संस्करण: 12मई-2008

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संसद को अखाड़ा बनाने वाले
एक लम्बे सब्र के बाद लोकसभा अधयक्ष ने अंतत: मन मार कर कठोर कदम उठा ही लिया और सदन में हंगामा करने वाले 32 सदस्यों के नाम लोकसभा की विशेषाधिकार समिति के समक्ष उचित कार्यवाही के लिए भेजे थे। इस >वीरेन्द्र जैन


      



नाकामयाबियों का दोष प्रतिद्वंद्वियों पर मढ़ दो !
कहा जाता है किसी झूठ को बार-बार बोलो, चिल्ला-चिल्लाकर बोलो, तो वह लोगों को सच लगने लगती है'- इसी थ्योरी को आत्मसात करते हुए भारतीय जनता पार्टी केन्द्र और राज्यों के सत्ता हथियाने के लिए मतदाताओं पर >राजेन्द्र जोशी


अंकल सैम अपने गिरहबान में भी तो झांकिये
दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को नवउदारवादी आर्थिक नीतियों के एक डंडे से हांकने वाले अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश उर्फ अंकल सैम को अब इन नीतियों के दुष्परिणाम नजर आने लगे हैं. दुनिया को आर्थिक मंदी की आग में >जाहिद खान


          


  


खटकने लगा है गरीब का खाना
भारत और चीन के गरीबों को दो जून की दाल-रोटी भरपेट मिलने लगी है, अव्वल तो यह बात सही नहीं है, लेकिन भरपेट भोजन मिलने भी लगा है तो इसमें विकसित देशों के मुखिया खुश होने की बजाय चिंतित क्यों नजर आ रहे >प्रमोद भार्गव


बिना पढ़े विज्ञान,कैसे होगें अनुसंधान
अभी हाल ही के बजट सत्र दौरान संसद में देश में विज्ञान शिक्षा के प्रति छात्रों की घटती रूचि पर चिंता व्यक्त की है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों के दौरान आधारभूत विज्ञान विषयों में शोध एवं स्नातकोत्तर >डॉ. सुनील शर्मा


       



क्या फ्रान्स को गिरफ्तार किया जा सकता है ?
 हमारी समस्या नागरिक अवज्ञा नहीं है। हमारी समस्या नागरिक आज्ञाकारिता है। हमारी समस्या है कि दुनिया भर के तमाम लोगों ने अपनी हुकूमतों के लीडरानों की बातों का >सुभाष गाताड़े


''शिवराज का उपवास : उल्टा चोर कोतवाल को डांटे''
'प्रदेश के भाजपाई मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गत माह प्रदेश स्तर के जिला मुख्यालयों में अपने मंत्रियों और भाजपा के पदाधिकारियों से 24 घंटे का उपवास कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें केन्द्र की यू.पी.ए. सरकार  >राजेन्द्र श्रीवास्तव


              



भोपाल की शक्ल मत बिगाड़ों, क्योंकि ''लम्हो ने खता की है सदियों ने सजा पाई''
भविष्य में भोपाल की शक्ल क्या हो इस मुद्दे पर एक गंभीर बहस जारी है। बहस की शुरूआत पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी, जिन्हें शहरी योजना का विशेषज्ञ माना जाता है, एम.एन. बुच >एल.एस.हरदेनिया


अन्नपूर्णा योजना का सच
कोई सरकार कितनी नाकारा गैर जिम्मेदार और भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हो तो उस प्रदेश के विकास का बेड़ा गर्क ही होना है। मधयप्रदेश की शिवराज सरकार ऐसी ही, जिसके राज्य में लोक लुभावन योजनाओं के तो अंबार लगा >महेश बाग़ी


     



संदर्भ-बालिका शिक्षा बिन शिक्षा सब सूना
स्त्री के जीवन की सभी समस्याओं की जड़ अशिक्षा है, इस सत्य को झुठलाया नहीं जा सकता और अब समाज ही नहीं स्वयं स्त्रियाँ भी इस बात से सहमत हैं। राहत की बात यह है कि विलम्ब से ही सही, पर बालिका-शिक्षा >डॉ. गीता गुप्त


19 मई बुध्द जयंती पर विशेष सार्वभौमिक हैं बुध्द के सिध्दान्त

गौतम बुध्द बचपन से ही शांत एवं कोमल स्वभाव के थे। वे रूग्ण, वृध्द एवं नि:शक्तजनों को देख कर दुखी हो जाया करते थे। एक दिन शव-यात्रा देखकर वे विचलित हो गये। उनमें वैराग्य उत्पन्न हो गया। उनके  >बालमुकुन्द भारती

 

          

 

          12 मई 2008

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