संस्करण: 14 अप्रेल-2014

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क्या कोई नरेन्द्र मोदी को रोक सकता है?

वे संभवत: भारत के अगले प्रधानमंत्री होंगे। इसका मतलब यह नही कि उन्हे होना चाहिये।

     चुनावी सरगर्मी से युक्त भारत के दृश्य से भला कौन चकित नही होता है? 7 अप्रैल से शुरू होने वाले चुनावों में मुंबई के करोड़पतियों के साथ-साथ अनपढ़ ग्रामीणों और झुग्गी बस्ती में रहने वाले बेसहारा लोग भी अपनी सरकार चुनने के लिये बराबरी से भाग लेंगे। पांच सप्ताह तक चलने वाले 9 चरणों के चुनाव में लगभग 80 करोड़ 15 लाख नागरिक अपना वोट डालने के पात्र है, जो इतिहास में सामूहिक लोकतंत्र का सबसे बड़ा कार्य है।        

? द इकोनोमिस्ट से साभार


जाने नमो को :

जैसा 'पिता' वैसा 'पुत्र' ?

        सूबा गुजरात के बाहर रहनेवाले अधिकतर लोग नहीं जानते होंगे कि जनाब मोदी - मुन्तज़िर प्रधानमंत्री - एक 'भावुक लेखक, कवि और संस्कृति के प्रेमी रहे हैं ' और किस तरह 'अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच वह लेखन के लिए समय निकालते हैं वगैरा' (www.narendramodi.in)

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सुभाष गाताड़े


ये लहर क्या

किसी फिल्म के सैट पर है?

     मारी व्यवस्था में किसी क्षेत्र के चुनाव परिणाम क्षेत्र विशेष में चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के बीच सबसे अधिक मत प्राप्त करने वाले को जीता हुआ दिखाते हैं। इन बहुदलीय चुनावों में कई उम्मीदवार कुल बीस प्रतिशत मत पाकर भी जीत जाते हैं और कई 40 प्रतिशत मत पाकर भी हार जाते हैं। इसके विपरीत लहर प्रबन्धित चुनाव परिणामों से नहीं अपितु जनसमर्थन की तीव्रता से जुड़ा होता है जिसमें लाखों एकजुट मतदाता उम्मीदवार की जीत हार को अपनी जीत हार से जोड़ कर देखते हैं। 

 ? वीरेन्द्र जैन


विकास के पर्दे में बीजेपी का सांप्रदायिक खेल

      हा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी का घोषणा पत्र इसलिए देरी से जारी हो सका क्योंकि नरेंद्र मोदी को मुरलीमनोहर जोशी के बनाए घोषणा पत्र को लेकर कुछ आपत्ति थी। चर्चाएं ऐसी भी रहीं कि दोनों के बीच राम मंदिर मसले को लेकर मतभेद थे, लेकिन घोषणा पत्र जारी करने के बाद खुद जोशी ने कहा कि दोनों के बीच मतभेद नहीं थे। यूं तो मतभेदों की खबरों के बाद इस तरह के खंडन आम बात हैं

? विवेकानंद


भाजपा का घोषणापत्र: फासीवादी दस्तावेज

              गामी लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने जो अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी किया है, वह भारत जैसे लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के लिए घातक ही नहीं, बल्कि उसके संवैधानिक मूल्यों के भी विपरीत है। नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का दंभ भरने वाली भाजपा का घोषणापत्र भारत के संविधान की धज्जियां उड़ाता नजर आता है।

 ?   अनिल यादव


अवसरवादिता से भरपूर है

भारतीय जनता पार्टी का घोषणा पत्र

           भारतीय जनता पार्टी ने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। घोषणा पत्र में अन्य बातों के अलावा राममंदिर, धारा 370 और समान नागरिक संहिता की चर्चा है। परंतु इस बार यह चर्चा आक्रामक भाषा में नहीं की गई है। वरन् अत्यधिक दबी जुबान में की गई है। बाबरी मस्जिद के धवंस के बाद राममंदिर की चर्चा आक्रामक भाषा में होती थी, अब भाषा बदल गई है और उसमें वह आक्रामकता नहीं है। स्पष्ट है कि अब शायद भाजपा की समझ में आ गया है कि भगवान राम के सहारे चुनाव की वेतरनी पार नहीं की जा सकती।

? एल.एस.हरदेनिया


फासीवाद को स्वर देते श्री श्री रविशंकर

      भी कुछ दिन पहले ही, 'आध्यात्मिक गुरू और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि क्षेत्रीय पार्टियों को लोकसभा चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए। इसके पीछे उनका तर्क था कि क्षेत्रीय पार्टियों के लोकसभा चुनाव लड़ने के कारण ही केन्द्र में मिली-जुली सरकारें बनती है और जिसके लिए उन्होंने 'खिचड़ी' शब्द इस्तेमाल किया। उनका मानना था कि खिचड़ी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, तथा रुपए के अवमूल्यन के लिए जिम्मेदार होती हैं।

?  हरेराम मिश्र


सेना में यौन प्रताडना

श्रीलंका सेना की स्वीकारोक्ति के मायने

     मिलों के आत्मनिर्णय के आन्दोलन को बर्बर ढंग से कुचलने के लिए पूरी दुनिया में आलोचना का शिकार हो रही श्रीलंकाई सेना अब एक नये विवाद में फंसती दिख रही है। श्रीलंका की सेना अपने प्रशिक्षु महिला सैनिकों के साथ यौन शोषण के आरोप में किस तरह संलिप्त रही है इसके प्रमाण सामने आए हैं।

 

? अंजलि सिन्हा


संदर्भ:-कैंसर के इलाज के लिए तंबाकू के उपयोग का सच

तंबाकू के पक्ष में शोध का सच

        तंबाकू खाने के पक्ष में आया नवीनतम शोध हैरानी में डालने वाला है। इस शोध में नई आवधारणा गढ़ी है कि तंबाकू के पौधों में पाया जाने वाला एक कण अथवा अणु मनुष्य में वजूद जमा चुकी कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने में उपयोगी है। मसलन अब तक जिस तंबाकू को कैंसर का जनक माना जाता था,वहीं तंबाकू कैंसर के निदान में प्रतिरोधी दवा के रूप में काम करेगी। वैसे माना जाता है कि तंबाकू दुनिया भर में प्रत्यक्ष रूप से 40 लाख लोगों की जान लेती है।     

? प्रमोद भार्गव


दरिन्दों को दहशत में डालेगा यह फैसला

     दिल्ली रेप कांड के बाद बनें नए कानून के तहत पहली बार सजा सुनाते हुए बलात्कार के आरोपियों को एक अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। हालांकि इस फैसले के बाद आरोपियों को तुरंत फांसी मिल जाएगी, ऐसा नहीं है। उनके पास शीर्ष अदालत में गुहार लगाने,पुर्नविचार याचिका दाखिल करने तथा सब कुछ हार जाने पर राष्ट्रपति के पास दयायाचिका का विकल्प रहेगा।

? सुनील तिवारी


इस उपलब्धि पर

गर्व कीजिए

        मारा देश आखिरकार अब उन देशों में शामिल हो गया है, जो पोलियो मुक्त हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुए एक समारोह के दौरान भारत समेत पूरे दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र के ग्यारह देशों को पोलियो मुक्त होने का सर्टिफिकेट दिया। डब्लूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र सर्टिफिकेशन आयोग ने केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद को पोलियो मुक्त देश का प्रमाण पत्र सौंपा। जिन देशों को भारत के साथ पोलियो मुक्त घोषित किया गया, उसमें बांग्लादेश, भूटान, कोरिया, इंडोनेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, थाइलैंड व तिमोर-लेस्ते शामिल हैं।

? जाहिद खान


शेर मर रहे हैं, मोदी गरज रहे हैं

      मतौर पर देश में साधारण लोगों को अपने पूर्वजों के मोक्ष को लेकर श्राध्द-यज्ञ कर पाना संभव नहीं हो पाता। वहीं गुजरात में प्रदेश के गौरव समान शेरों की आपदाओं से सुरक्षा व एवं मृतक शेरों व अन्य वन्य प्राणियों के मोक्ष के लिए पिछले दिनों श्राध्द व कल्याणकारी महायज्ञ आयोजित किया गया। राज्य के जीवदया संगठन प्रकृति नेचर क्लब के दिनेश गिरि गोस्वामी एवं जिज्ञेश गोहिल की अगुवाई में प्रदेश के प्रांची तीर्थ सूत्रापाड़ा में आयोजित शेरों के मोक्ष श्राध्द व कल्याणकारी महायज्ञ में प्रांची तीर्थ के आचार्य कौशिक पंडया ने मोक्ष यज्ञ का संचालन किया। शेरों की मोक्ष व आपदाओं से सुरक्षा की कामना लेकर आयोजित किए गए       

? डॉ. महेश परिमल


भिक्षावृत्ति के कलंक से मुक्ति कब ?

        भिक्षावृत्ति किसी भी सभ्य देश के लिए कलंक है। मगर हमारे देश में आज भी सार्वजनिक स्थलों पर भीख मांगते बच्चे, बूढ़े, युवक-युवती आसानी से दिख जाते है जो सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। क्या आपको विश्वास होगा कि स्वाधीन भारत में आज भी कुछ ऐसे स्थान है जहां भिक्षावृत्ति आजीविका का एकमात्र साधन है। पहले बात करें बिहार की, जहां राजनेता विकास की बात करते नहीं थकते। मगर उसी बिहार में समाज कल्याण विभाग ने भीख मांगने वालों का सर्वेक्षण कर जो तथ्य उजागर किया है वह चकित कर देने वाला है।

? डॉ. गीता गुप्त


  14 अप्रेल-2014

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