संस्करण: 14 जुलाई - 2014

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT


क्या न्यायपालिका पर कब्जा चाहती हैं

मोदी सरकार?

     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आखिर क्या चाहते हैं, यह तो उनके या उनके खास लोगों के अलावा कोई नहीं जानता, लेकिन देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएम लोढा ने जो कहा उससे संदेह यही होता है कि शायद नरेंद्र मोदी सरकार न्यायपालिका को अपने अधीन करने की कोशिश कर रहे हैं। किसी महीने भर पुरानी सरकार के लिए यदि लोकतांत्रिक देश के प्रधान न्यायाधीश इस आशय का संदेह पैदा करने वाली टिप्पणी करें तो उस सरकार के लिए इससे शर्मनाक स्थिति कोई दूसरी नहीं हो सकती।          

? विवेकानंद


सांप्रदायिकता के सहारे नाकामियां छिपाती भाजपा

        श्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले मे स्थित कांठ कस्बे में पिछले दिनों एक धार्मिक स्थल से लाउडस्पीकर उतारे जाने को लेकर जमकर हिंसक बवाल हुआ। इस हिंसक बवाल में जहां मुरादाबाद के जिला अधिकारी की एक आंख फूट गई, वहीं एसएसपी, सीओ सहित कई अन्य पुलिस अफसर और सिपाही गंभीर रूप से घायल हो गए। इस बवाल में भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं, पष्चिमी उत्तर प्रदेश से निर्वाचित भाजपा सांसदों, विधायकों तथा उसके अन्य आनुसंगिक संगठनों की संलिप्तता जिस तरह से खुलेआम उजागर हुई, वह देश और प्रदेश की राजनीति के सामने कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

?

हरे राम मिश्र


शंकराचार्य- साँईभक्त विवाद और

साम्प्रदायिक राजनीति का असमंजस

     किसी भी धर्म का प्रादुर्भाव और प्रसार अपने समय की सामाजिक जरूरतों के अनुसार होता है और उस समय के अग्रदूत अपनी समझ के अनुसार समाज के हित में अपने सर्वश्रेष्ठ विचार देते व उनके पक्ष में एक चेतन समूह खड़ा करते रहे हैं। सच यह भी है कि बाद में उन विचारों को जड़ मान,समय के अनुसार उन विचारों को विकसित न करने वाले अनुयायी विचारों के पीछे छुपी जनहितकारी भावना को भुला देते रहे हैं जिससे वह चेतन समूह विभाजित होता रहता है।

 ? वीरेन्द्र जैन


व्यापम घोटाले में फंसे संवैधानिक पदों पर विराजे लोगों का

जेल जाना सुनिश्चित

      शायद ही हमारे देश के इतिहास में कभी ऐसा अवसर आया हो जब प्रदेश का राज्यपाल यह कहे कि वह फांसी के फंदे पर झूलने को तैयार है और मुख्यमंत्री यह कहे कि वह संन्यास लेने को प्रस्तुत है। दोनों की ओर से ये घोषणायें व्यापम घोटाले के संदर्भ में की गईं। राज्यपाल रामनरेश यादव के ऊपर भी कुछ आरोप लगाये गये हैं। यहां स्मरणीय है कि राज्यपाल के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी धनराज यादव के बारे में यह सबूत मिले थे कि उन्होंने व्यापम से कुछ उनके चहेतों के लिये नौकरी देने की सिफारिश की थी।

? एल.एस. हरदेनिया


यह मनोबल क्या है श्रीमान

            जिस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के नाम पर किसी भी तरह विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए विदेश यात्राओं का क्रम शुरू कर रहे थे,ठीक उसी समय दिल्ली में केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह अर्ध्दसैनिक बल सीआरपीएफ के कामकाज की समीक्षा के नाम पर विदेशी पूंजी निवेशकों को किसी भी कीमत पर 'सुरक्षा और संरक्षा'का संदेश दे रहे थे। इसी संदेश में उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ लड़ रही सीआरपीएफ को 'लोकतंत्र का प्रहरी' बताते हुए यह साफ कर दिया कि सरकार इसके 'मनोबल' को बनाए रखने की हर संभव कोशिश करेगी।

 ?  रीना मिश्रा


लैंगिक न्याय की लड़ाई :

कई रोड़े हैं राह में

           हां एक ओर भारत में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए एक जनहित याचिका दायर की गई है वहीं इस मामले में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम घटित हुआ है। इसका संबंध मुस्लिम समुदाय के पर्सनल लॉ से है। जनसामान्य में यह धारणा बनी हुई है कि मुस्लिम महिलाएं, दूसरे समुदायों की महिलाओं की तुलना में, अन्याय व अत्याचार की अधिक शिकार होती हैं।

? राम पुनियानी


आधी आबादी : दास्ताने मध्यप्रदेश

      बीते 13 जून 2014 को मध्य प्रदेश के खंडवा के पिपलोद थाने के अंतर्गत आने वाले एक गावं में एक पुरुष ने जमीन विवाद के चलते अपनी पत्नी को सबक सिखाने के लिए अपने दस साथियों के साथ पहले उसका गैंगरेप किया फिर उस महिला को पूरे गांवं में निर्वस्त्र करके घुमाया, वहशीपन यहीं नहीं रुकता है पीड़ित महिला जब पानी मांगती है तो उसे मूत्र पिलाया जाता है।

?  जावेद अनीस


फैसला, सही संदर्भ के साथ पढ़ा जाए

     देश में शरीयत अदालतों दारुल कजा और दारुल निजाम के फतवे आए दिन विवाद का विषय बनते रहे हैं। बीते कुछ सालों में आएं इन फतवों पर यदि नजर डालें तो, इनमें ज्यादातर फतवों का किरदार औरत विरोधी है। इन विवादित फतवों से पूरे मुस्लिम समाज में एक भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है कि वह इन फतवों में प्रकट राय को माने या ना मानें ? इन फतवों की कोई कानूनी वैधता भी है या नहीं ?

? जाहिद खान


कल्याणकारी राज्य की अवधारणा

        शायद ही किसी को अब उस चिट्ठी की याद होगी जो खाद्य सुरक्षा अध्यादेश पर चुनाव के पहले नरेन्द्र मोदी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखी था। इस चिट्ठी में मोदी ने दुख जताया था कि ''खाद्य सुरक्षा का अध्यादेश एक आदमी को दो जून की रोटी भी नहीं देता।'' खाद्य-सुरक्षा के मामले पर लोकसभा में 27 अगस्त 2013 को बहस हुई तो उसमें भी ऐसे ही उद्गार सामने आए। तब भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने इसको ऊँट के मुंह में जीरा डालने की कसरत के माफिक कहा था।       

? शैलेंद्र चौहान


इसरो की टीम अवार्ड की हकदार

      स देश में जब भी किसी को कोई विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त होती है, लोग उसे हाथो-हाथ लेते हैं। कई कंपनियां उसके हित में आगे आती हैं। उसे विशेष पुरस्कार से नवाजा जाता है। कई स्वयं सेवी संस्थाएं भी उनका सम्मान करने के लिए आगे आ जाती है। क्रिकेट में भी जब भी धोनी की टीम ने कोई विशेष उपलब्धि हासिल की है, सरकार ने आगे बढ़कर सभी खिलाडियों को करोड़ों रुपए ऐसे ही दे दिए हैं। उन पर धनवर्षा होती है। आईपीएल के लिए भी क्रिकेटरों की बोली लगती है।

? डॉ. महेश परिमल


राजनीति में महिलाओं के

अच्छे दिन कब आएंगे ?

        भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को लेकर लम्बे समय से बहस छिड़ी हुई है। राजनीति में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण की मांग अभी तक ठण्डे बस्ते में है और यह काफी विवादास्पद है। वर्ष 2010 में गोवा के मुख्यमंत्री दिगम्बर कामत ने कहा था कि 'महिलाएं राजनीति से दर रहे तो बेहतर होगा क्योंकि राजनीति उन्हें पागल बना देगी। राजनीति का रास्ता कांटों भरा है, जिसे पार कर पाना मुश्किल है।                   

? डॉ. गीता गुप्त


उच्च शिक्षा में सुधार की जरुरत

      शिक्षा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए आवश्यक है। कहा गया है कि सा विद्या वा विमुक्तए। यानी शिक्षा मुक्ति देती है। अंधेरे से उजाले की ओर ले जाती है। प्रकाशमान करती है। चेतना का संचार करती है। जागरुक बनाती है। समाज में व्याप्त अंधविश्वास, असमानता और गैर-बराबरी को दूर करती है। लेकिन यह तभी संभव होता है जब राज्य व्यवस्था इस दिशा में सकारात्मक पहल करती है।

? अरविंद जयतिलक


  14 जुलाई - 2014

Designed by-Altius Infotech
Copyright 2007 Altius Infotech All Rights Reserved