संस्करण:  13 दिसम्बर-2010

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT


विस्फोटकों के गुरूकुल ?


 स्वामी आनन्द मित्रानन्द नाम से आप परिचित हैं ? या मुमकिन है स्वामी अमरानन्द नाम आप ने सुना हो ! नाम से शायद यही ध्वनि निकलती है गोया किसी मठ से सम्बधित साधु हों >सुभाष गाताड़े


एक विधा की लोकप्रियता से देश चलाने की सामर्थ्य नहीं आती


 किसी समय दूरदर्शन के लोकप्रिय धारावाहिक तमस के प्रसारण के प्रारम्भ में एक नीति वाक्य आता था जिसमें कहा गया था कि ''जो लोग इतिहास से सबक नहीं सीखते वे उसे दुहराने के लिए अभिशप्त होते हैं''। >वीरेंद्र जैन


नेहरु और सांप्रदायिकता

 

  वाहरलाल नेहरू के विचार उनकी मृत्यु के 56 साल बाद आज भी प्रासंगिक हैं। जिन भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के नेताओं ने सांप्रदायिक समस्या की एक विशिष्ट समझ विकसित की उनमें जवाहरलाल नेहरू प्रमुख थे। >सुचेता महाजन


जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ों-स्तर-दर-स्तर निर्देश जारी करो ! सरकारी तंत्र का लाजवाब मंत
 

 

  रकारें चल रही हैं ! कैसे चल रही हैं कहां से चल रही है और कौन चल रहा है ? सबके अपने-अपने सवाल हैं और सबके पास अपने-अपने उत्तर हैं।>राजेंद्र जोशी


गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक का दावा नरेन्द्र मोदी निर्दोष नहीं

 

   गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर विवादों में उलझ गये हैं। पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की सन् 2002 के दंगों के दौरान अहमदाबाद में उन्हीं के घर पर हत्या कर दी गई थी।>एल.एस.हरदेनिया


बदहाल मध्यप्रदेश, मालामाल नौकरशाह


 मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश को प्रगति की राह पर दौड़ाना चाहते हैं, लेकिन उनके राज में प्रदेश लगातार रसातल में जा रहा है।>महेश बाग़ी


आश्रयस्थलों की जिम्मेदारी

 

 विकसित से विकसित समाज में आश्रयस्थलों का निर्माण एक मजबूरी नहीं आवश्यकता होगी। सवाल यही तय करने का है कि उसका संचालन कौन करे ?>अंजलि सिन्हा


फोर्ब्स पत्रिका में दर्ज भारतीय ग्रामीण वैज्ञानिक

 

 भारत में सबसे ज्यादा बसने वाले ग्रामीण और अर्थ व्यवस्था के रीढ़ बने किसान वर्तमान हालातों में मीडिया से भी कमोबेश बाहर हैं और संसद से भी ?>सुनील अमर


निष्पक्ष न्याय की राह में बाधक 'अंकल जज' सिंड्रोम

 

 न्यायिक व्यवस्था में गुजिश्ता कुछ बरसों से बढ़ता भ्रष्टाचार हमारी चिंताओं का सबब है। अभी तलक बेदाग रही न्यायपालिका पर भी अब भ्रष्टाचार के इल्जाम लगने लगे हैं।>जाहिद खान


भयादोहन करती विज्ञापनों की भाषा
 

 टी.वी.चैनलों पर इन दिनों एक विज्ञापन आता है, जिसमें साफ,सुन्दर और मजबूत दाँतों वाली एक युवा लड़की को एक टूथ पेस्ट कम्पनी का सेल्समैन बताता है कि उसके दाँतों में बहुत ज्यादा कीटाणु हैं>सुनील अमर


स्वयंसेवी संगठनों से कार्यक्रम संचालन में शुद्वीकरण जरूरी

  देश का दिग्गज कारोबारी समूह विप्रो अब प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखेगा। यह समूह अपनी गैर लाभकारी संस्था अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन के जरिए हर जिले में प्राथमिक शिक्षा मुहैया कराने की योजना बना रहा है।>डॉ. सुनील शर्मा


बाघ संरक्षण की एक कोशिश ओर
 

 लगभग 100 वर्ष पूर्व एक लाख संख्या वाले आज के दुर्लभजीव बाघ की वर्तमान संख्या विश्वभर में अब केवल 32 सौ के आसपास मानी गई है।>शब्बीर कादरी


13 दिसम्बर-2010 

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved