संस्करण: 13 फरवरी- 2012

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT


भाजपा आंतरिक फूट और

भ्रष्टाचार से परेशान

           भारतीय जनता पार्टी हमेशा यह दावा करती है कि वह पार्टी विथ ए डिफरेन्स है। अभी कुछ ऐसी घटनायें घटी है जिनसे उसका दावा शतप्रतिशत सही नजर आता है। इन चार घटनाओं में से एक उत्तर प्रदेश में, दूसरी बिहार में तीसरी हिमाचल प्रदेश में व चौथी कर्नाटक में घटी है।

               उत्तर प्रदेश में जो घटना घटी उससे भारतीय जनता पार्टी का गंभीर नुकसान होता है। उत्तरप्रदेश में भाजपा के एक अत्यधिक चहेते नेता है जिनका नाम है योगी आदित्यनाथ। वे भाजपा के सांसद है। ठीक चुनावों के बीच वे भाजपा के नेतृत्व से इतने नाराज हो गये हैं कि ........

  ?  एल.एस.हरदेनिया


इमेज बिल्डिंग का ठेका

या इमेज ध्वस्त करने की सुपारी

        1990 में अंग्रेजी के एक वरिष्ठ पत्रकार ने एक कंपनी बना ली, 'इमेज बिल्डिंग फाउंडेशन' काम था किसी भी राजनेता की इमेज बनाना।वह बड़े बड़े नेताओं की इमेज सुधारने का बाकायदा ठेका लेते थे फिर प्रिंट तथा इलेक्ट्रा निक मीडिया की सहायता से उस राजनेता की अच्छाइयों का बखान करते।जनता की याददाश्त थोड़ी कमजोर होती है।  लोग अखबारों तथा टी0वी0 में नेता जी की बार बार फोटो देखते और उनकी महिमा का बखान सुनते तो उनका काला इतिहास भूल कर उन्हें  भविष्य  का मसीहा समझने लग जाते।  नेता जी के चुनाव जीतने में इस इमेज बिल्डिंग का बड़ा हाथ रहता। पत्रकार महोदय को भी इस कार्यक्रम से काफी फायदा हुआ।कई बड़े नेता उनके क्लायंट बन गये 

? मोकर्रम खान


कितने मुन्तज़िर प्रधानमंत्री

      भारतीय जनता पार्टी, हिन्दोस्तां की तमाम पार्टियों में अव्वल समझी जा सकती है, जिसमें अपने आप को हुकूमते हिन्दोस्तां की बागडोर सम्हालने के लिए सबसे काबिल समझनेवाले और उसके लिए इन्तजार में लगे/मुन्तज़िर प्रधानमंत्रियों की तादाद सबसे अधिक है। जानने योग्य है कि 2009 के चुनावों तक -जिसमें 2004 की तरह उन्हें दुबारा शिकस्त खानी पड़ी थी - आधिकारिक तौर पर लालकृष्ण आडवाणी का ही नाम आता था, मगर अब हालात बदल गए हैं।

? सुभाष गाताड़े


उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक राजनीति का

कोई भविष्य नहीं  है

          त्तर प्रदेश  विधान सभा चुनाव के पहले दौर के मतदान के बाद तस्वीर कुछ साफ होने लगी है । करीब एक महीने पहले तक माना जा रहा था कि चुनाव में मुकाबले चार मुख्य पार्टियों में  होंगें  लेकिन बीजेपी के चुनावी अभियान के कारण उसके पुराने वोटरों में वह  उत्साह नहीं पैदा हो सका जिसके लिए यह पार्टी जानी जाती है । इस एक राजनीतिक घटना के चलते उत्तार प्रदेश विधान सभा के चुनाव के तरीके, बदल गए हैं । जाहिर है इनका असर नतीजों पर भी होगा।

? शेष नारायण सिंह


राजनीति के बाजार में ब्राण्ड का महत्व

         मारे देश में राजनीतिक प्रक्रिया इन दिनों पाश्चात्य प्रजातांत्रिक तरीकों की नकल करती हुई प्रतीत होती है। उसने बाजार पूॅजीवादी प्रजातंत्रों द्वारा कुछ बड़े खिलाड़ियों के आर्थिक हितों के अनुरूप अपनाई गई नीतियों में से कुछ को अपना लिया है। यह भी देखा गया है कि सामाजिक विज्ञानों में अध्ययन विशेषकर राजनीतिक अर्थव्यवस्था में अध्ययन ऐसे राजनैतिक साहस का समर्थन कर रहा है।नागरिकों के मतदान करने के व्यवहार के संदर्भ में सार्वजनिक पसंद या सामाजिक पसंद के सिध्दान्त ने प्रजातंत्र के सिध्दान्त पर अपनी बढ़त बना ली है।

 ? के.एस.चलम


राजनीतिक नपुंसकता की उपज हैं चुनाव में हिजड़े

           403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए हो रहे चुनाव में लगभग 50 हिजड़े भी मैदान में हैं। हिजड़ा, किन्नर या तीसरा लिंग आदि के शाब्दिक विवेचन में पड़ने के बजाय यहॉ तात्पर्य उनसे है जो नाच-गा कर या फिर भिक्षावृत्ति कर जीवन यापन करते हैं और जिन्हें लैंगिक विकृति के कारण उक्त शब्दों से सम्बोधित किया जाता है। चुनाव में हिजड़ों का उतरना कोई असंवैधानिक कृत्य नहीं है। आम मतदाताओं की तरह ये भी मतदाता होते हैं और देश की संवैधानिक व्यवस्था में कोई भी पात्र मतदाता चुनाव लड़ सकता है। देश की शीर्ष अदालत ने भी हिजड़ों को एक सामान्य नागरिक ही माना है। इस नाते हिजड़े भी सभी नागरिक अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं। 

? सुनील अमर


अदालती फैसले के मायने

       भारतीय लोकतंत्र में न्यायिक सक्रियता पर अक्सर बहस होती रहती है। कभी न्यायपालिका खुद को सर्वोच्च साबित करने की कोशिश करती है,तो कभी संसद अपना वर्चस्व साबित करती है। न्यायपालिका जब राजनीति, खासकर सत्तारूढ़ दल पर प्रहार करती है,तो उसकी नीयत पर ही सवाल उठाए जाने लगते है। लेकिन जब यही न्यायपालिका राजनेताओं को निर्दोष साबित करती है,तब उनके सुर ही बदल जाते हैं। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से संबंधित मामले में केन्द्रीय जांच ब्यूरों की विशेष अदालत क फैसला गृहमंत्री पी.चिदंबरम के पक्ष में जाने के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। इस प्रकरण में तीस लोगों और पांच कंपनियों को आरोपी बनाया गया है।

? महेश बाग़ी


'झूठ' के नक्कारखाने में-

'सच' हो गया है तूती की आवाज

        

      'नक्कारखाने में तूती की आवाज' का जुमला वर्तमान राजनैतिक रौर में एकदम फिट बैठ रहा है। इस दौर में 'झूठ' जीवन के प्राय: प्रत्येक क्षेत्र में हावी हो चुका है। विशेषकर राजनीति में वास्तविकताएं और 'सच' तो खारिज ही हो चुके हैं। राजनैतिक प्रतिद्वंद्विताओं के चलते 'झूठ' को तो एक दूसरे पर वार करने का एक अचूक बाण मान लिया गया है। आरोप-प्रत्यारोपों के तीर किसी दल की कमान से निकले नहीं कि उस धनुष की टंकार की आवाज पर चहुओर हंगामा खड़ा हो जाता है। राजनैतिक दलों की कमान से निकले तीर का अनुसरण करते हुए महानगरों से लेकर गांव स्तर तक के बयानवीर अपने दल की आवाज में आवाज मिलाते हुए .....

 

? राजेन्द्र जोशी


बाबा के विरोध की हकीकत

अपना 'काला धन' बचाना चाहते हैं रामदेव

     किसी ने क्या खूब लिखा है 'सच्चाई छिप नहीं सकती बनावट के उसूलों से।' यानि कभी न कभी सामने आ ही जाएगी, जैसे बाबा रामदेव और अन्ना हजारे की असलियत सामने आ गई। हम किसी पार्टी के विरोध में नहीं होने की रट लगाने वाले बाबा रामदेव आखिर बोल ही गए कि भाजपा, माकपा को वोट दो और कांग्रेस का बहिष्कार करो। उधर संघ प्रमुख मोहनभागवत ने भी दिग्विजय सिंह के आरोपों पर मोहर लगा दी। उन्होंने साफ कहा कि अन्ना हजारे को यह स्वीकार करने पर आपत्ति है कि संघ के कार्यकर्ता अन्ना के अंदोलन में शामिल थे।

? विवेकानंद


घर की बहू या बहू का घर?

    हाल ही में एक राष्ट्रीय स्तर के हिन्दी अखबार ने एक अलग किस्म के मसले पर पाठकों से राय मांगी थी। विषय था आज के दौर में क्या कहना बेहतर समझा जा सकता है 'घर की बहू या बहू का घर'। इण्टरनेट एवं एसएमएस के इस जमाने में लोगों ने भी फटाफट अपनी राय भेजी जिसमें अधिकतम 'बहू का घर' माननेवालों की थी।

               समाज का एक हिस्सा बहू को घर और घर की वस्तुओं की तरह एक सजीव वस्तुही मानता है जो बात 'घर की बहू' वाली धारणा में परिलक्षित होती है। इसकी तुलना में देखें तो 'बहू का घर' माननेवालों की समझदारी कमसे कम उसके अपने स्वतंत्र अस्तित्व को स्वीकारनेवाली  मालूम पड़ती है।

 

? अंजलि सिन्हा


क्या संभव है सफेद शेरों की घर वापसी ?

     पांच दशक बाद दुर्लभ सफेद शेरों के घर वापसी की तैयारी लगभग पूरी है। इनके पुनर्वास के लिए करीब 50 करोड़ रूपए वन विभाग खर्च करने जा रहा है। इस हेतु सफेद और पीले शेरों के एक-एक जोड़े ओड़ीशा के नंदनकानन वन से यहां लाकर बसाए जाएंगे। इसका दायित्व नंदनकानन उद्यान को आकार देने वाले सेवानिवृत्त पीसीसीएफ सीपी पटनायक ने संभाला है। यहां अचरज इस बात पर है कि जब रीवा के जंगलों में पहली बार सफेद शेर देखा गया था, तब बिना किसी आधुनिक तकनीक और अतिरिक्त धन राशि खर्च किए रीवा के महाराजा गुलाब सिंह ने इनकी वंश वृध्दि कर ये शेर पूरे भारत और दुनिया के तमाम देशों में पहुंचा दिए थे। किंतु अब करोड़ों की परियोजना बनाई गई है।

? प्रमोद भार्गव


म.प्र. में मौत को गले लगाते किसान?

    र्ज से परेशान किसान ने पिया-कीटनाशक? सिंचाई व्यवस्था न होने से परेशान किसान ने की आत्महत्या का प्रयास किया? पाला और ओलों से बर्बाद हुई फसल के गम में किसान ने फाँसी लगाई? म.प्र.में ऐसी खबरें अब रोज की खबर बन रही है।कहीं खेत में खड़ी फसल बर्बाद होने पर तो कहीं कर्ज से परेशान किसान मौत को गले लगा रहें है। पिछले एक सप्ताह में प्रदेश के दमोह, छतरपुर, मण्डला और बैतूल जिलों में किसानों के द्वारा उठाए आत्मघाती कदम चर्चा में हैं। दमोह जिले के पथरिया के मोहनपुर ग्राम की एक महिला किसान ने पाला पड़ने से बर्बाद फसल के गम में कीटनाशक पीकर जान देने की कोशिश की।

 

? डॉ. सुनील शर्मा


क्या मध्यप्रदेश सरकार

सरस्वती को न्याय दिलायेगी ?

     ह आश्चर्य ही नहीं, अत्यंत दु:ख की बात है कि 39 वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश की राजधानी से सटे होशंगाबाद शहर की जिस बालिका ने अपनी जान पर खेलकर 150लोगों की जान बचायी और तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने जिसे दिल्ली आमन्त्रित कर वीरता का पदक देकर सम्मानित ही नहीं किया वरन् पुरस्कार स्वरूप दस एकड़ जमीन, आजीवन मुफ्त रेल यात्रा, पेंशन और  रहने के लिए शहर में मकान उपलब्ध कराने के आदेश दिये, उसे आज तक न तो ज़मीन मिली है और न ही मकान।

? डॉ. गीता गुप्त


  13 फरवरी- 2012

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved