संस्करण: 12 नवम्बर-2012

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घुटन भरी भाजपा की हवेली से फूटती आवाजें

           लोकतंत्र में एक निश्चित अवि के बाद राजनीतिक दलों को जनता के पास समर्थन माँगने जाना पड़ता है, और यह काम करते समय वे अपनी उपलबियों के साथ साथ अपने विरोी दलों की कमियों को भी मतदाताओं के सामने रखते हैं ताकि उनकी कमीज ज्यादा उजली दिखे। यह काम चुनाव में उतरने वाले सभी राजनीतिक दल करते हैं जिसके परिणाम स्वरूप एक दूसरे पर कीचड़ फेंकने की होड़ में चुनाव का पूरा परिष्य किसी कस्बे की होली में बदल जाता रहा है। पिछले कुछ वर्षों से गठबन्न सरकारें बनने लगी हैं जिससे चुनाव कभी भी सम्भावित लगते हैं और यह होलिका उत्सव निरंतर चलने लगा है।

? वीरेन्द्र जैन


बच गए गडकरी

बेपर्दा हुआ चाल चरित्र और चेहरा

        मानदारी का ढिंढोरा पीटकर कांग्रेस को कोसने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के चाल चरित्र और चेहरे से पर्दा उठ गया है। पूर्ति में गड़बड़ झाले के आरोपों में घिरे भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी की जांच आरएसएस के ही एक आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ ने कर डाली और उन्हीं की जांच पर गडकरी को क्लीनचिट भी दे दी गई। हालांकि इसमें आश्चर्यजनक कुछ भी नहीं है, क्योंकि गडकरी चाहे घोटाला करें, चाहे स्वामी विवेकानंद जैसे आदर्श पुरुषों का अपमान करें कम से कम भाजपा की तो इतनी हैसियत नहीं थी उनका बाल भी बांका कर सकती। जब तक संघ नहीं चाहता गडकरी पर कोई भी आरोप लगे उन्हें पार्टी के मुखिया की कुर्सी से विदा नहीं किया जा सकता।

? विवेकानंद


हुकूमत समाजवादी, अमल सम्प्रदायवादी ?

   भी यह कहना मुश्किल है कि अपने प्रथम पृष्ठ पर 'हिन्दु-मुस्लिम दो भाई, हिन्दी-उर्दू दो बहने' लिखनेवाला फैजाबाद से प्रकाशित हिन्दी -उर्दू साप्ताहिक 'आप की ताकत' - जो साम्प्रदायिक सद्भाव की ख़बरों पर जोर देता था - यहां तक कि हर गणतंत्र दिवस पर इसके छोटेसे दफ्तर के सामने मानवश्रृंखला बनायी जाती थी, फिर कब शुरू होगा। दशहरा के दिन शहर को चपेट में लेनेवाले साम्प्रदायिक दावानल में शरारती तत्वों ने उसके दफ्तर में घुस कर भी तबाही मचायी, जब वह चौक में समुदायविशेष की दुकानों को चुन चुन कर आग के हवाले कर रहे थे।

? सुभाष गाताड़े


फ़ैज़ाबाद को जलाने की

साजिश किसकी ?  

            फैज़ाबाद देशद्रोहियों की साजिश का गंभीर शिकार होते-होते बचा। जो शहर वर्ष 1989 से लेकर वर्ष 1992 तक देश व समाज तोड़ने वालों के झॉसे में नहीं आया उसे एक बार फिर जलाने की कोशिश की गयी लेकिन यहाँ की जनता निश्चित ही बधाई की पात्र है जिसने हमेशा की तरह इस बार भी धैर्य का परिचय देकर असमाजिक तत्त्वों को मुॅहतोड़ जवाब दिया। बीते माह 25 अक्तूबर को दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान पूर्व नियोजित ढॅग़ से उपद्रव कर एक समुदाय की दुकानें जलायी गयीं। इनकी चपेट में आकर कहीं-कहीं दूसरे समुदाय की भी दुकानें जलीं। दंगाई कितने पूर्व नियोजित ढ़ॅग से काम कर रहे थे, इसका पता इसी से चलता है कि   

? अनुज शुक्ला


14 नवम्बर जयंती पर विशेष

नेहरू ही हैं आधुनिक भारत के निर्माता

       मारे देश के कुछ संगठन, विशेषकर जो संघ परिवार से जुड़े हैं, जब भी सरदार पटेल की चर्चा करते हैं तो उस समय वे पटेल के बारे में दो बातें अवश्य कहते हैं। पहली यह कि सरदार पटेल आज के भारत के निर्माता हैं और यह कि यदि कश्मीर की समस्या सुलझाने का उत्तरदायित्व सरदार पटेल को दिया जाता तो पूरे कश्मीर पर हमारा कब्जा होता। अभी हाल में सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर उनको याद करते हुये मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ये दोनों बातें दुहराई। संघ परिवार का हमेशा यह प्रयास रहता है कि

 ?   एल.एस.हरदेनिया


ज्यादा अक्ल प्रदर्शन से होता है अजीर्ण

कतिपय नेताओं को आ रही है खट्टी डकार

                  नेक क्षेत्रों में अक्सर ऐसा होता रहता है कि जितना बजट का एलोकेशन होता है, कहीं उससे ज्यादा ही खर्च हो जाया करता है। पूरी दुनिया आज इसी ढर्रे पर चल रही है कि जहां देखो वहीं लोग जरूरत से ज्यादा पूंजी निवेश कर देते हैं, इससे दीवाला तक निकल जाता है। यह तो हुई आर्थिक मामलों की स्थिति किंतु जिसे बुध्दि, विवेक था अक्ल कहा जाता है उसमें भी लोग ईश्वर द्वारा उन्हें आवंटित बुध्दि की लिमिट को क्रास करते हुए कुछ ज्यादा ही खर्च करने लग गये हैं।

? राजेन्द्र जोशी


प्रशासनिक मनमानी में उलझा

महिला सशक्तिकरण का सपना

      ध्यप्रदेश में सत्तारूढ भाजपा सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए नित नई योजनाओं का प्रचार प्रसार कर रही है। महिलाओं के विकास,उनकी तरक्की की चमकदार तस्वीरों के सरकारी विज्ञापन  अखबार,टी वी चैनल पर देखकर ऐसा लगता है कि महिलाओं की मजबूती,उनको आगे बढाने का सपना मध्यप्रदेश की धरती पर उतर आया है। दरअसल जो दिखाया जा रहा है वह पूरी तरह सच नहीं है। महिलाओं की तरक्की के जो दावे किये जा रहे हैं,वे शत प्रतिशत सही नहीं हैं।

? अमिताभ पाण्डेय


उम्मीद के सपनों की सुनहरी जीत

      मेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति का गौरव हासिल करने वाले बराक हुसैन ओबामा का लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति चुना जाना इस तथ्य को रेखांकित करता है कि यदि प्रतिद्वंद्वी के पास मात्र दोषारोपण के अलावा विकास और उन्नति का कोई खाका नहीं है तो जनता के पास भी विकल्प सीमित हो जाते हैं और तब वह ऐसे राजनेता पर दांव लगाना पसंद करती है जिसके कार्यकाल को उसने बेहद करीब से देखा हो। अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव से तो यही संदेश जाता है। रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार मिट रोमनी पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नकारात्मक भ्रम फैलाते रहे, खासकर ओबामा की विदेश नीति की उन्होंने जमकर खबर ली किन्तु

? सिध्दार्थ शंकर गौतम


म.प्र. भाजपा शासन या संघ शासन

        22 अक्टूबर को आर्च बिषप हाऊस कोहेफिजा भोपाल में संत पिता बेनेडिक्ट सोलहवें प्रतिनिधि तथा वेटेकन सिटी के भारत में प्रतिनिधि-अपोस्टोलिका नुन्वियों आर्च बिशप सल्वाटोरे पेनाक्यिों के सम्मान में आयोजित विशिष्ट समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ईसाई धर्मगुरु को राजकीय अतिथि घोषित किया। शब्दों की बाजीगिरी में माहिर शिवराज के बोल सूफियाना थे। दार्शनिक अंदाज में बोलते हुये मुख्यमंत्री ने सर्वधर्म समभाव का चोला पहन रखा था या भले आदमी का उनका मूल चरित्र आज संघ की सीमा से बाहर आ गया था।

? मोहम्मद यूनुस


फिर से पढ़ना होगा नैतिकता का पाठ

       युग निर्माण योजना का अध्याय फिर से शुरू करना होगा हमें। इस योजना का वह स्लोगन अब हमें आत्मसात करना ही होगा जिसमें कहा गया है कि हम बदलेंगे-युग बदलेगा। भारत को स्वाधीनता मिलने के छह दशक बाद हमारे देश के क्या हालात बन रहे हैं? यह सोचने के बाद हमें स्वयं के अंदर झांकना ही होगा। हम सिर्फ राजनीतिक बिरादरी को दोष नहीं दे सकते। नैतिक पतन न सिर्फ राजनीति के कारण हुआ है बल्कि हमने भी इसमें कुछ न कुछ योगदान दिया है। हमें इस बात पर भी चिंतन करने की जरूरत है कि क्या कठोर कानून भारत की तस्वीर बदल सकते हैं।

    

? प्रवीण श्रीवास्तव


'देश की राजधानी भी तेजाबी बारिश के दायरे में '?

        भारत के प्रधान न्यायाधीश अल्तमश कबीर ने देश की राजधानी दिल्ली के उपर छाई धुंध पर गहरी चिंता जताई है। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से दिल्ली के आसमान पर घनी धुंध छाई हुई है। विशेषज्ञों ने धुंध की वजह राजधानी में फैल रहे भारी प्रदूषण को बताया है, तथा वैज्ञानिक दिल्ली के उपर आगामी दिनों में इस धुंध से तेजाबी बारिश की आशंका भी व्यक्त कर रहें हैं। क्योंकि इस धुंध के लिए वाहनों से उत्सर्जित धुएॅ का बढ़ता साद्रंण भी एक कारक है और इस धुॅए में कार्बन डायआक्साइड, सल्फर डायआक्साइड और नाइट्रस आक्साइड जैसी गैसों के कण होतें हैं

? डॉ. सुनील शर्मा


कानून से परे किराये की कोख

       ज की तकनीकि और सुपरफास्ट दुनिया में क्या नहीं संभव है, हर मर्ज की दवा उपलब्धा है। मेडिकल साइंस की तकनीकि तरक्की सुनकर लगता है कि देश इतना आगे निकल गया है कि अब टेस्ट टयूब बेबी/ आईवीएफ (इन-विट्रो-फर्टिलाइजेशन) और असक्षम मां-बाप को किराये पर कोख देने की व्यवस्था भी आसानी से संभव है। पश्चिमी गुजरात के छोटे से शहर आनंद स्थित आकांक्षा फर्टिलिटी क्लीनिक के बारे में खबर आई की यह अपने ग्राहकों को किराये की कोख की अच्छी सुविधा उपलब्ध कराता है। यहां असक्षम मां-बाप को किराये के कोख पर आसानी से बच्चे भी उपलब्ध हो जाते हैं।

    

? पूर्णिमा उरांव


कैसे बढ़ाएं धन-संपत्ति

        र्तमान युग में लोग धन-संपत्ति बढ़ाने के लिए काफी प्रयत्नशील रहते हैं। इसके लिए वे नौकरी, व्यवसाय तथा अन्य कार्य करते हैं। लेकिन सभी लोगों को इसमें सफलता नहीं प्राप्त होती। इसका मुख्य कारण होता है निवास या कार्यस्थल पर वास्तुदोष। चीनी वास्तुशास्त्र 'फेंगशुई' में विभिन्न शुभ प्रतीकों के स्थापन द्वारा धन-संपत्ति बढ़ाने के अनेक उपाय बताए गए हैं। इनके प्रयोग से जहां निवास या कार्यस्थल के वास्तुदोषों का निवारण हो जाता है, वहीं दुख-दारिद्र दूर होकर धनागमन का मार्ग प्रशस्त होता है-

? कलीम आनंद


  12नवम्बर-2012

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