संस्करण:  13 सितम्बर-2010   

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भाजपा-राज में ही क्यों होते हैं दंगे?
   ध्यप्रदेश के रतलाम शहर में दंगा हो गया। प्रशासन को कर्फ्यू लगा कर स्थिति पर नियंत्रण लगाना पड़ा। रतलाम शहर वासियों का आरोप है कि भाजपा समर्थित विधायक पारस सखलेचा की शह पर दंगा भड़का। >महेश बाग़ी

 


यह केवल आर्थिक अपराधी नहीं है
      पिछले कुछ समय से ऐसा कोई सप्ताह नहीं जाता जब समाचार माध्यमों में किसी न किसी सरकारी अधिकारी, राजनेता, या ठेकेदार के यहाँ पड़े छापों में करोड़ों रुपयों का अवैध धन और किलो की तौल में सोना निकलने का समाचार नहीं आता।>वीरेंद्र जैन


 


सोनिया और कांग्रेस की उपलब्धियाँ
  श्रीमती सोनिया गाँधी के चौथी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद जहाँ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को एक नई ऊँचाई और मजबूती मिली है, वहीं दूसरी तरफ कई बड़ी चुनौतियाँ भी सामने खड़ी हुई हैं।>सुनील अमर

 


सम्पत्ति जुगाड़ते आराधय

       भारत के सबसे सम्पन्न मन्दिरों में से एक में शामिल किए जानेवाले तिरुपति बालाजी मन्दिर को संचालित करनेवालों को पिछले दिनों बिल्कुल अलग किस्म की समस्या का सामना करना पड़ा।>अंजलि सिन्हा
 


 

क्रय-विक्रय की वस्तु हो गये हैं सम्मान और पुरस्कार, संस्थाओं में लगी हैं, शाल-श्रीफल की सेल
  प्रत्येक क्षेत्र में निष्ठा, समर्पण और त्याग की भावना से काम करने वाले सुधिजनों की कमी नहीं है। साहित्य-संस्कृति, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्टता प्रदर्शित करने वालों को सम्मानित और पुरस्कृत करने >राजेंद्र जोशी
 


चारों ओर अराजकता, अनुशासनहीनता: कैसे करेगा देश विकास ?
    एक तरफ यह दावा किया जा रहा है कि हमारा देश शीघ्र ही आर्थिक दृष्टि से दुनिया के नक्शे पर तीसरे-चौथे स्थान पर पहुंच जाएगा वहीं दूसरी ओर नैतिक दृष्टि से, उच्च मानव मूल्यों के परिपालन एवं अनुशासन> एल.एस.हरदेनिया


संदर्भ : राज्य अल्पसंख्यक आयोग अल्पसंख्यक आयोग की जानिब सरकारों की बेरूखी
     ध्यप्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सभी काम एक लंबे अरसे से रूके पड़े हैं, शिकायतें, मामले दर्ज होना गोयाकि सभी कुछ बंद है। शिकायतें गर दर्ज भी हो रहीं हैं तो उनका निराकरण वक्त पर नहीं हो पा रहा है।> जाहिद खान


कश्मीरी जिहादियों का असली चेहरा!
       र उपदेश कुशल बहुतेरे, यह उक्ति आज सारे समाज में प्रचलित है। पर इसका एक दूसरा ही रूप हम इन दिनों कश्मीर घाटी में देख रहे हैं। जहाँ लोगों को भड़काने वाले भाषण सुना-सुनाकर यह कहा जा रहा है> डॉ. महेश परिमल


देश पर कलंक हैं मनरेगा के लुटेरे
   केन्द्र में सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने अपने पिछले शासनकाल में देश में बेरोज़गारी कम करने के उददेश्य से जो सबसे प्रमुख योजना लागू की थी, उसका नाम था राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना अर्थात नरेगा।>राखी रघुवंशी


आज भी अधिकारों से वंचित है विकलांग
      यह हैरानी कि बात है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के.जे. बालकृष्णन को कहना पड़ रहा है कि उचित तंत्र के अभाव में न तो जनकल्याण से जुड़ी कई योजनाओं को अमलीजामा पहनाया जा सका है >प्रमोद भार्गव


नैनो तकनीक से आएगी कृषि में बहार
   भारतीय कृषि कई चुनौतियों से जूझ रही है। एक तरफ कृषि उत्पादन की दर में गिरावट का संकट है तो दूसरी ओर बढ़ती जनसंख्या को खाद्य आपूर्ति की चुनौती। >डॉ. सुनील शर्मा


13 सितम्बर-2010 

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