संस्करण: 13 मई -2013

मुख्यमंत्री सहित मध्यप्रदेश के भाजपा नेतृत्व के विरूध्द असंतोष के संकेत

? एल.एस.हरदेनिया

              भी हाल में तीन ऐसी घटनायें हुई हैं जो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिये नकारात्मक संदेश देती हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण घटना वह है जिसमें उमा भारती का भव्य स्वागत हुआ। अवसर था उमा भारती के जन्म दिन का। उमा भारती ने उस समय लोगों को चौंका दिया जब उनने यह कहा कि लोग मेरा जन्म दिन मनाने की तैयारियां बड़ें पैमाने पर कर रहे हैं यह सूचना मुझे दिग्विजय सिंह ने दी। उनने यह भी बताया कि दिग्विजय सिंह उन लोगों में से थे जिनने सर्वप्रथम मेरे जन्म दिन पर मुझे बधाई दी। यह बात उनने मीडिया को बताई। मीडिया के प्रतिनिधियों ने यह भी जानना चाहा कि क्या उन्हें मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने बधाई दी है? उमा भारती ने व्यंग की भाषा में बोलते हुये कहा कि अभी तक तो नहीं दी, हो सकता है रात तक दें। जहां उमा भारती के समर्थक बड़ीं संख्या में उन्हें बधाई देने उनके भोपाल स्थित निवास पर पहुँचे, परन्तु प्रदेश भाजपा के कोई भी महत्वपूर्ण नेता ने उन्हें बधाई नहीं दी।

               यहां यह स्मरण दिलाना आवश्यक है कि जब उमा भारती को भाजपा में पुन: प्रवेश दिया गया था उस समय यह स्पष्ट कर दिया गया था कि वे मध्यप्रदेश के मामलों में दिलचस्पी नहीं लेंगी। काफी लंबे समय तक उनने स्वयं को मध्यप्रदेश की राजनीति से दूर रखा। पार्टी नेतृत्व ने उनका ट्रांसफर उत्तर प्रदेश कर दिया। उनने उत्तरप्रदेश से चुनाव भी लड़ा। पर अब लगता है उनने उस आवश्वासन के विपरीत काम करना प्रारंभ कर दिया है। इसका सर्वप्रथम संकेत उस समय मिला जब उनने सार्वजनिक रूप से एक मामले में मुख्य मंत्री के विरूध्द अपनी नाराजगी प्रगट की। इस समय मुख्य मंत्री जिलों में जाकर अटल ज्योति का उद्धाटन कर रहे हैं। अटल ज्योति का अर्थ है उस क्षेत्र में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करना। ऐसा ही एक कार्यक्रम टीकमगढ़ जिले में आयोजित था। टीकमगढ़ उमा भारती का गृह जिला है। टीकमगढ़ के कार्यक्रम में उमा भारती को आमंत्रित नहीं किया गया था। इस पर उमा भारती ने गंभीर नाराजगी प्रगट की। नाराजगी की गंभीरता देखते हुये मुख्य मंत्री ने टीकमगढ़ का कार्यक्रम ही रद्द कर दिया। स्पष्ट है कि उमा भारती की नाराजगी एक प्रकार से मध्यप्रदेश के मामले में सीधा हस्तक्षेप है।

                उमा भारती द्वारा मध्यप्रदेश के मामले में हस्तक्षेप को उनके अनुयायी उचित ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि उमा जी अब अखिल भारतीय जनता पार्टी की उपाध्यक्ष है। इस हैसियत से उन्हें मध्यप्रदेश क्या देश के किसी भी प्रदेश में हस्तक्षेप करने का अधिकार है। चूँकि मध्यप्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। इसलिये इस बात की पूरी संभावना है कि उमा भारती का हस्तक्षेप और बढ़े। शिवराज सिंह चौहान के लिये, जिनका अभी तक मधयप्रदेश में एकक्षत्र राज था, उमा भारती का हस्तक्षेप खतरे की घंटी हो सकती है। 

                अखिल भारतीय भाजपा के एक और उपाध्यक्ष हैं प्रभात झा। वे अभी कुछ समय पहिले तक मध्यप्रदेश भाजपा के अधयक्ष थे। वैसे तो वे अभी चुप हैं। परन्तु इस बात की पूरी संभावना है कि उनकी प्रदेश के मामलों में दिलचस्पी बढ़े। यदि ऐसा होता है तो आश्चर्य नहीं होगा कि उमा भारती और प्रभात झा का संयुक्त मोर्चा बन जाये।

               मुख्यमंत्री के लिये दूसरी बुरी खबर उनकी मंत्रि परिषद के सदस्यों ने दी। दिनांक 7 मई मंगलवार को मंत्रिपरिषद की बैठक के दौरान मुख्य मंत्री ने मंत्रियों से अनुरोधा किया है कि वे सब शाम को 6 बजे उनके शासकीय निवास पर पहुँचे। मुख्य मंत्री ने कहा कि वे सभी मंत्रियों से पृथक रूप से व्यक्तिगत बातचीत करना चाहेंगे। इस पर मंत्रियों ने आने में असमर्थता प्रगट की। मंत्रियों का कहना था कि उन्हें उनके गृह क्षेत्रों में संपन्न होने वाले विवाह समारोहों के साथ साथ अन्य कार्यक्रमों में जाना है इस पर मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि वे इन कार्यक्रमों को रद्द करें और शाम को ठीक 6 बजे उनके निवास पर पहुँचे। परन्तु मंत्री अपने निर्णय पर कायम रहे। मंत्रियों की जिद्द के मद्दे नजर मुख्य मंत्री ने पार्टी अध्यक्ष नरेन्द्र तोमर से चर्चा की और अपने निर्णय को वापिस ले लिया। साधारणत: मंत्रिपरिषद के सदस्यों से यह अपेक्षा रहती है कि वे मुख्य मंत्री के आदेशों की अवहेलना किसी हालत में न करें। मुख्य मंत्री का मंत्रिपरिषद के सदस्यों पर पूर्ण नियंत्रण रहना मंत्रिमंडलीय व्यवस्था का अभिन्न अंग माना जाता है। परन्तु इस मामले में मंत्रियों ने मुख्य मंत्री के आदेश को नहीं माना। इससे यह स्पष्ट जाहिर होता है कि मुख्य मंत्री का मंत्रिपरिषद के सदस्यों पर नियंत्रण ढीला हो रहा है। शायद मंत्री ऐसा रवैया वीरेन्द्र कुमार सकलेचा एवं सुन्दर लाल पटवा के मुख्य मंत्रित्व के दौरान नहीं अपना पाते। सकलेचा और पटवा जी का अपने मंत्रियों पर जबरदस्त नियंत्रण था।

               न सिर्फ मंत्री वरन् पार्टी के सांसद और विधायक भी पार्टी नेतृत्व के विरूध्द विद्रोही रवैया अपना रहे हैं। मध्यप्रदेश के सागर शहर में बिजली के वितरण का ठेका एक प्रायवेट कंपनी को दे दिया गया। सरकार के इस निर्णय के विरूध्द कांग्रेस ने आंदोलन छेड़ दिया। कांग्रेस के आंदोलन को जनसमर्थन मिलने लगा। इस बीच भाजपा के स्थानीय सांसद भूपेन्द्र सिंह और स्थानीय विधायक शैलेन्द्र जैन सरकार के निर्णय के विरूध्द अनशन पर बैठ गये। इससे एक गंभीर स्थिति निर्मित हो गई। मामले की नाजुकता के मद्दे नजर विद्युत मंत्री राजेन्द्र शुक्ल को सागर रवाना किया गया। सागर पहुँचकर शुक्ल ने भूपेन्द्र सिंह और शैलेन्द्र जैन का अनशन तुड़वाया। इसके बाद अनेक लोग मंत्री से मिले और उनने कंपनी की कार्यशैली के विरूध्द अनेक शिकायतें कीं। मंत्री ने आश्वासन दिया कि कंपनी की गतिविधियों की जांच की जायेगी और गलती पाई गई तो कंपनी के विरूध्द कार्यवाही होगी। मंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि अब बिजली वितरण और मेन्टेनेंस का काम किसी प्रायवेट कंपनी को नहीं दिया जायेगा।

               इन घटनाओं से ये संकेत मिलते हैं कि भाजपा नेतृत्व के विरूध्द अनेक मोर्चो पर असंतोष सामने उभरकर आ रहे हैं। इस बीच ऐसे संकेत बड़े पैमाने पर दिये जा रहे हैं कि अनेक वर्तमान विधायकों की टिकटे कटेंगी। यह खबर भी नेतृत्व के विरूध्द आक्रोश प्रगट करने का गंभीर कारण हो सकता है।

? एल.एस.हरदेनिया