संस्करण: 13  जनवरी - 2014

एक समय मुसलमानों के सरपरस्त रहे मुलायम सिंह को क्या हो गया है?

? एल.एस.हरदेनिया

          खिर उत्तरप्रदेश के समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव को, जो मुसलमानों के संरक्षक समझे जाते थे उन्हें क्या हो गया है?वे और उनके पुत्र अखिलेश यादव जो देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं कुछ ऐसी गतिविधियां कर रहे हैं जो सभी की समझ के बाहर हैं।वे एक के बाद एक गलतियां कर रहे हैं। और कुछ मायनों में उनका व्यवहार ठीक वैसा ही है जैसा कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2002के दंगों के दौरान और उसके बाद किया था और किया है।

                   अभी हाल में उत्तरप्रदेश की सरकार ने जोर जबरदस्ती से दंगा पीड़ितों के शिविर को नेस्तनाबूत कर दिया और वहां पर रहने वाले दंगो पीड़ितों को कड़ाके की ठंड में खुले में रहने को मजबूर कर दिया। वैसे तो दंगों के दौरान ही उत्तरप्रदेश की सरकार का रवैया समझ के बाहर रहा है। अभी तक मुलायम सिंह यादव और उनकी समाजवादी पार्टी की यह प्रतिष्ठा थी कि वे मुसलमानों के सरपरस्त हैं और हर हालत में उनकी रक्षा करते हैं। परंतु दंगों के बाद भी उनका रवैया अजीबो-गरीब रहा है। मामला चाहे राहत का हो, चाहे दंगा पीड़ितों की स्थिति के संबंध में गलत बयानों का हो, चाहे दंगों पीड़ितों के संबंध में आपत्तिजनक बातों का हो सभी कुछ समझ के बाहर रहा है। जहां मुख्यमंत्री अखिलेख यादव का व्यवहार लीक से हटकर रहा है वहीं मुलायम सिंह की स्थिति भी ऐसी है जिस पर विश्वास नहीं किया जा सकता। यह आश्चर्य की बात है कि राहत शिविरों की स्थिति जानने के लिए एक बार भी मुलायम सिंह इन शिविरों में नहीं गए। इसके ठीक विपरीत वे उन नेताओं का मखौल उड़ाते रहे जो इन शिविरों में वहां के रहने वाले दंगा पीड़ितों की स्थिति का जायजा लेने गए। मुलायम सिंह यादव ने लालू प्रसाद यादव को जो पीड़ितों के शिविर को देखने गए और पीड़ितों से मिले उन्हें कांग्रेस का गुलाम बताया। और राजीव गांधी के बारे में कहा कि वे शिविरों में इस तरह गए जैसे एक चोर रात को किसी के घर में घुसता है। मुलायम सिंह यादव और उनके मुख्यमंत्री पुत्र अखिलेश यादव यह दावा करते हैं कि इन शिविरों में दंगों पीड़ित नहीं रह रहे हैं वरन् इनमें विरोधी पार्टियों द्वारा भेजे गए षडयंत्रकारी रह रहे हैं। मुलायम सिंह की इस प्रतिक्रिया की चारों तरफ भर्त्सना की गई है। इसके साथ ही अखिलेश यादव ने आदेश जारी किया कि शिविरों को बंद कर दिया जाए। उन्होंने इस बात का भी धयान नहीं रखा कि इस समय उत्तरप्रदेश शीत लहर की गिरत में है और शिविर में रहने वाले कुछ बच्चे भी कड़कड़ाती ठंड का शिकार हो चुके हैं। सरकार यह भी स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि कुछ बच्चों की मृत्यु ठंड के कारण हुई है। उत्तरप्रदेश सरकार के सभी अधिकारी इस बात से इंकार कर रहे हैं कि एक भी बच्चे की मृत्यु ठंड के कारण नहीं हुई है। सरकार और उसके अधिकारी इस बात को भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं कि शिविर में रहने वाले लोग अभी भयभीत हैं और उन्हें इस बात का भी भरोसा नहीं है कि गांव में वापिस जाने पर वे सुरक्षित रह पाएंगे। अखिलेश यादव ये मानकर चल रहे हैं कि शिविरों के संबंध में उनका रवैया सौ प्रतिशत सही है। जब भी किसी पत्रकारवार्ता में शिविरों की दुखद स्थिति के बारे में पत्रकारों द्वारा सवाल पूछे जाते हैं तो पत्रकारों को अखिलेश यादव के आक्रोश का सामना करना पड़ता है। स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। जो समाजवादी पार्टी एक समय मुसलमानों में सबसे लोकप्रिय थी उसके विरोध में अब मुसलमान लोग न सिर्फ बातें कर रहे हैं बल्कि आंदोलन भी कर रहे हैं।

                 वैसे तो लगभग सभी शिविर जहां पर दंगा पीड़ित रह रहे थे तोड़ दिए गए हैं। परंतु शामली जिले के मालकपुर शिविर में रहने वाले लोगों को भी वहां से भगाने का प्रयास किया जा रहा है। परंतु इस शिविर में रहने वाले दंगा पीड़ित किसी भी हालत में शिविर को छोड़ने को तैयार नहीं है। इस शिविर में 4000 लोग रह रहे हैं। शामली के जिला कलेक्टर पीके सिंह बार-बार शिविरार्थियों से अपील कर रहे हैं कि वे शिविर छोड़कर अपने गांव वापस चले जाएं। शिविर में रहने वालों का कहना है कि उनके उपर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। शिविर में रहने वालों ने घोषणा कर दी है कि यदि उन्हें जोर जबरदस्ती कर शिविरों से हटाया जाता है तो वे उसके विरूध्द आंदोलन करेंगे। शिविर में रहने वालों को डर है कि रात के अंधोरे में उन्हें किसी दिन यहां से हटाया जा सकता है। इसलिए अनेक शिविरार्थी रात भर अपने अपने शिविरों पर जगकर पहरेदारी कर रहे हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद वे रात भर जगकर न सिर्फ स्वयं चौकन्ना रह रहे हैं वरन् शिविर में रहने वाले अन्य लोगों को भी सावधान करते रहते हैं। उनका कहना है कि हम किसी भी हालत में अधिकारियों द्वारा हमें यहां से भगाने के प्रयासों को सफल नहीं होने देंगे। उनकी मांग है कि वे इसी शर्त पर वापिस जाएंगे कि उन्हें पूरी सुरक्षा की गारंटी दी जाए। जब उनसे कहा जाता है कि पुलिस तुम्हें सुरक्षा देगी तो उनका जवाब होता है कि इसी पुलिस के होते हुए तो दंगे हुए। हम उसी पुलिस से किस प्रकार की सुरक्षा की अपेक्षा कर सकते हैं? इसलिए सुरक्षा के आश्वासन के बावजूद वे किसी भी हालत में शिविरों को छोड़ने को तैयार नहीं है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जो लोग मालकपुर शिविर में रह रहे हैं वे दंगा पीड़ित नहीं है। वे सिर्फ भय से पीड़ित हैं और उसी कारण शिविर को नहीं छोड़ना चाहते। परंतु अनेक लोग अपने-अपने गांव वापिस चले गए हैं और पिछले दो महिनों में इन गांवों में, एक भी घटना नहीं हुई है। परंतु शिविर में रहने वालों का कहना है कि गांव में जाकर हमें तरह-तरह की मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा, जिनसे बचाने के लिए हमें कोई भी उपलब्धा नहीं होगा।

                शहजाद पूनावाला जो शिविर में रहने वालों को तरह-तरह की सहायता पहुंचा रहे हैं, ने यह शिकायत की है कि उन्हें तरह-तरह की धमकी दी जा रही हैं और यहां तक कि उन्हें चेतावनी दी जा रही है कि यदि मैं अपने आंदोलन के विचार पर कायम रहता हूं तो मेरी जान भी जा सकती है।

              इस बीच ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेन्स एसोसिएशन की अध्यक्ष सुभाषनी अली ने यह आरोप लगाया है कि एक ओर जहां उत्तरप्रदेश की सरकार शिविर में रहने वाले और अन्य दंगा पीड़ितों को सुरक्षा मुहैया नहीं करा पा रही है वहीं दूसरी ओर उनकी बुनियादी आवश्यकताओं की भी पूर्ति नहीं कर पा रही है। साथ ही दंगो के बहुसंख्यक आरोपी अभी कानून की गिरत के बाहर हैं। और यह मुख्य कारण है जिससे दंगा पीड़ित अपने गांव को जाने से डर रहे हैं। शिविरों में लगभग नारकीय स्थिति रही है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इन दंगों का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में कायम हिन्दू मुस्लिम एकता को तहस-नहस करना रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर साम्प्रदायिकता का जहर फैलाया है। इस क्षेत्र में चौधरी चरणसिंह जो उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और प्रधानमंत्री भी बने का प्रभाव रहा है। महेन्द्र सिंह टिकेत जो एक बड़े किसान नेता थे उनका भी प्रभाव इस क्षेत्र में था। चाहे चरणसिंह हों चाहे टिकेत दोनों को हिन्दू और मुसलमानों का भारी समर्थन प्राप्त रहा है। दोनों के उत्तराधिकारियों का भी यहां प्रभाव रहा है। इस प्रभाव के कारण भारतीय जनता पार्टी यहां पर अपनी जडे नहीं जमा सकी। अब चूंकि मुसलमानों और हिन्दुओं के बीच में वैमनस्य की स्थिति निर्मित हो गई है इसलिए इस बात की पूरी संभावना है कि इससे भारतीय जनता पार्टी राजनीतिक रूप से लाभांवित हो।

? एल.एस.हरदेनिया