संस्करण: 13अक्टूबर-2008

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'अच्छे संदिग्ध' की तलाश

सरहदों के नाम पर आखिर लोग इस कदर एक दूसरे के खून के प्यासे क्यों हो जाते हैं ? यह सवाल अपने अपने दौर के मनीषियों को हमेशा मथता रहा है। इराक पर अमेरिकी आक्रमण के बाद खुद अमेरिका के अन्दर युध्दविरोधी आन्दोलन के प्रवक्ताओं ने इससे जूझने की > सुभाष गाताड़े


मध्यप्रदेश में कुपोषण से मौतें

ध्यप्रदेश के लिए यह शर्मनाक सच्चाई है कि 21 वीं सदी में भी इस राज्य में भूख और कुपोषण से मौते हो रही है और जनता की चुनी हुई सरकार इन मौतों को लेकर गंभीर नहीं है।अब तक राज्य में 160 से अधिक बच्चों की मौते कुपोषण से हो चुकी हैं। यह संख्या तो ज्ञात मौतों > विनय दीक्षित


रोटी को खतरे में डालता आर्थिक विकास

हाल ही में कथित विकास और व्यवस्था से जुड़ी तीन ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जिसके गर्भ से उपजा आक्रोश बढ़ते रोटी के संकट की भयावहता को प्रकट करता है। बहुराष्ट्रीय कंपनी सार्लिकॉ-ग्रेजियानो ट्रांसमिशन इंडिया विदेशी कंपनी के कार्यकारी अधिकारी  >प्रमोद भार्गव


  

फिर शिकार हुआ ईसाई समुदाय

साम्प्रदायिक घृणा इंसान को किस हद तक शैतान बना देती है उसका जीता जागता उदाहरण उड़ीसा है जहां पिछले पचास दिनों से हिंसक घटनाओं का दौर थमने का नाम भी नहीं ले रहा है। वैसे तो इन पचास दिनों में अनेक हिंसक घटनायें हुई हैं, परन्तु उन सभी घटनाओं में दो अत्यधिक दिल दहलाने वाली हैं, और जो इस बात को उजागर  >एल.एस.हरदेनिया


राजनीति के रंगमंच पर नाटक खेलते राजनेता

राजनीति,राजनीति और राजनीति। जिधर देखो उधर राजनीति ही राजनीति। भारत में आज़ादी के बाद उदित हुए राजनैतिक दलों के निरंतर बढ़ते जा रहे आंकड़ों को देखकर तो अब लगने लगा है, जितने दल, उससे कहीं अधिक नायक,खलनायक और गेस्ट आर्टिस्टों  >राजेन्द्र जोशी


नानावटी आयोग का आधा सच

गोधरा कांड की जांच कर रहे नानावटी आयोग ने पहले नरेन्द्र मोदी को क्लीन चिट दे दी और जब इस पर तीव्र प्रतिक्रिया हुई तो आयोग की ओर से अब कहा जा रहा है कि वह तो आधी रिपोर्ट थी और आधी रिपोर्ट अब > महेश बाग़ी


परमाणु ऊर्जा और सामाजिक विकास

ऊर्जा एवं मानव विकास में सीधा संबंध होता है। हमारे देश में बिजली उत्पादन की वर्तमान स्थापित क्षमता करीब 86 हजार मेगावाट है। आजादी के बाद इसमें 50 गुना बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन हमारी प्रति व्यक्ति खपत केवल 400 किलोवाट प्रतिवर्ष है जो कि 2400 किलोवाट प्रतिवर्ष के  > स्वाति शर्मा


पाक : दिल में कुछ जुबां पर कुछ

मिस्टर 10 पर्सेन्ट से राष्ट्रपति के ओहदे तक पहुंचे आसिफ अली जरदारी भारत के साथ रिश्तों की गर्माहट को और बढ़ाना चाहते हैं. बीते दिनों संयुक्त राष्ट्र महासभा में जरदारी ने गर्मजोशी से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह >नीरज नैयर


सेमेस्टर पध्दति बनाम गुणवत्ता की गारण्टी ?

अख़बार ख़बर उगल रहे हैं कि मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सेमेस्टर पध्दति लागू करने वाला अग्रणी प्रदेश बन गया है और यहाँ उक्त पध्दति पूर्णत: सफल है। जबकि अभी प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा तक नहीं हुई है।  > डॉ. गीता गुप्त


खत्म होती पक्षियों की प्रजातियां

अभी हाल ही में खत्म हुए श्राध्द पक्ष में लोगों को कौए नहीं मिले। गया और इलाहाबाद में श्राध्द पक्ष के संस्कार के लिए कौओं की कमी के कारण आटे के कौए बनाकर धार्मिक कार्यों को पूरा किया गया। वास्तव में कौये > डॉ. सुनील शर्मा


न्यायमूर्ति हाजिर हो.....

न्याय और अन्याय के बीच अधिक अंतर नहीं होता। जिसे न्याय मिलता है, उसका प्रतिद्वंद्वी यही मानता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है। न्यायाधीश का निर्णय कभी निष्पक्ष नहीं हो सकता। जिसे न्याय मिला,  > डॉ. महेश परिमल


टाटा की टाटा- पूँजीपति और जनता के बीच टकराव कैसे सुलझे जिससे सबकी जीत हो !

टाटा मोटर्स के अध्यक्ष रतन टाटा ने अंतत: सिंगूर को टाटा कह ही दिया है। अब वहाँ से एक लाख रु. की नैनों कार का कारखाना गुजरात राज्य में जायेगा। > डॉ. राजश्री रावत ''राज''


13अक्टूबर2008

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