संस्करण: 12 मई-2014

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स्मृतिशेष भाजपा और मोदी सेना के गठन की पृष्ठभूमि

     2014 के आमचुनावों में मोदी मोदी के नाम का इतना प्रायोजित जयकारा लगाया गया कि विवेक की आवाज दब कर रह गयी। अपने अप्रिय चरित्र को छुपाने के लिए गुजरात के विकास और सुशासन का ऐसा नक्कारा बजाया गया कि कुपोषित बच्चों की करुण पुकार को अनसुनी कर दी गयी। यह विडम्बना ही रही कि सैकड़ों वर्ष पुराने जड़ हो चुके मूल्यों के आधार पर गठित पार्टी ने चुनाव जीतने के लिए आधुनिकतम संसाधन और कार्पोरेट प्रबन्धन की तकनीक का प्रयोग कर युवाओं को बहकाने लगी,   

? वीरेन्द्र जैन


जतिगत ध्रुवीकरण का प्रयास है अमित शाह का बयान

        पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे अमीर और समृध्द माने जाने वाले जिलों में से एक, आजमगढ़ को लेकर भाजपा  उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी व गुजरात के पूर्व गृहमंत्री अमित शाह ने आम चुनाव के वक्त आतंकवाद का मुद्दा पूर्वांचल की राजनीति में एक बार फिर से उछाल दिया है। आजमगढ़ के सरायमीर में भाजपा प्रत्याशी रमाकांत यादव के पक्ष में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने आजमगढ़ को 'आतंकवाद का अड्डा'कह डाला। उनके मुताबिक ज्यादातर आतंकी संगठनों की जड़ें यहीं हैं और यहीं से पूरे देश के लिए आतंकवादियों की सप्लाई होती है। 

? हरे राम मिश्र


मोदी की राजनीति - कुछ खतरनाक पहलू

     ''लोग पता नहीं क्यों, मोदी जी के पीछे हाथ धोकर पड़े हैं?'' यह प्रश्न अक्सर मोदी जी के समर्थकों द्वारा उठाया जाता है। प्रश्न भी वाजिब है, बाकियों में भी कम-ज्यादा बुराइयां हैं तो मोदी ही क्यों? इस प्रश्न के उत्तर में मोदी की राजनीति के कुछ खास पहलू उजागर करने जरूरी हैं।

 

 ? अखिल विकल्प


मोदी का ही उपहास क्यों?

      भारतीय जनता पार्टी के नेता नरेन्द्र मोदी कोई पहले व्यक्ति नहीं हैं जिन्हें उनकी पार्टी ने प्रधानमन्त्री पद का दावेदार घोषित कर चुनाव लड़ाया है। इससे पूर्व इसी पार्टी से श्री अटल बिहारी वाजपेयी और श्री लालकृष्ण आडवाणी भी तत्कालीन लोकसभा चुनावों में घोषित उम्मीदवार ही थे। इनसे भी पहले वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में काँग्रेस से विद्रोह करके जनमोर्चा,तदन्तर जनता दल का गठन करने वाले स्व. वी.पी. सिंह भी चुनाव लड़ते समय प्रधानमन्त्री पद के लिए दावेदार ही थे।

? सुनील अमर


अपने 'नमो' को जानो :

'गुजरात मॉडल' में दलित की खोज

              क्या जनाब मोदी और गुजरात में विगत तेरह सालों से उनकी अगुआई में चल रही सरकार अपनी बुनियादी अन्तर्वस्तु में दलित विरोधी हैं ?

              केरल की सभा में अपने आप को 'अस्पृश्यता का शिकार' बताने वाले मोदी ( और बाद में बिना संकोच तमिलनाडु की एक ऐसी पार्टी से चुनावी गठबन्धन के लिए तत्पर दिखने वाले, जो दलित विरोधी संगठित हिंसा के लिए कुख्यात है )

 ?  सुभाष गाताड़े


चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में मोदी ने

राम और दुर्गा माता की शरण ली

           सा लगता है कि चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में नरेन्द्र मोदी ने अपनी रणनीति बदल दी है। अभी तक वे विकास के नाम पर वोट मांग रहे थे और मतदाताओं को अपने गुजरात मॉडल के सहारे प्रभावित करने का प्रयास कर रहे थे। परंतु चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में उन्होंने राम का सहारा ले लिया। जब भी भारतीय जनता पार्टी को अपनी लुटिया डूबने का अंदेशा होता है तो वे राम की शरण में चले जाते हैं। सारे देश में चुनाव प्रचार करने के बाद नरेन्द्र मोदी भगवान राम की नगरी अयोध्या पहुंचे।

? एल.एस.हरदेनिया


असम जातीय हिंसा की जड़ कहां है

      सम के कोकराझार और बक्सा जिले में फैली जातीय हिंसा ने अब तक 40 से ज्यादा बेगुनाह और मासूम लोगों की जान ले ली है। ये संख्या और भी बढ़ सकती है,क्योंकि लाशें मिलने का सिलसिला अभी रुका नहीं है। हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि उसे संभालने के लिए स्थानीय प्रशासन को कर्फ्यू व दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी करना पड़ा। नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड के संगबिजीत गुट (एनडीएफबी-एस)के सशस्त्र आंतकियों ने पिछले दिनों बोडोलैंड क्षेत्रीय प्रशासनिक जिले (बीटीएडी)के तहत आने वाले तीन जिलों में यकायक हमले शुरू कर दिए।

?  जाहिद खान


संदर्भ - भ्रष्टाचार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का अहम् फैसला

सीबीआई के शिंकजे में आला अधिकारी

     भ्रष्टाचार पर शिंकजा कसने की दृष्टि से सर्वोच्च न्यायालय ने अहम् फैसला दिया है। हालांकि भ्रष्टाचार मुक्त शासन-प्रशासन देने की जवाबदेही विधायिका की है,लेकिन जब विधायिका भ्रष्टाचार पर पर्दा डाले रखने के काम में लग जाए, तब न्यायालय की यह पहल अनुकरणीय है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की ताकत में विस्तार किया है। संयुक्त सचिव और उससे उपर के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मामले में अब जांच शुरु करने से पहले सीबीआई को सरकार से इजाजत लेने की जरुरत नहीं होगी। अदालत ने इस ऐतिहासिक फैसले में महज इतना किया है कि

 

? प्रमोद भार्गव


पक्षपाती आपराधिक कानून कभी भी लोक की सुरक्षा की गारंटी नहीं हो सकते

        नोवैज्ञानिकों के अनुसार व्यक्ति में नकारात्मक और सकारात्मक दोनों प्रकार की प्रवृत्तिायां मौजूद रहती हैं। समाज में शांति और व्यवस्था के लिए आवश्यक है नकारात्मक प्रवृत्तिायों का शमन तथा सकारात्मक वृत्तिायों की रक्षा एवं प्रोत्साहन। धर्मानुग्राही न्याय-प्रणाली का सहारा लेकर इस देश का अभिजन वर्ग सहस्राब्दियों तक समाज के शीर्ष पर विराजमान रहा है। महाभारत में वह कृष्ण के बहाने धर्म को बीच में ले आता है'यदा-यदा हि धर्मस्य ग्लार्निभवति भारत:'आम आदमी खुद को धार्मिक मानता है।     

? शैलेन्द्र चौहान


भारत के अतीत की याद दिलाती है यह उपलब्धि

      भारत के लिए यह गर्व का विषय है कि प्रतिष्ठित इण्डियन इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गुवाहाटी विश्व के सर्वश्रेष्ठ सौ विश्वविद्यालयों की सूची में स्थान पा गया है। भारत के लिए यह पहला मौका है जब उसे ऐसी उपाधि हासिल हुई है। आइआइटी-जी नाम से विख्यात यह देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है,जो पचास वर्ष की अवधि के अन्दर इस चुनिंदा समूह में शामिल हुआ। आइआइटी-जी पुर्तगाल की न्यू यूनिवर्सिटी ऑफ लिसन और ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न सिडनी के साथ 87वें पायदान पर है।

? सुनील तिवारी


घातक है-विद्युत चुम्बकीय विकिरण प्रदूषण

        अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां और विशेषज्ञ जो संकेत पहले से दे रहे थे, अब उसकी पुष्टि भारतीय मौसम विभाग ने भी कर दी है। इस वर्ष मानसून सामान्य (50 वर्षों के औसत) से कम रहने का अनुमान है। जिस देश के अधिकांश इलाकों में खेती आज भी मानसून पर निर्भर हो, निस्संदेह उसके लिए ये खबर चिंता बढ़ाने वाली है। खासकर उस समय जब भारत पिछले कई वर्षों से खाद्य पदार्थों की महंगाई से जूझता चला आ रहा है। बारिश अच्छी ना होने का सीधा असर अनाज की पैदावार पर पड़ता है, जिससे खाद्यान्न के बाजार भाव भी प्रभावित होते हैं।

? डॉ.सुनील शर्मा


गुणवत्ता से दूर हमारे आम

      संघ ने भारत के आमों पर एकतरफा प्रतिबंध लगा दिया है। इससे देश के आम उत्पादकों में काफी निराशा है। देश को करोड़ों का नुकसान हुआ है। पिछले वर्ष हमने 265 करोड़ रुपए के आम विदेश भेजे थे। जो आधे यूरोप में शौक से खाए गए। भारतीय किसानों के साथ इतना बड़ा धोखा हो गया, सरकार चुनाव में व्यस्त है, इसलिए इस दिशा में कुछ होना संभव नहीं दिखता। आचार संहिता का भी मामला है। सरकार के पास समय नहीं है, वाणिज्य विभाग कुछ करने की स्थिति में नहीं है, फिर भी उसने अपना विरोध दर्ज कर ही दिया है।      

? डॉ.महेश परिमल



  12 मई-2014

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