संस्करण: 14जुलाई-2008

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भाजपा सरकार के संरक्षण में हिंसा का वीभत्स नजारा

ध्यप्रदेश की जनता ने 3 जुलाई को भारत बंद के बहाने हुई हिंसक घटनाओं को देखा है। सारे अखबार और न्यूज चैनल्स भरे पड़े हैं। सरकार को ऑंख मूंदकर समर्थन करने वाले अखबार और >अजय सिंह' 'राहुल''

      


लोकतांत्रिक अधिकारों के कंधों पर सवार आतंकवाद
'गत गुरूवार को भारत बंद के दौरान मध्यप्रदेश में जो कुछ भी हुआ उसने तो गुजरात की मोदी सरकार को भी पीछे छोड़ दिया। इस तथा कथित बंद के नाम पर प्रदेश सरकार द्वारा अपनी वैसी ही हिंसक ताकत का प्रदर्शन किया गया जैसा कि कुछ वर्ष पूर्व उज्जैन में छात्रसंघ के चुनाव >वीरेन्द्र जैन


'बंद' के निहितार्थ
भाजपा भले ही यह मान ले कि मध्यप्रदेश में 'बंद' सफल रहा और चुनाव की ठीक पहले भेजा गया 'हल्ला बोल' उसके पक्ष में वोटों की झड़ी लगा देगा, लेकिन यह तस्वीर का एक पहलू हैं दूसरा पहलू वह है जिसमें एक बार फिर साबित हो गया है कि भाजपा के एजेंडा में सांप्रदायिकता अब भी प्रमुख मुद्दा है। अमरनाथ श्राइन बोर्ड को ज़मीन >महेशबाग़


  

सरकार कहीं भी नहीं दिखती !नेता ही नेता दिख रहे हैं!
मैं मध्यप्रदेश में रहता हूँ। यहाँ जिस तरह का सामाजिक परिदृश्य दिखाई देता है उससे आम जनता को यह महसूस होने लग गया है कि यहाँ न तो कानून व्यवस्था की कोई सकारात्मक स्थिति है और न। >राजेन्द्र जोशी


हिंसा व आतंक से पूर्वोत्तर में थमा विकास
पूर्वोत्तर राज्यों में आतंक, जातीय विद्वेष के लगातार बढ़ने से स्थिति अत्यंत ही विस्फोटक हो गयी है। केन्द्र के हजारों करोड़ रुपये के पैकेज, उग्रवादी संगठनों से बिना शर्त बातचीत आदि की पहल के बावजूद शांति व स्थिरता लगभग समाप्त है। विकास के लिए आ >अंजनी कुमार झा

       


मध्यप्रदेश में भाजपा का भ्रष्टवाड़ा घोटालों का घटाटोप

ध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने राजनैतिक, प्रशासनिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक क्षेत्र का भट्टा तो बैठा ही दिया है, साथ ही आम लोगों की जिन्दगी को भी तहस- >डॉ. महेन्द्र सिंह चौहान


प्रदेश सरकार साम्प्रदायिक हिंसा नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल
एक समय था जब भारतीय जनता पार्टी द्वारा यह दावा किया जाता था कि यदि साम्प्रदायिकता दंगा मुक्त समाज चाहते हो तो सत्ता हमें सौंप दो। परन्तु पिछले वर्षों में उसका यह दावा पूरी तरह गलत साबित हुआ है। अब तो स्थिति यह हो गई है कि जहाँ-जहाँ भारती >एल.एस.हरदेनिया

              


मानवाधिकारों का हनन और भ्रष्टाचार
 उच्च पदों पर विराजमान मेरे कुछ ऐसे नौकरशाह मित्र हैं, जो अनौपचारिक बातचीत में बे - हिचक स्वीकारते हैं कि उनकी माई - बाप तो मौजूदा सरकार है, इस कारण मुख्यमंत्री स्तर से जो भी हुक्म मिलेगा उस पर अमल करना ही उनका कर्तव्य है। मसलन प्रशासनिक बिरादरी की बुनियादी जवाबदेही राष्ट, जनता, संविधान और समाज के प्रति न >प्रमोद भार्गव


'धरती फटना : जल का अधिक दोहन
दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में कई स्थानों में धरती फटती जा रही है या कहीं गहरी दलारें पड़ रही हैं, कहीं तो धरती में से गैस और आग भी निकलने लगी है। जिसे देखकर जहाँ लोगों में भय और जिज्ञासा जैसा वातावरण व्याप्त हो गया है, हालांकि स्थानीय प्रशासन ने भू-गर्भ वैज्ञानियों >राजेन्द्र श्रीवास्तव

     


अदालतों में सजायाबी का गिरता स्तर
पिछले कुछ वर्षों में आये अदालती निर्णयों ने, जिनमें नई दिल्ली का जेसिका लाल हत्याकाण्ड(2000) तथा बेस्ट बेकरी काण्ड, बडोदरा(2002) प्रमुख हैं, देश की चरमराती न्याय व्यवस्था पर जनमानस का आक्रोषपूर्ण धयान आकर्षित किया। न केवल हत्या जैसे गम्भीर मामलों में अदालत से निर्णय आने में 5-6 साल लग गये बल्कि>डॉ.देवप्रकाश खन्ना


18 जुलाई-गुरू पूर्णिमा पर विशेष
मानव-निर्माण में शिक्षा और शिक्षक की भूमिका

अनादि काल से गुरू के महत्व को स्वीकार किया गया है। भारतीय साहित्य में निर्गुण सन्तों की परम्परा में गुरू को सर्वाधिक महत्व दिया गया है। निर्गुण भक्ति धारा के लोकप्रिय कवि कबीरदास की 'साखी' के प्रथम भाग >डॉ.गीता गुप्त

    


''कृषि क्षेत्र में महिलाएँ- बढ़ती भागीदारी पर चुनौतियाँ भी कम नहीं''
जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं को अधिकार संपन्न बनाना बहुत ज़रूरी है, चाहे वह आर्थिक क्षेत्र हो या सामाजिक या राजनीतिक। महिलाओं को स्त्री-पुरुष असमानता की बेड़ियों से मुक्त कराने, उनकी क्षमता विकसित करने, उन्हें सूचना तथा ज्ञान  >स्वाति शर्मा

आतंकवादियों के लिए काल है,
वह जाँबाज महिला

अपराधी का सबसे गहरा संबंध अपराध से ही होता है। अपराध करने के लिए भी साहस चाहिए, जो जितना अधिक साहस इकट्ठा कर सकता है, वह उतना ही बड़ा अपराधी। अपराधी से कई लोग डरते हैं, विशेषकर शरीफ लोग। कई अपराधी बेखौफ होते हैं, >डॉ. महेशपरिमल

 


14जुलाई2008

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