संस्करण: 14अप्रेल-2008

''भाजपा की 3 वर्षों की अजूबी उपलब्धियां''
चालीस बनाम तीन साल
राजेन्द्र श्रीवास्तव

विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष श्रीमती जमुना देवी ने मधय प्रदेश शासन के चालीस साल (कांग्रेस) और तीन साल (भारतीय जनता पार्टी) की तुलना एक वार्ता में पलटवार किया। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मंत्री ने कहा कि मधय प्रदेश में आज कुशासन, असुरक्षा और भ्रष्टाचार से भारतीय जनता पार्टी नेताओं के स्वविकास का प्रतीक बन गया है, जो चालीस साल में नहीं हुआ। उसे तीन साल में पूरा करने में मुख्यमंत्री के कथन को नेता प्रतिपक्ष ने सच की स्वीकारोक्ति बताया। उन्होंने कहा कि यह सही है कि जो 40 साल में मधयप्रदेश में जो नहीं हुआ वह भाजपा सरकार में हुआ है और हो रहा है।
कांग्रेस राज में मुख्यमंत्री और उनकी धर्मपत्नी के खिलाफ भ्रष्टाचार में कभी एफ.आई.आर. दर्ज नहीं हुआ। किन्तु भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और उनकी पत्नी के खिलाफ़ डम्पर घोटाले में एफ.आई.आर. दर्ज. हुआ है और जिसकी जांच चल रही है। भ्रष्टाचार में काँग्रेस के शासन काल में एफ.आई.आर. दर्ज व्यक्ति की जांच के दौरान किसी राष्ट्रीय नेता ने ईमानदार का प्रमाण पत्र नहीं प्रदान किया, किन्तु भाजपा के राष्ट्रीय नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मधयप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ईमानदार बताकर न केवल मधयप्रदेश को अपमानित किया है। बल्कि जांच को प्रभावित करने की कोशिश की है। इस प्रकार के प्रमाण पत्र से भ्रष्टाचार को और बढ़ावा मिलेगा।
कांग्रेस राज के किसी मुख्यमंत्री की पत्नी ने कभी व्यापार नहीं किया। लेकिन भाजपा राज में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की पत्नी ने आजीविका के लिए व्यापार को जायज बताया है।
कांग्रेस राज में किसी मुख्यमंत्री के साले का राज नहीं रहा, लेकिन भाजपा राज में शिवराज सिंह की सरकार ने म.प्र. में साला राज का नया मॉडल प्रस्तुत किया है।
कांग्रेस के किसी मुख्यमंत्री ने अपने साले को पद पर नहीं बिठाया, किन्तु भाजपा राज में मुख्यमंत्री ने अपने साले को आयुक्त स्काउट गाईड बनाया है।
काँग्रेस के शासन में बिजली के बिलों की वसूली के लिए किसान जेल नहीं गये, किन्तु भाजपा सरकार में बिजली बिलों की वसूली के लिए किसानों को जेल जाना पड़ा है।
कांग्रेस शासन के दौरान कभी दवा खरीदी घोटाला नहीं हुआ। किन्तु भाजपा सरकार ने दवा घोटाले के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
कांग्रेस राज में किसी पार्षद दल को भ्रष्टाचार में आरोपी नहीं बनाया गया, किन्तु भाजपा राज में भोपाल नगर निगम के भाजपा के 39 पार्षदों को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी मानते हुए लोकायुक्त ने उनकी सदस्यता समाप्त करने को कहा है।
कांग्रेस राज में लाभ के पद में किसी सांसद को जाना नहीं पड़ा, किन्तु भाजपा सरकार में भाजपा के लोकसभा को नहीं पड़ा। लाभ के पद के कारण सांसद कृष्ण मुरारी मोघे को लोकसभा की सदस्यता से हाथ धोना पड़ा।
कांग्रेस शासन के दौरान विधानसभा निर्धारित अवधि तक चलती थी। लेकिन भाजपा सरकार ने रिकार्ड बनाया है कि उसके कार्यकाल में किसी भी विधानसभा अधिसूचना द्वारा निर्धारित तिथि तक नहीं चली।
कांग्रेस सरकार के दौरान कर्ज वसूली के कारण किसान ने आत्महत्या नहीं की। परन्तु भाजपा राज में कर्ज़ वसूली के कारण किसानों द्वारा आत्महत्या करना आम बात हो गई है। 1 जनवरी 06 से 31 अक्टूबर 07 के दौरान 8730 लोगों ने मधयप्रदेश में आत्महत्या की है।
कांग्रेस शासन के दौरान सरकार ने बिजली बिल वसूली ठेके पर नहीं दिये। किन्तु भाजपा शासन में फ्रेंचाईजी के नाम पर बिजली वसूली के ठेके दिये गये हैं। ठेकेदारों द्वारा बल प्रयोग से वसूली की अनेक घटनाएँ हो रही हैं।
कांग्रेस राज में आदिवासियों को उनके कब्जे की जमीन से बेदखल नहीं किया गया। परन्तु भाजपा राज में एक लाख आदिवासियों को उनके कब्जे की जमीन से बेदखल किया गया।
कांग्रेस राज के 40 साल में भाजपा राज के तीन साल के बराबर कर्ज नहीं लिया गया। परन्तु भाजपा राज ने अपने 3 वर्षों में 25 हजार करोड़ का कर्ज़ा लिया गया।
कांग्रेस ने गैर विकास पर खर्च 40 साल में 3 साल के बराबर नहीं बढ़ा, परन्तु भाजपा राज में 3 साल में 3 हजार करोड़ गैर विकास कार्य खर्च बढ़ा।
कांग्रेस ने कभी गांव में पंचायतों को समाप्त कर भोपाल में पंचायतें नहीं की गई। लेकिन भाजपा राज में विकेन्द्रीकरण को समाप्त कर सारी व्यवस्था को केन्द्रीय किया गया।ग्राम पंचायतें कमज़ोर हुई और भोपाल में पंचायतें की गई।
कांग्रेस राज में सांसद के दरबार में किसी दलित ने आत्मदाह नहीं किया किन्तु भाजपा राज में सागर में सांसद दरबार में दलित शिवप्रसाद अहिरवार ने आत्मदाह किया।
कांग्रेस राज में किसी सत्ताधारी पार्टी के सहयोगियों ने थाने पर कब्जा नहीं किया। किन्तु भाजपा राज में बजरंग दल के लोगों ने इन्दौर में थाने पर कब्जा किया था।
कांग्रेस सरकार कभी जमीन की सौदागर नहीं बनी, किन्तु भाजपा राज में कलेक्टरों को जमीन बेचकर पैसा इकट्ठा करने के निर्देश दिए गये।
कांग्रेस राज में सत्ताधारी दल के लोगों ने कर्मचारी अधिकारी के साथ मारपीट नहीं की, किन्तु भाजपा राज में हर रोज कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई।
कांग्रेस राज में सिंहस्थ जैसे हिन्दुओं के महापर्व में घोटाला पहले नहीं हुआ। परन्तु भाजपा राज में सिंहस्थ में घोटाला उजागर हुआ। महालेखाकार ने 100 करोड़ से अधिक के घोटाले पकड़े।
कांग्रेस ने गरीबों की जमीन छीनकर अपनी पार्टी के लोगों को सरकार ने नहीं दी। परन्तु भाजपा राज में दलितों और गरीबों की जमीन छीन कर भाजपा नेताओं की संस्था की आवंटित की गई।
कांग्रेस राज में केन्द्र की योजनाओं का नाम बदलकर अपनी बताने का झूठ नहीं बोला गया। किन्तु भाजपा राज में केन्द्र की योजनाओं को अपनी बताकर जनता को बरगलाने का काम किया गया।
कांग्रेस ने कभी फर्ज़ी पुरस्कारों की उपलब्धि का पैमाना नहीं माना, किन्तु भाजपा राज शासन के विभिन्न विभागों में खरीदी के लिए जबाबदार लघु उद्योग निगम का प्रबंध संचालक अपने सचिव को ही पहली बार भाजपा राज में मुख्यमंत्री ने बनाया है। इससे भ्रष्टाचार और कमीशन बाजी में एकदम वृध्दि हो गयी है।
राजेन्द्र श्रीवास्तव