संस्करण: 14जनवरी-2008

हम समवेत परिवार की ओर से आप सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

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आतंकवाद के नाम पर साम्प्रदायिक राजनीति
आज सारी दुनिया की ज्वलंत समस्याओं में आतंकवाद एक बड़ी समस्या है जिससे पीड़ित होने वाले व्यक्तियों के बराबर वे लोग भी पीड़ित होते हैं जो कभी भी कहीं भी उसके घटने की आशंका से ग्रस्त होकर >वीरेन्द्र जैन


                    


                

नस्लीय भेदभाव से संकुचित होगा क्रिकेट
टीम इंडिया के खिलाफ नस्लीय भेदभाव कर जीत को हार में तब्दील कराने भारत समेत पूरा विश्व स्तब्धा हो गया। अम्पायर बकनर की कुंठा और पूर्वाग्रह ने खेल को रंगभेद का नाटय मंच बना डाला। रिकी पोंटिंग >अंजनी कुमार झा


नाराज कार्यकर्ता लिखेंगे भाजपा की तकदीर अपने ही नाराज, ये कैसा राज,
जिक्र चाहे सड़क पर हो अथवा सदन में। चर्चा चौक चौराहों पर हो अथवा पार्टी मुख्यालय में। घर में या फिर कार्यालय में। हर जगह कम से कम दो चार >अमिताभ पाण्डेय


         


             

क्या हुआ बिजली करारों का
मध्यप्रदेश सरकार राज्य में विकास का केवल हल्ला ही मचा रही हैं, जमीन पर विकास का नक्शा बनाने में उसकी कोई रूचि नहीं है। पिछले तीन वर्षों से सरकार राज्य में लाखों करोड़ों रुपयों के पूंजीनिवेश होने का प्रचारीं >विनय दीक्षित


मंत्री ने कहा ''सहयोगी मंत्री भ्रष्ट है''
शायद ही देश के संसदीय इतिहास में कभी ऐसा अवसर आया हो जब एक मंत्री ने अपने सहयोगी मंत्रियों के विरुध्द भ्रष्टाचार का आरोप लगाया हो। परन्तु यह अज़ूबा मध्यप्रदेश में देखने व  >एल.एस.हरदेनिय


                


          


अपराधियों की संरक्षक सरकार
अगर कोई व्यक्ति झुके-झुके चलते हुए ऊंट की चोरी करे और यह समझे कि उसे कोई नहीं देख रहा है तो ऐसे व्यक्ति को नासमझ ही कहा जाएगा। यह नासमझी मुख्यमंत्री पद पर बैठा व्यक्ति करे तो उसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।  >डॉ. दर्शना सिंह


शहरों का बढ़ता दायरा-आसपास के खेतों में लहलहरा रही कालोनियों की फसलें
शहरों से लगे गांवों के खेत, जिनमें बाप-दादों के ज़माने से दलहन, तिलहन और अनाज की फसलें लहलहाती आ रही थी, अब वे सरकारी दस्तावेजों में आवासीय कालोनियों के रूप में  > राजेन्द्र जोशी


   


         

खेलों के लिए अस्तित्व खोती नदी
जिस यमुना नदी के कूलों(किनारों), जल व तल की सतहों पर खेल खेलते हुए द्वापर के कृष्ण जग को खिलाने के खिलाड़ी बन जग प्रसिध्द हुए और यमुना की अस्मिता पर आंच भी नहीं आने दी। बल्कि यमुना को प्रदूषण-मुक  >प्रमोद भार्गव


23 जनवरी-सुभाष चन्द्र बोस जयंती पर विशेष
प्रतिवर्ष जब भारतीय स्वतन्त्रता-दिवस या गणतन्त्र दिवस समारोह में ध्वनि विस्तारक यंत्र पर यह गीत गुंजायमान होता है- 'दे दी हमें आज़ादी, बिना खड्ग, बिना ढाल' >डॉ. गीता गुप्त


                 


       


पशु कल्याण पखवाड़ा 14 जन. से 29 जन.2008 पर विशेष ''पशुओं पर जारी अंतहीन क्रूरता''
पिछले दिनों म.प्र. के वारासिवनी में गोसेवी कार्यकर्ताओं ने अवैध पशु परिवहन करते हुए कुछ ट्रकों को पकड़ा था। इन ट्रकों के अंदर  >डॉ. सुनील शर्मा


''एकता पर भारी पड़ती विविधता''
भारत की संस्कृति विविधाताओं से परिपूर्ण है। भाषा, बोली, भौगोलिक परिस्थिति, रहन-सहन, जाति, धार्म, संप्रदाय यानी सामाजिक-सांस्कृतिक परंपरा का ऐसा कोई पहलू नहीं है, जो विविधाता का प्रदर्शन न करता हो। हालाँकि यही  > स्वाति शर्मा


            


             


महिला स्वास्थ्य और महिला नेतृत्व
वास्तव में स्वास्थ्य की बात करते हुए अक्सर हमारा धयान सिर्फ बीमारियों को लेकर ही रहमा है। जबकि स्वास्थ्य भौतिक, सामाजिक एवं मानसिक रूप से पूर्ण कुशलता की अवस्था है। मात्र रोग की अनुपस्थिति ही स्वास्थ्य नहीं है। >लोकेन्द्र सिंह कोट


बीमार होती स्वास्थ्य सेवाएं
संयुक्त राष्ट्र के संगठन यूनीसेफ़ ने पांच साल से कम उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य पर हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि दुनिया में हर साल 97 लाख बच्चे कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में पांच साल  >महेश बाग़ी


          


          


बीमारी से भी खतरनाक है एड्स का सच
कहा जाता है कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं। पर आज यदि इन भविष्य पर दृष्टि डाली जाए, तो हम पाएँगे कि आज हर बच्चे के भीतर एक दावानल दहक रहा है। गुड़गाँव की घटना ने यह साबित भी >डॉ. महेश परिमल


प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से सुलभ हुआ आवागमन
हमारे देश में तीन लाख किलोमीटर सड़कों का बड़ा नेटवर्क है। यह पूरे देश में फैला है। सड़कों का काम हमारे शरीर की धामनियों की तरह है। जिस प्रकार धामनियाँ स्वच्छ रक्त को शरीर के विभिन्न अंगों में संचारित करती   >निलय श्रीवास्तव


    


                   


हिन्दी कथा साहित्य में नारी अस्मिता
आधुनिक युग में शिक्षा, आत्मनिर्भरता, संवैधानिक समानता के अधिकार और नारी सशक्तिकरण के प्रभावों द्वारा महिलाओं की स्थिति को काफ़ी हद तक सुदृढ़ बनाया गया है। वहीं दूसरी ओर पूरे विश्व में नारियों के प्रति बढ़ती>डॉ. राजश्री रावत 'राज'


 
                  14 जनवरी  2008
 

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