संस्करण: 13 फरवरी- 2012

भाजपा आंतरिक फूट और

भ्रष्टाचार से परेशान

?      एल.एस.हरदेनिया

               भारतीय जनता पार्टी हमेशा यह दावा करती है कि वह पार्टी विथ ए डिफरेन्स है। अभी कुछ ऐसी घटनायें घटी है जिनसे उसका दावा शतप्रतिशत सही नजर आता है। इन चार घटनाओं में से एक उत्तर प्रदेश में, दूसरी बिहार में तीसरी हिमाचल प्रदेश में व चौथी कर्नाटक में घटी है।

               उत्तर प्रदेश में जो घटना घटी उससे भारतीय जनता पार्टी का गंभीर नुकसान होता है। उत्तरप्रदेश में भाजपा के एक अत्यधिक चहेते नेता है जिनका नाम है योगी आदित्यनाथ। वे भाजपा के सांसद है। ठीक चुनावों के बीच वे भाजपा के नेतृत्व से इतने नाराज हो गये हैं कि वे खुले आम भाजपा के अधिकृत उम्मीदवारों के विरूध्द प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने अपने प्रचार कार्य के लिए एक हेलीकाप्टर किराये पर ले रखा है। उन्होंने अपने प्रभाव क्षेत्र में अनेक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भाजपा के उम्मीदवारों की नैय्या डगमगा रही है। इन उम्मीदवारों में भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश के अधयक्ष सूर्य प्रताप शाही भी शामिल है। शाही उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के पाथरदेवा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने इनके विरूध्द में अपने एक प्रमुख समर्थक को मैदान में उतारा है। योगी आदित्यनाथ ने एक स्वतंत्र संस्था बनाई है जिसका नाम है हिन्दू युवा वाहिनी। इसी हिन्दू युवा वाहिनी के एक लोकप्रिय कार्यकर्ता राणा प्रताप को शाही के विरूध्द खड़ा किया है। राणा प्रताप की उम्मीदवारी को लेकर उत्तर प्रदेश की भाजपा भारी चिंतित है। इसी तरह पूर्वी उत्तर प्रदेश के अनेक नेता आदित्यनाथ और उनकी हिन्दू युवा वाहिनी की चुनौती को गंभीरता से ले रहे हैं। यह इसलिए हो रहा है क्योंकि इस क्षेत्र में भाजपा काफी हद तक आदित्यनाथ के प्रभाव पर निर्भर थी। आदित्यनाथ उन लोगों में से हैं जो इस क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव फैलाते रहते हैं। इसका काफी लाभ भाजपा को मिलता रहा है।

                योगी आदित्यनाथ भाजपा से इसलिए नाराज है क्योंकि पार्टी नेतृत्व ने उम्मीदवारों के चयन में उनकी बात नहीं मानी। उनके भाजपा विरोधी रवैये के बारे में पूछे जाने पर योगी ने संवाददाताओं को बताया कि''वे उन सभी उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे जो ईमानदार हैं और हिन्दुत्व के विचार और हितों तथा देश के प्रति समर्पित है। जो अच्छा करेगा वह पुण्य का भागी होगा और जो बुरा करेगा वह पाप का।'' उन्होंने यह भी कहा कि मैंने पार्टी को बार-बार स्पष्ट रूप से बता दिया है कि वे पार्टी में किसी भी पद के आकांक्षी नहीं हैं। वैसे यह समझा जाता है कि वे कुछ ऐसे भाजपा नेताओं से खफा हैं जो उनके प्रभाव को कम करने में लगे रहते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या वे उत्तरी उत्तर प्रदेश में भाजपा द्वारा चुने गये उम्मीदवारों से संतुष्ट है उन्होंने पत्रकारों को बताया कि पार्टी नेताओं ने उम्मीदवारों के चयन के बारे में मुझसे बात करने की कोशिश की थी परंतु मैंने मना कर दिया। हाँ, मैंने कुछ सुझाव अवश्य दिये थे परंतु यह कहना गलत है कि मैंने उम्मीदवारों की सूची दी थी। मैंने निर्णय उन पर छोड़ दिया था और मैंने किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया। आदित्यनाथ कुछ भी कहे परंतु यह वास्तविकता है कि भाजपा का नेतृत्व उनकी उपेक्षा कर रहा था। अभी कुछ दिन पूर्व भाजपा के पूर्व अधयक्ष एवं उत्तर प्रदेश के प्रमुख नेता राजनाथ सिंह जब गोरखपुर आये थे तब आदित्यनाथ को उनके कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं किया गया था।

                 भाजपा को उत्तर प्रदेश से ज्यादा गंभीर समस्या का सामना हिमाचल प्रदेश में करना पड़ रहा है। वहां पार्टी के अनेक प्रभावशाली नेताओं ने एक अलग पार्टी का गठन कर दिया है। इस नवगठित पार्टी का नाम ''हिमाचल लोकहित पार्टी'' रखा गया है। इस पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष है हिमाचल भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष महेश्वर सिंह। नई पार्टी के प्रवक्ता टी.के.ठाकुर ने कहा है कि नई पार्टी के अन्य पदाधिकारी शीघ्र चुने जायेंगे। सिंह ने कहा कि उन्होंने भारी दु:खी मन से भाजपा को छोड़ा है। बड़ी संख्या में जिन लोगों ने भाजपा से त्यागपत्र दिया है उन्होंने हिमाचल की भाजपा सरकार के विरूध्द भ्रष्टाचार के अनेक गंभीर आरोप लगाये हैं। पर्यवेक्षकों की मान्यता है कि नई पार्टी भाजपा के लिए गंभीर चुनौती सिध्द होगी। अभी तक हिमाचल प्रदेश में दो ही प्रमुख पार्टियां है भाजपा और कांग्रेस। नई पार्टी के गठन से हिमाचल प्रदेश के मतदाताओं को तीसरा विकल्प मिलेगा जिसके अनेक दूरगामी परिणाम होंगे। नई पार्टी के नेताओं ने कहा कि भविष्य में अन्य पार्टियों, सेक्यूलर पार्टियों समेत हाथ मिलाकर चलने में उन्हें संकोच नहीं होगा। यदि ऐसा होता है तो इससे हिमाचल प्रदेश का राजनीतिक संतुलन गडबडा जाएगा। सिंह, जो भाजपा के सांसद रह चुके हैं, का कहना है कि हिमाचल की भाजपा सरकार कुछ भ्रष्ट मंत्री चला रहे हैं जिनका एक मात्र उद्देश्य संपत्ति अर्जित करना है। नई पार्टी के गठन के पूर्व सिंह ने एक भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा भी बनाया था। इस मोर्चे के माध्यम से उन्होंने हिमाचल प्रदेश की सरकार के भ्रष्टाचार के कारनामों का पर्दाफाश किया था। सिंह के अलावा भाजपा से जिन अन्य वरिष्ठ नेताओं ने त्यागपत्र दिया है उनमें हिमाचल प्रदेश के भूतपूर्व स्पीकर और शिक्षा मंत्री विधायक शास्त्री समेत कुछ विधायक भी शामिल है। जिन भाजपा नेताओं ने अपनी पार्टी से नाता तोड़ा उन्हें हिमाचल प्रदेश के दिग्गज नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री शांताकुमार का आशीर्वाद प्राप्त है। शिमला में इस बात कि संभावना व्यक्त की जा रही है कि कुछ और विधायक भाजपा से अपना नाता तोडेंगे।

                   इन दो घटनाओं से भी ज्यादा गंभीर घटना बिहार में घटी है जहां एक भाजपा विधायक की संपूर्ण संपत्ति पर सरकार ने कब्जा कर लिया है। इन विधायक, जिनका नाम सेनेलाल है, पर आरोप है कि उन्होंने अवैध तरीकों से करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है। यहां उल्लेखनीय है कि भाजपा बिहार की गठबंधन सरकार का हिस्सा है। बिहार के सतर्कता विभाग ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सोनेलाल की संपत्ति को राजसात करने की अनुमति मांगी है। सर्तकता विभाग का आरोप है कि सोनेलाल ने ज्ञात स्त्रोतों से ज्यादा संपत्ति अर्जित की है। पूर्व में सोनेलाल बिहार के आबकारी विभाग में डिप्टी कमिश्नर थे। जब सोनेलाल शासकीय सेवा में थे उसी समय सर्तकता विभाग ने उनके निवास और कार्यालय पर छापा डाला था। यह छापा सन् 1997 में डाला गया था। उस समय ही यह स्पष्ट हो गया था कि सोनेलाल एक भ्रष्ट अधिकारी है। इसके बावजूद भाजपा ने सोनेलाल को पार्टी में प्रवेश दिया। इससे यह भी स्पष्ट हो गया कि भाजपा को भ्रष्ट लोगों को अपनी पार्टी में प्रवेश देने से किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होती है। अभी हाल में भाजपा ने भ्रष्टाचार के आरोप से घिरे मायावती सरकार के एक मंत्री को ठीक चुनावों के बीच प्रवेश दिया था। उत्तर प्रदेश के ये पूर्व मंत्री है बाबूलाल कुशवाह। मायावती ने कुशवाह को भ्रष्टाचार के आरोपों के चलित मंत्रिपरिषद से निष्कासित किया था। इसके पूर्व भाजपा ने हिमाचल प्रदेश के पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुखराम को अपनी पार्टी में स्थान दिया था और उन्हें हिमाचल प्रदेश की भाजपाई मंत्रिपरिषद में उप-मुख्यमंत्री के पद से नवाजा था। सुखराम को अभी हाल में भ्रष्ट आचरण के आरोप में सजा हो गई है। सुखराम जब केन्द्रीय मंत्री थे तब उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। आरोपों के चलते भाजपा ने सुखराम से केन्द्रीय मंत्री से त्यागपत्र देने की मांग की थी। अपनी मांग को मनवाने के लिए भाजपा ने अनेक दिनों तक लोकसभा की कार्यवाही नहीं चलने दी। बाद में उन्हीं सुखराम को भाजपा नेतृत्व ने अपनी पार्टी में स्थान दिया। दुहरे चरित्र का इससे ज्यादा बड़ा उदाहरण शायद ही कोई हो। चूँकि सोनेलाल पर उस समय ही आरोप लग चुके जब वे सरकारी सेवा में थे। उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद उन्हें भाजपा में शामिल करना यह सिध्द करता है कि भाजपा का भ्रष्टाचार विरोधा मात्र रस्म अदायगी है। शायद भाजपा की नजर में कोई व्यक्ति उसी समय भ्रष्ट रहता है जब तक वह उनकी पार्टी का सदस्य नहीं बनता है। शायद भाजपा की सोच है कि यदि कोई भ्रष्ट व्यक्ति भाजपा रूपी गंगा में डुबकी लगा लेता है तो उसके सारे पाप समाप्त हो जाते हैं। यदि सोनेलाल की संपत्ति जप्त होती है तो यह देश का अपने प्रकार का पहला मामला होगा। इसके साथ ही यह मामला इसलिए भी पहला होगा क्योंकि इसके पूर्व शायद ही किसी सांसद विधायक या राजनेता की संपत्ति को जप्त किया गया होगा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बधाई के पात्र है जिन्होंने भ्रष्टाचारी लोगों के विरूध्द इतना सख्त कदम उठाया है। इसके पूर्व बिहार के पूर्व पुलिस प्रमुख नारायण मिश्र और उनकी पत्नी की संपत्ति राजसात किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। बिहार की सर्तकता की विशेष अदालत ने नारायण मिश्र और उनकी पत्नी की संपत्ति के राजसात करने के आदेश दिये थे। मिश्र के अतिरिक्त बिहार के एक पूर्व आई.ए.एस.अधिकारी शिवशंकर वर्मा एक क्लर्क की संपत्ति भी राज्य सरकार ने कब्जे में ले ली थी। इसके साथ ही बिहार के कुछ और अधिकारियों के विरूध्द इसी तरह की कार्यवाही अदालतों में जारी है। 

                चौथी घटना जो हाल में कर्नाटक में घटी है, उसका भले ही सीधा संबंध राजनीति से न हो परंतु उसने यह दिखाया है कि भाजपा नेता नैतिक दृष्टि से भी पतन की पराकाष्ठा पर पहुंच चुके हैं। कर्नाटक विधानसभा में दो भाजपाई मंत्री मोबाईल पर अश्लील फिल्म देख रहे थे जिसकी रिर्काडिंग एक निजी टी वी चैनल के कैमरामेन ने कर ली और इसका प्रसारण सारे देश ने देखा। भाजपा,जो सामान्यत:अपने भ्रष्ट नेताओं का बेशर्मी की हद तक समर्थन करती है,को तक इस घटना के अगले दिन ही इन मंत्रियों का इस्तीफा लेना पड़ा। स्मरणीय है कि इसी राज्य में भाजपा के पूर्व  मुख्यमंत्री येदियुरप्पा सहित अनेक मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग चुके हैं और येदियुरप्पा व रेड्डी बंधुओं सहित अनेक मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा है।

                 इस तरह भाजपा आर्थिक और नैतिक भ्रष्टाचार में गले-गले तक डूबी हुई है और अब आपसी मतभेद, जो खुलकर सामने आ चुके हैं, उसे और अधिाक नुकसान पहुंचा रहे हैं। भाजपा सचमुच पार्टी विथ ए डिफरेन्स है।

? एल.एस.हरदेनिया