संस्करण: 13अप्रेल-2009

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गरीबी से आजादी पाना सबका
अधिकार है : राहुल गाँधी
    आज का भारत एक युवा प्रधान देश है। इसमें युवाओं की संख्या अधिक है और इसलिए युवा पीढी के नेताओं की सोच क्या और वेह देश की समस्याओं का किस   >राहुल गांधी


क्या वरूण की तुलना
जे.पी. और अटलजी से करना जायज है ?
       सत्ता की लालच ने राजनेताओं की सोच को कितना संकीर्ण बना दिया है, इसका उदाहरण भाजपा द्वारा पीलीभीत से घोषित किए गये लोकसभा प्रत्याशी वरूण गाँधी के मामले में स्पष्ट  >राजेंद्र जोशी


तीसरा मोर्चा एक सच्चाई है
आडवाणीजी

       गत दिनों अपने चुनावी दौरों में भाजपा के प्रधानमंत्री पद पत्याश लालकृष्ण आडवाण ने तसरे मोर्चे क बढत संभावनाओं से घबरा कर उसे नकारने की जोरदार मुहिम पारंभ की है।वे कह रहे हैं कि तीसरा मोर्चा एक भ्रम है >वीरेंद्र जैन


कर्नाटक के अलावा शेष
दक्षिण भारत में भाजपा का नगण्य अस्तित्व

   मैं तमिलनाडू के प्रमुख धार्मिक एवं औद्योगिक नगर मदुरै के रेल्वे स्टेशन के विशाल कंपाउंड में आटोरिक्शा चालकों के बीच जाकर जानना चाहता हूं कि आगामी लोकसभा चुनाव में तमिलनाडू में कौन सी पार्टी कितनी >एल.एस.हरदेनिया


कौन लेगा किसानों की ख़ैर खबर

   मधयप्रदेश में किसानों की हालत दिनों दिन खस्ता होती जा रही है। देश की आज़ादी के बाद यह पहला अवसर है, जब किसानों को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अब तक प्रदेश में आठ किसान  >महेश बाग़ी


साबरमती जेल में

कैदी भूख हड़ताल पर क्यों ?

    ख़बर पहुंचने तक साबरमती जेल में 250 से अधिक कैदियों द्वारा की गयी भूख हड़ताल समाप्त हुई होगी और उम्मीद है कि 2002 के दंगों के दरमियान पोटा के तहत या पिछले साल बम धामाकों के सिलसिले में गिरफ्तार  >सुभाष गाताड़े


विश्व पशु संरक्षण माह - अप्रैल
पशु संरक्षण हमारी परम्परा बने

      वैसे तो गुजरात और राजस्थान पशुपालन एवं संरक्षण के लिए प्रसिद्व है , इन राज्यों में दुग्धा उत्पादन के साथ-साथ वृध्द एव असहाय पशुओं कों सहारा देने के लिए बड़ी-बड़ी गौशालाओं के निर्माण की परम्परा है।इन  >डॉ.सुनील शर्मा


संरक्षणवादी नीति छोड़े बिना पटरी पर आना कठिन
       पूरी दुनिया को वित्तीय सुनामी से उबारने के लिए जी-20 देशों की आयोजित बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णयों से फिर उम्मीद जगीहै कि मंदी का तेज घूमता पहिया कुछ तक निकट भविष्य में थमेगा। आई.एम.एफ. समेत कई  >अंजनी कुमार झा


लोक लुभावन नारा और सस्ता अनाज

       ताजा घोषणा पत्र के साथ कांग्रेस कथित आर्थिक सुधारों से मुंह मोड़ती दिखाई दे रही है। दो दशक पहले भारत की जो अर्थव्यवस्था अंतर्मुखी थी उसे उदारवादी नीतियों के तहत बहिर्मुखी करने के तमाम >प्रमोद भार्गव


लोकसभा चुनाव पर मंदी की मार नहीं
विज्ञापन पर करोड़ों खर्च कर रही हैं पार्टियां
       वैश्विक मंदी से पूरा विश्व बौखलाया हुआ है। प्रत्येक दिन हजारों लोगों को नौकारी से हाथ धोना पड़ रहा है। बडी-बड़ी कंपनियो के दम फूलने लगे हैं। कई कंपनियां दिवालिया हो गई हैं। अमरीका समेत कई  >एम.के.सिंह

22 अप्रैल-विश्व पृथ्वी दिवस पर विशेष
''कूड़े के ढेर में बदलती धरती''

        आज हमारी धारती अपना प्राकृतिक रूप खोती जा रही है। जहाँ देखों वहाँ कूड़े के ढेर व बेतरतीब फैले कचरे ने इसके सौंदर्य को नष्ट कर दिया है। अब समय आ गया है जब हमें अपने वातावरण की स्वच्छता >स्वाति शर्मा

हमारे देश में सूचना का अधिकार
      हमारा भारत देश संसार के बड़े लोकतंत्रों में से एक है। इसकी अपनी धाक है, जो धीरे-धीरे जमती जा रही है। आख़िर क्यों न जमें, इसे संसार का गुरू जो बनना है। ऐसा जब भी हो अब शुरूआत तो हो ही चुकी है। >डॉ.देवप्रकाश खन्ना
 



 13अप्रेल 2009

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