संस्करण: 12  दिसम्बर- 2011

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मुक्त पतन       

''वित्तीय भ्रष्टाचार के आरोप, खुली अंतर्कलह, और वैचारिक गड़बड़झाला। डींग मारने और घुड़कियाँ देने के बावजूद टीम अन्ना का अपने ही विरोधाभासों के कारण पतन हो गया है। यह एक ऐसी कहानी नही है जिसका अंत सुखद हो।''

                यह एक मुक्त पतन है। वित्तीय भ्रष्टाचार के आरोपों, खुली अंतर्कलह और वैचारिक गड़बड़झाले के बावजूद टीम अन्ना दावा करती है कि वह आगे बढ़ रही है। टी.वी.चैनलों पर बने रहने के आदी,इन लोगों ने 29 अक्टूबर को दिल्ली में पुन: एक प्रेस वार्ता की जिसमें दावा किया कि ''हम सब एक साथ खड़े हैं'' इस प्रेस वार्ता में वैसा शब्दाडंबर नही था जैसा वे अक्सर मीडिया के सामने आने पर प्रस्तुत करते है।

  ? अमित सेन गुप्ता


'थप्पड' का प्रसाद सुब्रहमण्यम स्वामी को

आखिर कानून एवं व्यवस्था के रखवाले घृणा फैलानेवालों के खिलाफ कार्रवाई करने में क्यों संकुचाते हैं ?

        नाब सुब्रहमण्यम स्वामी ने सपनों में नहीं सोचा होगा कि उन्होंने जिस हार्वर्ड विश्वविद्यालय में तालीम हासिल की और जहां वह गर्मियों में अध्यापन के लिए भी जाते हैं, वहां से उन्हें 'निकाले जाने का' फैसला होगा।

               गौरतलब है कि हार्वर्ड युनिवर्सिटी की फैकल्टी की बैठक ने पिछले दिनों अपने इस पूर्वविद्यार्थी को अपने ढंग का अलगसा 'चांटा'रसीद किया,जब अपनी गर्मियों के पाठयक्रम को तय करने के लिए आयोजित बैठक में उन्होंने धवनिमत से उन विषयों को ही हटा दिया जिन्हें पढ़ाने जनाब स्वामी वहां जाया करते थे।

? सुभाष गाताड़े


जरदारी  से नाराज पाकिस्तानी फौज ने की इमरान खां की 

ताजपोशी की तैयारी

      पाकिस्तान एक बार फिर  राजनीतिक अस्थिरता के घेरे में है । बिना पहले से तय किसी कार्यक्रम  के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी दुबई चले गए हैं । उनके बेटे ,बिलावल भुट्टो जरदारीने प्रधान मंत्री युसूफ रजा गीलानी से मुलाकात की है । बिलावल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष भी हैं । सरकारी तौर पर बताया गया है कि जरदारी मेडिकल जांच के सिलसिले में दुबई गए हैं लेकिन पाकिस्तान  में  पहले भी बड़े बड़े फैसले पब्लिक डोमेन में अफवाहों के रास्ते ही आये हैं ।

? शेष नारायण सिंह


लोकतंत्र का स्वरूप बदलने की जरूरत तो है पर अवसर नहीं

          केन्द्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्ला का कहना है कि अब देश में नियंत्रित लोकतंत्र अपनाने का समय आ गया है। उनका कहना एक ओर तो समस्याओं की ओर उनकी चिंताओं को दर्शाता है किंतु दूसरी ओर ऐसा हल प्रस्तुत करता है जिसकी स्वीकार्यता बनाने के लिए एक तानाशाही शासन स्थापित करना होगा। स्मरणीय है कि लोकतंत्र का सुख भोग चुके समाज में अब यह सहज सम्भव नहीं है। श्रीमती इन्दिरा गान्धी ने एमरजैंसी लगाने के बाद चुनाव हारा था और दुबारा चुन कर आने के बाद कहा था कि वे अब दुबारा कभी एमरजैंसी नहीं लगायेंगीं।

? वीरेन्द्र जैन


विपक्ष की भूमिका पर उठते सवाल !

         ब से भारत सरकार ने खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की बात कही है तब से राजनीतिक गलियारों में तूफान सा आ गया है। सरकार के प्रमुख दल कांग्रेस के अपने तर्क है, और उसी के सहयोगी दलों के अपने तर्क। भाजपा और वामदलों सहित समूचा विपक्ष अपना अलग राग अलाप रहा है और भिन्न भिन्न विद्वानों और मीडिया समूहों के अपने दृष्टिकोण है। कुल मिलाकर इस विषय पर देश में ऊहापोह की स्थिति है। इस ऊहापोह में संसद नही चल रही है और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिये संकल्पित सरकार लोकपाल बिल को गति देने के लिये आगे कदम नही बढ़ा पा रही है।

 ? दिव्या शर्मा


इशरत जहां झूठी मुठभेड़ में मारी गई :

अदालत का गुजरात पुलिस पर एक और तमाचा

           गुजरात की सन् 2002 की वीभत्स साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को सलाह दी थी कि ''तुम खून से लथपथ अपने हाथ धो लो और राज करो'' मोदी ने वाजपेयी की बात मानी और खून से लथपथ अपने हाथ धोकर वे अभी भी राज कर रहे हैं। परंतु वाजपेयी वहां के अनेक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी ऐसा परामर्श देना भूल गये। लगभग एक दर्जन से ज्यादा आई.पी.एस समेत अन्य पुलिस अधिकारियों के हाथ खून से लथपथ हैं।

? एल.एस.हरदेनिया


देवसाहब ! आप किस चक्की का आटा खाते हैं ?

तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सुपर स्टार देवानंद से पूछा

       ध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के लिए 23 फरवरी 1997 का दिन एक ऐतिहासिक दिन था, क्योंकि उस दिन सदी के सुपरस्टार देवानन्द पहली बार भोपाल आये थे। वही दिन उनके जीवन का ऐसा दिन बना जो उनकी भोपाल आने की तमन्ना का दिन था। भोपाल में हुए उनके स्वागत और यहां बसे उनके सैकड़ों चाहने वालों का प्यार पाकर वे इतने ज्यादा अभिभूत थे कि वे वादा करके गये थे कि इस खूबसूरत शहर में मैं दुबारा फिर आऊंगा।'

? राजेन्द्र जोशी


आरक्षण : दलों का सियासी दांव

    रक्षण राजनैतिक दलों के सियासी खेल का दांव बनकर उभर रहा है। खाली थाली को दल भूख मिटाने का पर्याय मानकर चल रहे हैं। ये हालात इसलिए निर्मित हुए हैं क्योंकि राजनैतिक दलों ने जनता के बीच ठोस काम काज के जरिये कारगर परिणाम देने का भरोसा खो दिया है। इसलिए मायावती मुस्लिमों को आरक्षण देने का शगूफा तो छोड़ती ही हैं, आर्थिक रूप से कमजोर ब्राह्मणों को भी आरक्षण देने का दांव चलती हैं। मायावती के इस दांव की काट के लिए कांग्रेस भी मुस्लिमों का कोटे में कोटा सुरक्षित करने के आधार पर जल्द आरक्षण देने जा रही है। उसके इस दांव का प्रमुख लक्ष्य उत्तर-प्रदेश में होने जा रहे विधान सभा चुनाव में विजयश्री हासिल करना है।

 

? प्रमोद भार्गव


क्योकि मीडिया, माफिया बन रहा है ?

     पिछले दिनों एक निजी टी0वी0 चौनल पर चल रहे एक कार्यक्रम में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी को मुख्यर अतिथि के तौर पर बुलाया गया।कार्यक्रम के आयोजकों में से एक सज्जन जो चैनल के संपादक समूह के सदस्य भी थे,ने घोषणा की कि हम अंबिका सोनी के इस्तीफे की मांग नहीं कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने हम पर सेंसरशिप लगाने की बात अभी तक नहीं की है किंतु जिस दिन वे हम पर सेंसरशिप लगाने की बात करेंगी उसी दिन उनका इस्तींफा मांग लेंगे।  अंबिका सोनी निरीह दिखीं और सफाई में कहा कि हम टीवी चैनलों पर सेंसरशिप नहीं लगायेंगे

? मोकर्रम खान


खुदरा में विदेशी निवेश आम आदमी और किसानों के हित में

    केन्द्र सरकार ने मल्टी ब्रांड रिटेल क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मंजूरी देकर आम आदमी के हित में एक अच्छा कार्य किया है। राजनैतिक गुणा भाग के चलते भाजपा सहित अनेक दल इसे जनविरोधी साबित करना चाहते है।लेकिन सच तो ये है कि खुदरा में विदेशी निवेश का विरोध करने वाले ही जनविरोधी है। क्योंकि केन्द्र सरकार के इस कदम से देश के आम नागरिकों और किसानों को विशेष फायदा होने वाला है।मॅहगाई से हैरान मध्यम वर्ग को सस्ते और गुणवत्तापूर्ण सामान की उपलब्धि का विकल्प मिलने की पूरी पूरी सम्भावना है।

 

? डॉ. सुनील शर्मा


एक बाँध के कारण

दो राज्यों में युध्द के हालात

     ला एक बाँध क्या दो राज्यों के बीच युध्द के हालात पैदा कर सकता है? यह प्रश्न आज दक्षिण भारत के राजनैतिक गलियारों में तैर रहा है। दोनों राज्यों ने प्रधाानमंत्री से गुहार लगाई है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें। दोनों राज्यों के बीच तलवारें खिंच गई हैं। दोनों ही राज्यों के नेता इस आग में ी डालने का काम कर रहे हैं। उन्हें अपना स्वार्थ सिध्द करना है। इसलिए वहाँ की राजनीति में गर्माहट आ गई है।

? डॉ. महेश परिमल


  12  दिसम्बर-2011

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