संस्करण: 12  सितम्बर- 2011

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टीम अन्ना के लिए कुछ यक्ष प्रश्न

            लोकपाल के बारे में पिछले कई महीनों से चल रहे विचार-विमर्श से यह सुस्पष्ट हो जाता है कि अन्ना की टीम जॉर्ज बर्नार्ड शॉ के इस सुविचार का अक्षरश: पालन करती है: ''यदि आपने मुझे कोई काम करने से रोका तो आप अनैतिक और विघ्नकारी हैं,परंतु यदि मैंने आपको रोका तो वह कानून व्यवस्था और सदाचरण है''उन्हें पूरा विश्वास है कि उनके ही शब्द भ्रष्टाचार निरोध के लिए अंतिम हैं हालांकि टीम अन्ना और इंदिरा गांधी के जमाने की कांग्रेस अलौकिक रूप से एक-सी प्रतीत होती है

  ? अब्दुल खालिक


अन्ना के लिए टू चीयर्स

और, तीसरा मैंने क्यों रोका

     हाराष्ट्र के एक छोटे से गांव - रालेगांव सिध्दि से आए हुए एक व्यक्ति ने समूचे राष्ट्र का ध्यान कुछ ऐसा खींचा जो हाल के समय में अभी तक नहीं हुआ था और, अब तो यह नाम अन्ना - पड़ोसी देशों में भी दैदीप्यमान होने लगा है भारत के सदा सर्वदा विरोधी देशों - पाकिस्तान और चीन में अन्ना को जनता की आवाज और शक्ति के प्रतीक रूप में देखा जा रहा है अन्ना ने जनता के हृदय को सचमुच छुआ है और लोग उनमें आशा की किरणें देख रहे हैं

? विजय दर्डा


मैं अन्ना होना तो नही चाहूॅगी।

(उनके तरीके गाँधीवादी हो सकते है किन्तु मांगे निश्चित रूप से नही)

      म टेलीविजन पर जो कुछ देख रहे है यदि वह सचमुच एक क्रान्ति है, तो यह क्रान्ति हाल ही में हुई अबोधगम्य और घबराहटजनक क्रान्तियों में से एक होगी। अब जनलोकपाल बिल के बारे में आपके मन में जो भी प्रश्न हो, यहॉ उत्तर  के वे विकल्प मौजूद है जिन्ही में से आप एक चुन सकते है-- (अ) वन्दे मातरम् (ब) भारत माता की जय (स) भारत अन्ना है और अन्ना ही भारत है (द) जय हिन्द।

? अरून्धती राय


राजनेताओं के संकट मोचक अन्ना हजारे

 कहीं आंदोलन प्रायोजित तो नहीं था

    न्ना हजारे किसके आदमी हैं, उनके आंदोलन के प्रायोजक कौन हैं, किसने उनके पूरे कार्यक्रम का खर्च उठाया, यह सारे प्रश्न पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय स्तर पर जिज्ञासा का विषय बने हुये हैं  कांग्रेस के दिग्गज दिग्गी राजा ने अन्ना पर आरोप लगाया है कि वे आरएसएस के मुखौटे हैं

? मोकर्रम खान


जाँच से पहले
संदेही की

राजनीतिक पक्षधरता के खतरे 

    भाजपा और गैर भाजपा राजनीति में एक अंतर यह भी है कि अपनी पार्टी के किसी राजनेता की अनियमितताओं का खुलासा होने पर भाजपा के नेता अपने कुतर्कों से उसका बचाव करने लगते हैं,और कहीं न कहीं उसमें खुद भी संलग्न नजर आने लगते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भाजपा की राजनीति भावनाओं और छवियों के सहारे चुनाव जीतने की राजनीति है। वे न तो कठोर यथार्थ को सहन कर पाते हैं और न ही अपने उपयोग के लोगों की छवि पर आये छींटों को ही सहन कर पाते हैं।

 

? वीरेन्द्र जैन


संघ परिवार की प्रतिष्ठा

पर पुन: प्रश्नचिन्ह

     शेहला मसूद की निर्मम हत्या को हुए 20 दिन से ज्यादा गुजर चुके हैं परंतु अभी भी उनकी हत्या से संबंधित तथ्य रहस्य के गर्भ में हैं। एक लबें इंतजार के बाद इस प्रकरण की जांच सी.बी.आई. को सौंप दी गई है, परंतु सी.बी.आई. को जांच सौंपने में काफी देरी हुई जिसका जांच पर निश्चित ही विपरीत प्रभाव पड़ेगा।  इस संबंध में यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि घटना के एक दो दिन बाद ही मध्यप्रदेश सरकार की ओर से यह घोषणा कर दी गई कि वह पूरे मामले को सी.बी.आई. को सौंपने को तैयार है।

 

? एल.एस.हरदेनिया


अनाम कब्रें, गुमसूम लोग !

       री के शाहकोट की निवासी सरवा बेगम अब सत्तर साल की और उनके पति नवाब खान 75 साल के हो चुके हैं। मगर अभी भी जबभी परिवार में कोई समारोह होता है तो वह खाना रख कर एक प्लेट अलग निकाल कर रखती हैं। दरअसल उन्हें अभी भी इन्तज़ार है कि 16 साल पहले उरी के शाहकोट से अचानक गायब हुआ उनका बेटा जलील कभी भी आकर अपना खाना मांग सकता है।

? सुभाष गाताड़े


एनजीओ और कार्पोरेट जगत भी जिम्मेदार हैं-

भ्रष्टाचार के लिए

    न्ना हजारे अनशन प्रकरण में उनके मंच से भाशण देने वाले कुछ लोगों के प्रति संसद के कुछ सदस्य खासे खफ़ा हैं। वक्ताओं ने कथित तौर पर उन्हें अनपढ़ और गँवार जैसे शब्दों से सम्बोधित किया था। कई संसद सदस्यों ने इन वक्ताओं के विरुध्द विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी सदन में दिया है। सदस्यों ने इसे सदन की अवमानना मानते हुए प्रकरण विशेषाधिकार समिति को सौंप देने की मॉग की है। इनका कहना है कि सांसदों के अपमानित होने से संसद की गरिमा को भी क्षति पहुॅचती है।

? सुनील अमर


आखिर ये तो होना ही था

     हो गयी है पीर पर्वत सी - पिघलनी चाहिए। इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिये।

आज यह दीवार पर्दों की तरह हिलने लगी । शर्त लेकिन थी की यह बुनियाद हिलनी चाहिये ।

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाव में । हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिये ।

सिर्फ हंगामा करना मेरा मकसद नहीं । मेरी कोशिश है की यह सूरत बदलनी चाहिये ।

मेरे सीने में नहीं - तो तेरे सीने में सही ।   हो कही भी आग - लेकिन आग जलनी चाहिये ॥

? राजेन्द्र गोयनका


भ्रष्टाचार पर बीजेपी की दोमुंही नीति

   

      केन्द्र की यूपीए सरकार को भ्रष्टाचार पर बीते एक साल से संसद और संसद के बाहर लगातार घेरने वाली बीजेपी खुद भ्रष्टाचार मिटाने के लिए कितनी संजीदा है,इस बात का अहसास गुजरात में हाल ही में हुई लोकायुक्त नियुक्ति पर संसद के दोनों सदनों में उसके हंगामे से होता है। बीजेपी की मांग है कि गुजरात में लोकायुक्त की नियुक्त करने वाली राज्यपाल कमला बेनीपाल को सरकार वापिस बुलाए और उनके द्वारा जारी अधिसूचना को तत्काल रद्द करे।

 

? जाहिद खान



यह जरूरी नहीं कि जिसे आप महान मानें, मैं भी उसे महान समझू

     ह मुझपर किसी का दबाव तो नहीं है कि जिसे आप महान समझ रहे हैं मैं उसे भी महान मानूं! किसी को मानने का अधिकार हर व्यक्ति का अपना अधिकार है और यह आपका अधिकार। एक तो सबसे बड़ी मुश्किल है कि आप भी सभी पर वहीं चश्मा चाहते हैं जिस नम्बर का आप पहनते हैं। ऐसे लोग राजनीति प्रशासन,कला-साहित्य-संस्कृति या किसी भी क्षेत्र के हो सबके बारे में एक ही तरह ही की धारा बना सकते हैं। कम से कम यह बात दुनिया का हर शख्स तो नहीं मान सकता।

? राजेन्द्र जोशी



  12सितम्बर-2011

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