

अन्ना हजारे के आन्दोलन की किश्ती

झूठ के भंवर में है

? शेष नारायण सिंह

               अन्ना हजारे उलझ गए हैं । अपने ब्लॉगर राजू परुलेकर से पल्ला झाड़ने के चक्कर में  विरोधाभासी बयान दे रहे हैं । कल जब उनसे महाराष्ट्र सदन की प्रेस काफ्रेंस में पूछा गया कि आप अपनी टीम के  कुछ लोगों को निकालना चाहते थे अब क्यों मना कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि उनका ब्लॉग लिखने वाले राजू परुलेकर ने बिना उनकी मंजूरी के यह बात ब्लॉग पर लिख दी थी। उन्होंने कहा कि यह गलत बात है । लेकिन आज जब उनकी हैण्ड राइटिंग में वह सारी बाद पब्लिक डोमेन में आ गयी तो अन्ना हजारे कानूनी दांव पेंच की बात करते नजर आये। उन्होंने आज मीडिया को  बताया कि अगर कोई भी चीज उनकी हैण्ड राइटिंग में है लेकिन उस पर उनकी दस्तखत नहीं है,  तो उसे सच न माना जाये। उधर राजू परुलेकर भी अन्ना की हर चाल का जवाब दे रहे हैं । उन्होंने अन्ना हजारे की वह चिट्ठी ब्लॉग पर डाल दी जिसमें उन्होंने लिखा था कि अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, मनीष सिसोदिया और प्रशांत भूषण को निकाल दिया जाएगा। इस चिट्ठी पर  अन्ना हजारे के दस्तखत भी हैं । पुणे की  फ्लाईट पकड़ने दिल्ली  दिल्ली  हवाई अड्डे पर पंहुचे अन्ना हजारे से जब पूछा गया कि अब तो उनके दस्तखत वाली चिट्ठी  भी सामने आ गयी है ,तो उनके पास कोई जवाब  नहीं था ।उन्होंने कहा कि अब वे पुणे जाकर ब्लॉग ही बंद कर देगें।

                 23 अक्टूबर 2011 के अन्ना हजारे के ब्लॉग पर उनके विचार प्रकाशित होने के  बाद सारा विवाद शुरू हुआ था। अन्ना खुद तो लिखते नहीं, वे राजू परुलेकर नाम के एक पत्रकार को अपनी बात  बता देते थे और राजू अन्ना की तरफ से बातों को ब्लॉग पर लिख देते थे। लेकिन मौन व्रत के दौरान अन्ना ने दूसरा तरीका निकाला। उन्होंने कागज पर मराठी में लिख कर देना शुरू किया।23 अक्टूबर वाला ब्लॉग उसी मौनव्रत  वाले टाइम का है। उसमें अन्ना ने कहा था कि वे अपनी कोर टीम में कुछ बदलाव करना चाहते  हैं । बात मीडिया में चल पड़ी लेकिन दिल्ली में 4 नवम्बर की प्रेस काफ्रेंस में उन्होंने कह दिया कि राजू परुलेकर  ने यह बात अपने मन से बनाकर लिख दी थी। मैंने कुछ नहीं कहा था। राजू परुलेकर मुंबई के एक सम्माननीय पत्रकार हैं । उनके ऊपर जब अन्ना हजारे ने विश्ववासघातका आरोप लगा दिया तो  उन्हें गुस्सा आया और उन्होंने अन्ना हजारे के हाथ से लिखा हुआ वह मजमून सार्वजनिक कर दिया जिसमें अन्ना से साफ  लिखा  है कि अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण और मनीष सिसोदिया को वे हटाने के बारे में सोच रहे हैं ।अब अन्ना घिर चुके थे।  इसी के बाद अन्ना हजारे ने कहा कि यह उनका फैसला नहीं था। उन्होंने केवल सोचा भर था। बात को मजबूती देने के उद्देश्य से अन्ना हजारे ने कहा कि जब तक किसी भी मजमून पर उनके दस्तखत नहीं होगें, वे उसको सही नहीं मानेगें। लेकिन अन्ना हजारे के इस बयान के कुछ देर बाद ही राजू ने कुछ टी वी वालों कोउस मजमून पर अन्ना हजारे के दस्तखत भी दिखा दिए । जाहिर है कि अन्ना हजारे गलतबयानी के जाल में बुरी तरह से फंस  गए हैं । अपने ऊपर आरोप लगने के बाद राजू परुलेकर ने  बहुत सारी ऐसी चीजें पब्लिक करना शुरू कर दिया है जिसके अन्ना हजारे की सत्य के प्रति निष्ठा सवालों के घेरे में आ जायेगी ।  राजू परुलेकर ने बताया है कि जब अन्ना ने गुस्से में आकर मौन व्रत के दौरानलिखना शुरू किया तो अन्ना के करीबी सुरेशभाऊ पठारे ने उनको रोकने की कोशिश की लेकिनअन्ना  नहीं रुके। उन्हें उस वक्त रोकना संभव नहीं था । लेकिन बाद में सुरेश भाऊ ने राजू को सलाह दी कि इस ब्लॉग  को अभी रोक  लिया जाए । केवल उसका संकेत ही दे दिया जाए। परुलेकर ने वही किया लेकिन  जब कल दिल्ली में अन्ना हजारे ने उनके ऊपर गंभीर आरोप लगा दिया तो  राजू परुलेकर  ने अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए अन्ना का वह पत्र  सार्वजनिक कर दिया जिसको सुरेश भाऊ की सलाह पर उन्होंने पूरी तरह से नहीं छापा था ।राजू परुलेकर ने अपने बयान में कहा है कि उस वक्त डॉक्टर  धर्माधिकारी भी मौजूद थे और उन्होंने कहा  कि कोशिश की जानी चाहिए कि अन्ना प्रसन्न चित्ता रहें और उनका ब्लड प्रेशर न बढ़ने पाए ।

                  

? शेष नारायण सिंह