संस्करण: 14  नवम्बर- 2011

म.प्र. के किसान-बिजली,बिल और विजिलेंस से परेशान  

? डॉ. सुनील शर्मा

                म.प्र. के रायसेन जिले में एक किसान ने 39 हजार रूपये के बिजली बिल से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। बताया जाता है कि गौहरगंज तहसील के सिलानी गॉव का किसान गजराज अचानक मिले बिजली के भारी भरकम बिल से परेशान था,बिल भरने के लिए कहीं से रूपये की व्यवस्था नहीं बन पा रही थी जिसके चलते उसने जहरीला पदार्थ पीकर आत्महत्या कर ली। लेकिन प्रशासन उसे किसान मानने से ही इंकार कर रहा है। इस घटना के दो तीन पूर्व पड़ोसी नरसिंहपुर जिले के तेन्दूखेड़ा गॉव के किसान भीमसेन ने बिजली के खंबे पर चढ़कर अपनी जान दे दी। कारण बताया जा रहा है कि बिजली न मिलने से उसके खेत में लगी धान और सोयाबीन की फसल बर्बाद हो गई थी।इसी तनाव में उसने यह आत्मघाती रास्ता चुन लिया। अब शासन प्रशासन अपने कारण गढ़ रहा है।पर यह बात सच है कि बिजली न मिलने से उसके 6 एकड़ खेत में लगी सोयाबीन और धान की फसल नष्ट हो गई थी जिसके कारण वह तनाव में था।इससे पहले होशंगाबाद जिले में किसानों ने अपनी फसल की बर्बादी के चलते मौत को गले लगाया था इसमें भी बिजली न मिलने की बात ही अह्म थी। वास्तव में बिजली म.प्र के किसानों को खून के ऑसू रूला रही है। एक तरफ जहॉ बिजली न मिलने से प्रदेश के किसान बर्बाद,वहीं किसानों को बिजली के बेहिसाब भारीभरकम बिल थमाए जा रहे हैं।बिजली चोरी के आरोप लगा कई गुना दण्ड वसूला जा रहा है।प्रदेश का किसान फसल सुखाकर भी बिल भरने मजबूर है।कहीं बिजली आती है भी तो महज दो चार घण्टे के लिए और लो वोल्टेज पर चिमचिमाते हुए चौबीस घण्टे के लिए फिर कट जाती है।कहीं खम्बे नहीं है, तो कहीं तार गायब। तार और खम्बे है तो ट्रांसफार्मर नदारद। बिजली की इस अजब लीला और त्राहि से प्रदेश का किसान हैरान,बेबसहै और बेबसी में आत्मघाती कदम उठाने मजबूर हो रहा है।बिजली की त्राहि म.प्र.के किसी विशेष हिस्से तक सीमित न होकर सारे प्रदेश में समान है। सीमावर्ती रीवा से लेकर भिण्ड,मुरैना बुरहानपुर, नीमच, मंदसौर, राजगढ़ और महाकौशल,मालवा के अंचल तथा राजधानी भोपाल के आसपास के किसानों के खेतों से बिजली नदारद है,और किसान सड़कों पर है,प्रदेश भर बिजली विभाग के दफ्तरों के सामने किसानों के धरना प्रदर्शन चल रहें हैं। बिजली के कमी से कराहते किसान कहते हैं कि भाजपा सरकार ने बिजली के नाम पर सिर्फ दाम  बढ़ाने का काम किया है और  बिजली उपलब्धता की बातें ढपोरशंखी साबित हो रहीं है।

             प्रदेश का सरकारी अमला दावा करता है कि किसानों को 12 घण्टे बिजली की उपलब्धता कराई जा रही है। लेकिन इस दावे की पोल  प्रदेश के कोने कोने में चल रहे किसानों के धरने और प्रदर्शन उजागर करते हैं। सरकार के बिजली उपलब्धता के इस ढोल के सच का आईना हम किसानों से जान सकते हैं। किसान बताते हैं कि खेतों में सिर्फ खम्बे है बिजली नहीं और बिजली है तो वोल्टेज नहीं। बिजली संकट से परेशान नरसिंहपुर जिले में धरने पर बैठे किसानों के साथी नर्मदा अंचल के किसान खेमरिया बता रहे थे कि क्षेत्र के किसान बिजली के संकट से बर्बादी की कगार पर हैं। हम किसानों को बिल तो समय पर मिलतें है लेकिन बिजली कभी नहीं,बिल के साथ विजिलेंस के छापे भी हमारा जीना हराम किये हुए हैं।विजिलेंस के नाम पर बिजली विभाग के कर्मचारी हमसे अनाप शनाप वसूली करतें है।खेमरिया बतातें हैं कि अगर बिजली मिलती भी है तो उसके वोल्टेज से बल्ब जलना मुशिकल है तो पम्प कैसे चलेगा? बिजली विभाग कहता र्है कि आउटपुट पर भी आपको 440 वाट का वोल्टेज मिलेगा पर 440 न सही 220 ही मिल जाए मगर इससे तो खेत पर लगा 100 वाट का बल्ब भी 10 वाट के बराबर रोशनी देता हैं ऐसे में हमारा पम्प कैसे चलेगा ?कम वोल्टेज के चलते हमारी मोटर जल रहीं हैं और जिसका कहीं से कोई मुआवजा नहीं मिलता है। और हॉ वोल्टेज में कमी को लेकर बिजली विभाग के अधिकारी हास्यास्पद तर्क देतें है और इसका दोषी अवैध कनेक्शन को बतातें हैं जबकि गॉव गॉव बिजली विभाग का नेटवर्क है,विजिलेंस की टीम लगातार घूम रही है। खेमरिया कहतें हैं कि  किसी गॉव में कितने खेतो में पानी की जरूरत है उसका आंकलन तो सहज ही किया जा सकता है,फिर बिजली विभाग उसी हिसाब से कनेक्शन और वोल्टेज की व्यवस्था क्यों नहीं करता है? इस पर एक अन्य किसान सुरेन्द्र पटैल कहतें हैं कि जब सरकार के पास किसानों को देने बिजली है ही नही तो विभाग ऐसी कोरी गप्प बाजी करेगा ही। प्रदेश के किसान बिजली विभाग  के द्वारा बिल के नाम पर की जा रही खुली लॅूट से भी त्रस्त हैं।किसानों को बिजली मिले या न मिले,वोल्टेज आए या न आये पर बिल पूरा आएगा।किसानों ने बताया कि नरसिंहपुर जिले में एक गॉव हैं मुॅआर जहॉ पिछले साल भर से ट्रांसफार्मर जला हुआ है जिसकी सूचना भी विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को है मगर किसानों को बिल लगातार मिल रहें है।मीटर खराब होने पर भी किसान को औसत बिल पकड़ा दिया जाता और बर्षाकाल में भी फरवरी मार्च की रींडिंग का बिल चुकाना किसान की मजबूरी है।घटिया उपकरण और लो वोल्टेज के चलते किसानों के ट्रांसर्फामर जल रहें है जिन्हें बदलना किसान के लिए एवरेस्ट फतह के समान है किसान अपने साधन से जला ट्रांसफार्मर लेकर आता है फिर अनेक चक्कर एवं भारी  दान दक्षिणा के बाद यह ही दूसरे उपकरण की व्यवस्था जम पाती है। बिजली विभाग के घटिया उपकरणों और तार गिरने की वजह से खेतों में आग लगने की घटनाएॅ लगातार बढ़ती जा रहीं हैं जिससे किसान की खड़ी फसल स्वाहा हों रही हैं।उपकरणों रखरखाव,खेतों में कनेक्शन की बात हो या फिर खम्बें में तार की जरूरत बगैर दान दक्षिणा के कहीं संभव नहीं हैं,किसानों में इस बात को लेकर भी काफी रोष है कि उन्हे बिजली चोर कहा जा रहा है,जबकि यह स्पष्ट है कि चोर कौन है?लाईनमेन से लेकर ईई और डीई तक सब बड़े आसामी बन गए हैं।

               इस समय म.प्र. का किसान बिजली विभाग के रहमों करम पर ही जिंदा है।आज म.प्र. के किसान बिजली संकट से मौत को गले लगाने मजबूर है इससे यह बात भी स्पष्ट हुई है कि प्रदेश सरकार ने बिजली के नाम सिवाए गप्पबाजी के अलावा कुछ भी नहीं किया है।

? डॉ. सुनील शर्मा