संस्करण: 13 मई -2013

भ्रष्टाचार की पटरी पर मनरेगा एक्सप्रेस

? अमिताभ पाण्डेय

               केन्द्र सरकार ने ग्रामीण विकास और मजदूरों को उनके गॉवों में पर्याप्त मजदूरी दिलाने के लिए महात्मा गॉधी राष्टीय रोजगार गारंटी योजना मनरेगा को देश भर में लागू किया। यह योजना मध्यप्रदेश में प्रभावशील होने के बाद से ही भ्रष्टाचार का शिकार हो गई है। भ्रष्टाचार करने वालों पर त्वरित गति से और प्रभावी कार्यवाही न होने का परिणाम यह रहा कि अब इस योजना में हुई अनियमितताओं,भ्रष्टाचार के किस्से भोपाल से लेकर जिला ,तहसील और गॉव की पंचायत तक फैल गये है। इस योजना के तहत केन्द्र सरकार द्वारा भेजी गई राशि जिन जिम्मेदार अफसरों को सौंपी गई, उनके नाम भी  गडबडी करने वालों में शामिल हो गये। अभी तो हाल यह है कि सरपंच,सब इंजीनियर से लेकर जनपद,जिला पंचायत के मुख्यकार्यपालन अधिकारी,कलेक्टर और उनसे वरिष्ठ अफसरों के नाम भी मनरेगा के भ्रष्टाचार में सामने आ रहे है। माना जा सकता है कि मध्यप्रदेश में मनरेगा एक्सप्रेस भ्रष्टाचार की पटरी पर तेजी से दौड रही है। मनरेगा में गडबडी की शिकायतें कम होने के बजाय साल दर साल बढती जा रही है।

                सरकार के नियत्रंक एंव महालेखा परीक्षक द्वारा किये गये आडिट में मनरेगा की गडबडियों को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई है।

               इसके बावजूद शासन को भारी वित्तीय हानि पहुॅचाने वाले जिन बडे अफसरों पर कडी कार्यवाही की जाना थी वे महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हुए है। इसके विपरीत पंच,सरपंच,सब इंजीनियर,पर भ्रष्टाचार के आरोप में विभागीय कार्यवाही त्वरित गति से हो रही है।बडें अफसरों का बचाव करने की प्रवृति के कारण मनरेगा में भ्रष्टाचार के मामले कम होने के बजाय बढते जा रहे है॥

               मनरेगा से जुडे सवालों के विधानसभा में भी संतोषप्रद उत्तर नहीं मिल पा रहे है। इस योजना में हुई भारी आर्थिक गडबडी के लिए एक दर्जन से अधिक आई ए एस अधिकारी सीधो सीधो आरोपों के घेरे में है लेकिन जब कार्यवाही करनेकी बात आती है तो  जॉच की जा रही है  जॉच अभी पूरी होना बाकी है जॉच रिपोर्ट आने पर कार्यवाही होगी जैसे परम्परागत और रटे रटाये डायलाग वर्षो तक भ्रष्ट अफसरों का बचाव करते है। यहॉ यह बताना जरूरी होगा कि मनरेगा के घपले घोटले केवल प्रमुख विपक्षी दल कॉग्रेस ही नहीं बल्कि सत्तारूढ भाजपा विधायकों के निशाने पर भी है।  भाजपा विधायकों ने मनरेगा के क्रियान्वयन के दौरान अपने अपने क्षेत्रों में हुए भ्रष्टाचार को लेकर राज्य विधानसभा तक में सवाल जवाब किये है। नाम जाहिर न करने की शर्त पर भाजपा विधायक भी यह मानते है कि मनरेगा के भारी भ्रष्टाचार के लिए बडे अफसर ज्यादा जिम्मेदार है लेकिन उन पर जितनी तेजी से कार्यवाही होना चाहिये वह हो नहीं पा रही है। वजह यह है कि भ्रष्ट अफसरों को उच्च स्तर के अधिकारियों द्वारा संरक्षण दिया जा रहा है। इस सम्बन्ध में राज्य विधानसभा के विधायकों की प्राक्कलन समिति का जिक्र करना जरूरी होगा । समिति ने इन्दौर संभाग के बडवानी,खरगौन,धार,झाबुआ आदि जिलों का दौरा कर मनरेगा के तहत हुए कामकाज  स्थल निरीक्षण किया तो घपले घोटाले परत दर परत खुलने लगें। विधायकों के इस समिति ने पाया कि बडवानी जिल में तो जिन कामों के लिए मनरेगा की पूरी की पूरी रकम सरकारी खाते से निकाल ली गई वे काम एक डेढ साल बीत जाने पर भीपूरे नही हो पाये है। अकेले बडवानी जिले में मनरेगा के घोटालों की जब केन्द्र सरकार द्वारा भेजे गये दल ने जॉच की तो पता चला कि योजना में काम बहुत कम और कागज पर पूरा जमा खर्च हो गया है। बडवानी जिले में मनरेगा का भ्रष्टाचार जब देशव्यापी चर्चा का विषय बना तो कुछ और सरपंच,सब इंजीनियर के विरूधद कार्यवाही की गई जबकि भ्रष्टाचार के जिम्मेदार बडे अफसर  सख्त कार्यवाही से बचे रहे। मनरेगा में हुए भारी भ्रष्टाचार  के दोषी बडे अफसरों को दण्डित करने के बजाय पंचायत एक ग्रामीण विकास विभाग में उच्च पद पर आसीन एक अधिकारी ने सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी भष्टाचार के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया। अपने विभाग के भ्रष्ट अफसरों की पैरवी करने वाले यह भूल गये कि अफसरों के फर्जीवाडे,भष्टाचार उजागर करने की मुहिम सामाजिक कार्यकताओं ने ही श्शुरू की । यदि गरीब मजदूरो के हक की लडाई सामाजिक कार्यकर्ता नहीं लडते तो न मजदूरों को उनकी मजदूरी मिल पाती और न ही भ्रष्टाचार करने वालो का पर्दाफाश होता। बहरहाल अफसरों के भ्रष्टाचार का ठीकरा सामाजिक कार्यकर्ताओं के सिर फोडना  आम आदमी की समझ से परे है।

              इस बारे में बडवानीं जिले के विधायक बाला बच्चन का कहना है कि भ्रष्टाचार ने ग्रामीण विकास, आदिवासी विकास के लिए बनाई गई योजनाओं की हालत खराब कर दी है। आदिवासी जिलों में तैनात अफसर भारी भष्टाचार कर रहे है और भाजपा सरकार भ्रष्ट अफसरो को सरक्षंण दे रही है। पूर्व मंत्री बाला बच्चन सवाल करते है कि सरकार घपले घोटालों के जिम्मेदार बडे अफसरों पर त्वरित और कडी कार्यवाही क्यों नहीं करती?

                उल्लेखनीय है कि बडवानी जिले में हुए मनरेगा घोटाले में बडे अफसरों को बचाने के सवाल उच्च न्यायालय तक पहुॅच गये है। हाल ही में उच्च न्यायालय की इन्दौर खंडपीठ में एक याचिका दायर कर यह कहा गया है कि मनरेगा में भ्रष्टाचार के जिम्मेदार बडे अफसरों को बचाया जा रहा है। याचिका को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने इस मामले में राज्य सरकार सेजवाब तलब किया है प्रंसगवश यह बतानाजरूरी होगा कि मधयप्रदेश के सभी जिलों में चलार्इ्र जा रही इस योजना में भ्रष्टाचार से मंत्री,मुख्यमंत्री के जिले नहीं बच पाये है। इस योजना की शिकायतों का सिलसिला रूक नहीं पा रहा है।

? अमिताभ पाण्डेय