संस्करण: 12 अगस्त-2013

अवैध रेत उत्खनन में एक नये

माफिया का प्रादुर्भाव

? दिग्विजय सिंह

        सुश्री दुर्गा शक्ति नागपाल को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रताड़ित करने के बाद से रेत माफिया और अवैध खनन का मुद्दा सुर्खियों में छाया हुआ है,किन्तु मध्यप्रदेश के दो ईमानदार अधिकारियों को अवैध रेत उत्खनन में लिप्त ठेकेदारों के विरूध्द कार्यवाही करने के कारण म.प्र.प्रदेश सरकार द्वारा उन्हे प्रताड़ित करने के मामले को मीडया ने पूरी तरह दबा दिया है।

               खनन अधिनियम के अंतर्गत लघु खनिज राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। रेत एक लघु खनिज है और अब यह ठेकेदारों, नौकरशाहों, और राजनेताओं के गठजोड़ के लिए धन कमाने का एक अच्छा माध्यम बन गया है।

               मध्य प्रदेश में कांग्रेस शासन में मेरे कार्यकाल के दौरान ग्राम पंचायतों को रेत खदानों की नीलामी के अधिकार दिये गये थे और उनसे प्राप्त रॉयल्टी को पंचायतों के पास ही रहने दिया गया था। जैसे ही प्रदेश में भाजपा की सरकार आई, उसने ग्राम पंचायतों का यह अधिकार छीन लिया और रेत खदानों की नीलामी को केन्द्रीकृत कर दिया। अब मधय प्रदेश में सभी रेत खदानें मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम को दे दी गई है और भाजपा सरकार द्वारा इन्हे मनमाने ढंग से अपने लोगों को आवंटित किया जा रहा है।

              कुछ कंपनियों का उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में रेत उत्खनन पर एकाधिकार है। शिवा कंस्ट्रक्शसन एक ऐसी ही कंपनी है जिसने मध्य प्रदेश में रेत खनन पर एकाधिाकार कर रखा है। यह कंपनी मध्य प्रदेश की ज्यादातर रेत खदानों में काम कर रही है। नसरूल्लागंज सीहोर जिले की बुधानी तहसील में एक सब-डिवीजन है जो शिवराज सिंह चौहान का निर्वाचन क्षेत्र है तथा यह  सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत भी आता है।

               यह एक खुला रहस्य है कि मुख्यमंत्री के बड़े भाई जो एक सरकारी शिक्षक है, नसरूल्लागंज के कुछ गाँवों में रेत उत्खनन का कार्य कर रहे है। इस तहसील के तीन गाँवों -अंबा जाडीड, बड़गाँव और सतदेव में कांग्रेस के कार्यकर्ता अवैध रेत उत्खनन का विरोध करने के लिए गये थे जहाँ उन्हे धमकियाँ दी गई थी। इस तथ्य के बावजूद कि इन खदानों के लिये न तो पर्यावरण मंजूरी है न ही इन खदानों के कोई पट्टे दिये गये है फिर भी इन गांवों में रेत उत्खनन बेरोकटोक जारी है।

              वर्ष 2012 में नसरूल्लागंज के एक ईमानदार एस.डी.एम. गिरीश शर्मा ने शिवा कंस्ट्रशन कंपनी को अवैध उत्खनन के लिये 490 करोड़ का एक नोटिस जारी किया था। इस बात पर उनका छतरपुर स्थानांतरण कर दिया गया और उन्हे बगैर पोस्टिंग के ही रखा गया। नसरूल्लागंज में एक अन्य आदिवासी एस.डी.एम. मनोज सरयाम ने जब अवैधा खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की तो उनका वहाँ से तुरंत स्थानांतरण कर दिया गया।

            अवैध उत्खनन के लिये लगाये गये जुर्माने की राशि को वसूल करने के कोई प्रयास नही किये गये है और अब मामले को बंद करने की कार्रवाई की जा रही है। रेत की कीमत पिछले 7 वर्षों में 6 गुना बढ़ गयी है। यहां तक कि सरकार को मिलने वाली रॉयल्टी भी वसूल नही की जा रही है।

               दिल्ली में बैठे भाजपा के नेता जो रेत माफियाओं के खिलाफ होने का दावा करते है वे क्या मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से स्पष्टीकरण लेंगे और कार्यवाही करेंगे? असंभव! भाजपा दोहरे बयानों में निपुण है और अवैध खनन से स्वयं लाभान्वित हो रही है। आज सुषमा स्वराज क्यों अवैध खनन का पर्याय बन गयी है? उन्होने पहले बेल्लारी में रेड्डी बंधुओं का समर्थन किया और अब बुधनी में चौहान बंधुओं का समर्थन कर रही है। क्या वे कृपया इसका जवाब देंगी?      

? दिग्विजय सिंह

(लेखक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं मधयप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री है। दिग्विजय सिंह के बारे मे अधिक जानने और उनके अन्य लेख पढ़ने के लिये आप उनकी वेबसाइट www.digvijayasingh.in  पर जा सकते है।)