संस्करण: 13 अक्टूबर- 2014

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नए हुक्मरानों की विभाजक राजनीति और जवाहरलाल नेहरू की विरासत

     मतौर पर सुब्रमण्यम स्वामी के बयानों को गंभीरता से नहीं लिया जाता लेकिन नेहरू के अनुयायी इतिहासकारों की किताबों को जला देने वाला उनका बयान उनके अन्य बयानों से थोडा अलग है। यह संघ की उस योजना का हिस्सा है जिसके अनुसार भारत के इतिहास में नेहरू जी के योगदान को कमतर करके पेश करने की साजिश रची गयी है। संघ वाले बहुत दिनों से इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश कर रहे हैं और अब उनको लगता है कि अब वक्त गया है कि वे अपने मंसूबों को अमली जामा पहना दें। 

? दिग्विजय सिंह


क्या मोदी सरसंघचालक को गुरुदक्षिणा दे रहे थे ?

        सं प्रमुख मोहनराव भागवत के विजया दशमी भाषण के दूरदर्शन पर सीधे प्रसारण के विवादास्पद निर्णय के बचाव में अजीब तर्क प्रस्तुत किये गए है।  उनमें से एक ने तो दूरदर्शन के इस सीधे प्रसारण को पोप के संदेश की तरह स्मरण किया। अब, मोहन राव भागवत को स्वयं को पोप के हिंदू समकक्ष के रूप में प्रस्तुत करने के लिए कुछ प्रयास करने होंगे।

?

पवन खेड़ा


आंख फोड़ो अच्छे दिन देखो

     गांव में एक काना था। सब लोग उसे एक आंख होने की वजह से काना कहकर चिढ़ाते थे। उसने सोचा कि इन गांव वालों को सबक सिखाता हूं। उसने रात को 12 बजे अपनी दूसरी आंख भी फोड़ ली और पूरे गांव में चिल्लाता हुआ दौडऩे लगा, मुझे भगवान दिखाई दे रहे हैं, अच्छे दिन दिखाई दे रहे हैं। आधी रात में शोर सुनकर गांव वाले निकल आए। उन्होंने पूछा भाई तुझे कहां से भगवान या अच्छे दिन दिखाई दे रहे हैं।

 ? विवेकानंद


हिरासत में मौतों का अल्पसंख्यक कौन ?

      हिरासत में मौतों का सवाल एक ऐसा प्रश्न है कि उसे लेकर अक्सर नए नए उद्घाटन होते रहते हैं या उस पर अंकुश कैसे लगे इसे लेकर सुझाव आते रहते हैं। हाल के समय में जहां सुप्रीम कोर्ट द्वारा ऐसी मौतों को लेकर तुरन्त प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का फैसला सूर्खियों में रहा, वहीं मुंबई की उच्च अदालत द्वारा हिरासत में हुई मौत को लेकर महाराष्ट्र पुलिस को दिए गए निर्देशों का मामला भी चर्चा में रहा

? सुभाष गाताड़े


दीपावली पर विशेष

क्या राजनीति एक जुआ और जुआ एक युद्ध है?

           दीपावली, जिसका संक्षिप्त रूप दीवाली है और यह मुख्य रूप से हिन्दी भाषी क्षेत्र के हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है। अधिक बाजार चलने के कारण यह वस्तु उत्पादन से जुड़े सभी धर्मों के मानने वालों के लिए भिन्न भिन्न कारणों से महत्वपूर्ण हो जाता है और सभी धर्मों के कारीगरों और व्यापारियों के लिए उम्मीद लेकर आने वाला त्योहार है। इसमें मुद्राओं का विनमय तीव्र हो जाता है।

  ?  वीरेन्द्र जैन


अमरीका की तो दोस्ती अच्छी है और ना ही दुश्मनी

         मैंने कुछ दिन पहिले एक लेख लिखा था जिसका शीर्षक था अमरीका की तो दोस्ती अच्छी है और ना ही दुश्मनी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अभी हाल की यात्रा के संदर्भ में मैं यह बताना चाहूंगा कि आखिर मैंने यह शीर्षक ही क्यों दिया था? क्या मोदी जी की सफल यात्रा के बावजूद यह तर्क अभी भी प्रासंगिक है? अमरीका की दोस्ती व दुश्मनी दोनों खतरों से भरपूर है।

? एल.एस.हरदेनिया


अस्मितावादी चासनी में पिछड़ा

      पिछले दिनों भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे को मुख्यमंत्री बनाने का संकेत यह कहते हुए दिया कि हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम पंकजा के नेतृत्व में सभी पिछड़ी जातियों के लिए न्याय पाने का कार्य जारी रखेंगे। भाजपा पंकजा को मुख्यमंत्री बनाने जा रही है या नहीं इस बात से ज्यादा इस बात की तह में जाने की जरुरत है कि वह पिछड़ी जातियों को जो न्याय दिलाने की बात कह रही है उसकी परिभाषा क्या है?

? राजीव यादव


लागत मूल्य और किसानों का मुनाफा

     केन्द्रीय गृहमन्त्री और भाजपा नेता राजनाथ सिंह ने हरियाणा के झज्जर में एक चुनावी सभा को सम्बोधित करते हुए दावा किया कि उनकी सरकार शीघ्र ही किसानों को उनकी कृषि लागत मूल्य पर 50 प्रतिशत मुनाफा सुनिश्चित करेगी। उन्होंने किसानों को  यह भी घ्यान दिलाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने अब तक किसानों का शोषण किया है लेकिन यह सरकार किसानों और श्रमिकों के पसीने के मूल्य का उचित दाम देगी।

? सुनील अमर


जब कफ्र्यू लगा सिर्फ पुरूषों के लिए

        इस हक़ीकत से परिचित ही हैं कि हमारे समाज में महिलाओं के लिए रातों में अघोषित कफ्र्यू होता है। रात ढलने के साथ साथ सार्वजनिक वाहनों से लेकर सड़कों तक में अकेली महिलाओं का मिलना कम से कम होता जाता है। समय समय पर हम इसका प्रतिकार भी देखते हैं। निर्भया कांड को लेकर जब जबरदस्त सरगर्मी थी, तब कहीं कहीं रात के वक्त़ हजारों की तादाद में एकत्रित होकर स्त्रियों ने इस परिपाठी को चुनौती देने की केाशिश भी की थी।  

? अंजलि सिन्हा


समस्याओं का जन्मदाता, शहरीकरण

      ग्रामीण क्षेत्रों के बरक्स भारत में शहरी क्षेत्रों में आवास की समस्या चिंताजनक है। इसका एक बड़ा कारण अत्यधिक आर्थिक विषमता है, योजना आयोग के अनुमान के अनुसार भारत की जनसंख्या का पांचवा भाग झुग्गी-झोंपड़ी में रहता है। एक सर्वेक्षण के अनुसार बंगलुरू में 10 प्रतिशत, कानपुर में 17 प्रतिशत, मुंबई में 38 प्रतिशत तथा कोलकाता में 42 प्रतिशत लोगों के सामने आवास की कठिन समस्या है। यहां विडम्बना यह भी है कि एक तरफ तो आलीशान मकान हैं जबकि दूसरी तरफ टूटा-फूटा मकान है।

? शैलेन्द्र चौहान


दिखावा बनकर न रह जाए सफाई अभियान

        समय पूरे देश में चर्चा है, तो केवल सफाई की। खूब बातें हो रही हैं, सफाई पर। अब झाड़ू हाथ में लेकर सफाई करने की तस्वीरें आम हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सचिन तेंडुलकर तक, सभी सफाई में जुटे हैं। सफाई हमारी दिनचर्या का अनिवार्य अंग है। सफाई चाहे शरीर की हो या फिर मन की, या फिर गांव-कस्बे की, यह आवश्यक और अनिवार्य है। सवाल यह उठता है कि आखिर एक साथ सबमें एक साथ सफाई का भाव कैसे जागा                   

? डा. महेश परिमल


किसानों के भयावह दिन आने वाले हैं ?

      त्तीसगढ़ की किसान हितैषी रमन सरकार ने इस सत्र में धान की सरकारी खरीद की सीमाबंदी कर दी है। अब धान की सरकारी खरीद प्रति एकड अधिकतम दस क्विंटल तक ही की जावेगी, और पिछले सत्रों में जो खरीद एक नवम्बर से प्रारम्भ होती है इस सत्र में एक दिस. से की जावेगी। छग सरकार के इन निर्णयों से किसान सकते में हैं, क्योंकि पिछले चार छह महीने से वो  चहु ओर एक ही नारा सुन रहे थे कि अब अच्छे दिन आने वाले हैं?

? डा. सुनील शर्मा


अब पुरुषों को भी है आयोग की दरकार

        जकल पूरे देश में वैवाहिक संबंध, घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवाद की वजह से मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताडि़त हो रहे पुरुषों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। ऐसे पुरुषों को शोषण से मुक्ति दिलवाने हेतु सेव इण्डिया फैमिली मेन आरम्भ करने की योजना बनायी है। मध्यप्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाद पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में भी हेल्प लाइन की शुरुआत कर दी गई।                  

? डॉ. गीता गुप्त


  13  अक्तूबर- 2014

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