संस्करण: 13  जनवरी - 2014

दागियों को संरक्षण और भ्रष्टाचार में

जंग का दावा

 

? विवेकानंद

                हाल ही में जब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को आदर्श हाउसिंग सोसायटी के फ्लैट आवंटन को आई रिपोर्ट पर पुनर्विचार करना चाहिए, तब भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इसे दिखावा बताया। लेकिन बड़े ही फक्र से भ्रष्टाचार के आरोपों में कुर्सी से हटाए गए कर्नाटक के अपने पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को पार्टी में शामिल कर लिया। भारतीय जनता पार्टी ने यह शुभ कार्य तब किया है जबकि उसके प्रधानमंत्री पद के दावेदार गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी हर रैली में यूपीए सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहते हैं। यह ईमानदारी का कौन सा चरित्र है समझ में नहीं आया और अपनी इसी ईमानदारी को आगे करके किस मुंह से जनता से कांग्रेस मुक्त देश का आह्वान करते हैं, यह भी समझ से परे है। कमाल है, आप दंगों के आरोपियों को हीरो बनाते हैं, भ्रष्टाचारियों को गले लगाते हैं और ईमानदार होने की तख्ती लेकर जनता को बेवकूफ बनाते हैं। इतना खुल्लमखुल्ला दोगलापन कहीं ओर शायद ही देखने को मिलता हो। बीएस येदियुरप्पा पर अपने बेटों और रिश्तेदारों को मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए लाभ पहुंचाने, कई जमीन सौदों में गड़बड़ी, अवैध रूप से खनन लाइसेंस देने के गंभीर आरोप थे। इतना ही नहीं इन्हीं भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण येदुरप्पा जेल भी काट चुके हैं। वैसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने वाले नरेंद्र मोदी या भारतीय जनता पार्टी का यह पहला भ्रष्टाचारी प्रेम नहीं है, इससे पहले भी मोदी ऐसे कारनामे कर चुके हैं। लेकिन इतना जरूर है कि येदियुरप्पा को मोदी की चापलूसी का फल मिल गया। कभी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को खुलकर गरियाने वाले येदियुरप्पा ने पार्टी के उगते सूरज को सलामी ठोकना नहीं छोड़ी। पार्टी से बगावत करने के बाद भी वे नरेंद्र मोदी के गुणगान में लगे रहे, जिसका उन्हें प्रतिफल मिला। हां यहां एक खास बात यह हुई कि पार्टी के इस फैसले ने साफ कर दिया कि लालकृष्ण आडवाणी की भारतीय जनता पार्टी में अब कोई हैसियत नहीं बची। आडवाणी अपनी कई रैलियों में कर्नाटक के भ्रष्टाचार से सही तरीके से न निपटने का आरोप अपनी ही पार्टी पर लगाते रहे हैं। इतना ही नहीं कर्नाटक चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की पराजय पर आडवाणी जी ने कहा था उन्हें पार्टी के हारने पर आश्चर्य नहीं है, हां यदि जीत जाती तो जरूर आश्चर्य होता। बावजूद इसके येदियुरप्पा को पार्टी में शामिल कर लिया गया, जो इस बात को स्वत: साबित करता है कि आडवाणी अब सिर्फ पार्टी में नाम के लिए हैं। वास्तव में उनकी कोई उपयोगिता नहीं है। जो भी निर्णय होते हैं उनमें उनकी इच्छा या तर्क को सम्मान नहीं दिया जाता।

             पार्टी के दूसरे मुख्यमंत्री, जिनका जिक्र भी भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में यदाकदा होता रहाता है, उनकी कार्यशैली भी बड़ी मजेदार है। वे तभी बोलते हैं जब उनका लाभ होता है, लच्छेदार बोलते हैं और कार्यवाही भी वही करते हैं, जिसमें उनका या उनकी पार्टी का हित हो। भ्रष्टाचार को लेकर खासे सख्त बयान देते हैं, कई अफसरों को नाप चुके हैं, लेकिन सबसे जोरदार बात यह है कि पिछले कार्यकाल में जिन मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे उनका बाल भी बांका नहीं होने दिया। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के सात मंत्री और पूर्व मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के मामले लोकायुक्त में कई सालों से लंबित हैं। लेकिन इनमें से कुछ मंत्रियों के खिलाफ  जांच के लिए सरकार जरूरी दस्तावेज लोकायुक्त को नहीं दे रही है। जनता के बीच में जाकर मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के समूल नाश का वादा करते हैं और मंत्रियों को बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं और खुद की सरकार को सबसे पाक-साफ बता रहे हैं, जबकि देश का सबसे बड़ा घोटाला इसी राय में खुलने की उम्मीद है, जिसमें सरकार के मंत्री भी कानूनी फंदे में है।

             बहरहाल भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की एक खासियत है, वे जो भी बोलते हैं पूरी दमदारी से बोलते हैं। झूठ भी बोलेंगे तो भी इसी अदा से बोलेंगे। पिछले दिनों प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में नरेंद्र मोदी को लेकर पूछे गए सवाल पर गुजरात दंगों की चर्चा कर दी, जिसे लेकर भारतीय जनता पार्टी बौखला गई। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिहं ने कहा कि जब अदालत दंगों के मामले में नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे चुकी है, ऐसे में प्रधानमंत्री का यह बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन राजनाथ जी को यह बयान देते हुए यह बात याद नहीं रही कि बोफोर्स मामले में भी अदालत पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी को क्लीन चिट दे चुकी है, इसके साथ यह भी साबित हो चुका है कि राजीव गांधी पर लगाया गया भ्रष्टाचार का आरोप सिरे से झूठा था, फिर भारतीय जनता पार्टी बार-बार इस झूठे आरोप को कांग्रेस के नेता के सिर मढ़ती रहती है। यानि बीजेपी बोले तो ठीक और मनमोहन बोलें तो गलत। जिस दिन राजनाथ सिंह प्रधानमंत्री के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बता रहे थे, उसके एक दिन पहले जब यूपीए सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा फैसला लेते हुए 36000 करोड़ के हैलीकाप्टर घोटाले का सौदा रद्द किया था। बावजूद इसके बीजेपी के एक नेता आरोप लगा रहे थे कि हर घोटाले के तार इटली से क्यों जुड़ते हैं। इसमें उन्होंने बोफोर्स का भी जिक्र किया था।

              भारतीय जनता पार्टी के इन मुख्यमंत्रियों की एक ओर खासियत यह है कि वे केंद्र की योजनाओं पर काम नहीं करते और हमेशा रोना रोते हैं कि हमारे साथ सौंतेला व्यवहार होता है। नरेंद्र मोदी इस मामले में अव्वल हैं। हालांकि इनकी लगातार पोल खुलती रहती है, लेकिन संकोच नाम की सिकन उनके चेहरे पर नहीं दिखती। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने इसकी पोल खोली। किसानों के हित का दम भरने वाली भारतीय जनता पार्टी शासित रायों में मिट्टी को सोना बनाने की प्रमुख केंद्रीय योजना एकीकृत जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम के क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो रहा है। केंद्र की यह योजना ऐसी है कि न सिर्फ राय का विकास होता है बल्कि राय की गरीब जनता को भी लाभ होता है। वर्ष 2009-10 से वर्ष 2013-14 तक केंद्र ने इस कार्यक्रम के लिए गुजरात को 3178 करोड़ रुपये की योजनाएं मंजूर की लेकिन राय ने इन योजनाओं पर गंभीरता से काम नहीं किया। चालू वित्त वर्ष के लिए आवंटित धन में 409 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए हैं। यदि राय सरकार इस राशि का उपयोग कर लेती तो केंद्र सरकार अगली किश्त के रूप में इससे अधिक धनराशि आवंटित कर सकती थी। लेकिन देश का विकास करने का दावा करने वाले गुजरात के मुख्यमंत्री को इतनी महत्वपूर्ण योजना में कोई दिलचस्पी ही नहीं है। अन्य भारतीय जनता पार्टी शासित रायों का रवैया भी केंद्रीय योजनाओं के के प्रति दोहरा है। आईडब्ल्यूएमपी के तहत जलग्रहण क्षेत्रों के रूप में पेयजल समस्याग्रस्त या परती भूमि क्षेत्र, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र, अधिकतम सामुदायिक भूमि वाले क्षेत्र या ऐसे क्षेत्रों का चयन किया जाता है, जहां वास्तविक मजदूरी, न्यूनतम मजदूरी दर से काफी कम हो। योजना के नए निर्देशों के अनुसार उपचार या विकास कार्य पर 50 प्रतिशत, उत्पादन प्रणाली पर 13 प्रतिशत, गरीब परिवारों एवं भूमिहीन व्यक्तियों की आजीविका पर दस प्रतिशत एवं सामुदायिक सहभागिता पर पांच प्रतिशत राशि व्यय करने का प्रावधान है। इस योजना में तालाब एवं वृक्षारोपण, चारागाह, कृषि एवं पशुधन के कार्यक्रम भी किए जाते हैं। पर गरीबों के हित की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले लोग इन योजनाओं को ठंडे बस्ते में डालकर, गरीबी के लिए केंद्र सरकार को कोसते रहते हैं।

? विवेकानंद