संस्करण: 11 नवम्बर-2013

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नेहरू-पटेल की तुलना मोदी

की ओछी राजनीति

       पने दावों और वादों को सही साबित करने और अपनी मानसिकता को स्थापित करने के लिए इतिहास पुरुषों में कीचड़ उछालू तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है। उनके निजी और व्यक्तिगत रिश्तों की कहानियों में वे शब्द उठाकर उछाले जा रहे हैं जिनका शायद उनके बीच में कभी कोई महत्व ही नहीं रहा होगा। नरेंद्र मोदी गुजरात में देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार पटेल की ऐसी प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं जो दुनिया की किसी भी प्रतिमा से विशाल होगी।      

? विवेकानंद


मोदी सरदार पटेल की चरण रज के बराबर भी नहीं हैं

        भी हाल में नरेन्द्र मोदी ने दो ऐसी हरकतें की हैं जिससे यह पुन: सिध्द होता है कि वे एक अत्यधिक ढोंगी व्यक्ति हैं। पटना की रैली में जो लोग मारे गए उनके दु:खी परिवारों से मिलने वे बिहार गए। जहां तक किसी दु:खी परिवार के प्रति संवेदना प्रगट करने का सवाल है उसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है परन्तु जहां सैंकड़ों किलोमीटर दूर जाकर उन्होंने दुखी परिवारों से मिलकर उनका दु:ख बांटा वहीं गुजरात के नरसंहार में मारे गए निर्दोष लोगों के परिवारों से मिलना तो दूर उन्होंने एक बयान देकर भी अपना दु:ख प्रगट नहीं किया। मोदी ने ऐसा इसलिए नहीं किया क्योंकि उससे उन्हें राजनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद नहीं थी।

? एल.एस.हरदेनिया


संघ प्रचारकों के सामूहिक विवाह का वक्त ?

हिन्दुत्व ब्रिगेड में आबादी के मसले को लेकर व्याप्त भ्रांति

     त्ता होसबले, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहकार्यवाह, ने पिछले दिनों अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की केरल में आयोजित बैठक के बाद तमाम हिन्दुओं को एक अनूठी सलाह दी। उनका कहना था कि हिन्दुओं को अधिक बच्चे पैदा करने चाहिए और परिवार सदस्य संख्या बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। ख़बरों के मुताबिक बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने 'जनसंख्या सन्तुलन के अल्पसंख्यकों के दिशा में मुड़ने' की बात की और हिन्दुओं को कहा कि उन्हें परिवार नियोजन पध्दतियों का 'अंधानुकरण' करने के बजाय उसके बारे में पुनर्विचार करना चाहिए।

 ? सुभाष गाताड़े


नरेन्द्र मोदी की

सद्भावना यात्रा के निहितार्थ

      गुजरात के मुख्यमंत्री एवं भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के स्वभाव और चरित्र को देखते हुए इसे आ्चर्यजनक ही कहा जायेगा कि वे पटना रैली में हुए बम धमाकों में मारे गये बेगुनाहों के घर संवेदना व्यक्त करने खुद गये और पीड़ित परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये का चेक भी सौंपा। यह आ्चर्यजनक इसलिए भी है कि इस दे में पहली बार बम विस्फोट नही हुए हैं और इनमें पहली बार बेगुनाहों की जान नही गयी है। लेकिन इससे पहले श्री मोदी किसी भी पीड़ित परिवार के घर संवेदना व्यक्त करने कभी नही गये।  

? हरेराम मिश्र


भाजपा से नाराज सिन्धी समाज

        जातिवाद हमारे लोकतंत्र में ऐसी बुराई है जिसको दूर किया जाना जरूरी है, किंतु इस आदर्श के प्राप्त होने तक हम इसके अस्तित्व से ऑंखें नहीं मूंद सकते। इसमें कोई सन्देह नहीं कि जिन जिन क्षेत्रों में राजनीतिक चेतना जितनी कमजोर है उन उन क्षेत्रों में जातिवाद उतना ही प्रभावी है और यह प्रभाव उस क्षेत्र में होने वाले विभिन्न आम चुनावों पर प्रभाव डालता है।

 ?   वीरेन्द्र जैन


पी.एम. पद के दावेदार का

ये आचरण ?

           गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए भारतीय जनता पार्टी के घोषित उम्मीदवार हैं। भाजपा मिशन अयोध्या शुरु करने के समय से ही लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री पद का अपना दावेदार घोषित करती रही है। वर्ष 2004तक पार्टी के शिखर पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी ही भाजपा के ऐसे एकमात्र और सर्वसम्मत दावेदार हुआ करते थे। उनकी निष्क्रियता के बाद कनिष्ठ शिखर पुरुष लालकृष्ण आडवानी ऐसे दावेदार हुए और अब तमाम विवादों के बाद नरेन्द्र मोदी।  

? सुनील अमर


चुनाव पूर्व सर्वेक्षण यानि मतदाता की मानसिक हाइजेकिंग!

      व्यापारिक कंपनियॉ बाजार में अपना उत्पाद बेचने कि विज्ञापन करती हैं, एवं अपने उत्पाद की बढ़ती लोकप्रियता के सर्वे प्रसारित करती है।जब उपभोक्ता देखता है कि किसी विशेष कंपनी के उत्पाद को ज्यादा लोग प्रयोग कर रहें हैं तो वह भी उसी कंपनी का उत्पाद खरीदने का मन बनाता है और कम से कम एक बार तो जरूर उपयोग करता है। अखबार वाले रीडरशिप सर्वे के जरिए ये प्रमाणित करते हैं कि उनका अखबार ज्यादा लोग पढ़ते हैं, और वो ज्यादा काबिल अखबार है और इलेक्ट्रानिक मीडिया भी अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए कुछ भी करने तैयार रहता है।

?  डॉ. सुनील शर्मा


बैंकिंग क्षेत्र में शीर्ष पद पर महिलाए

     मेरिका की सबसे शक्तिशाली फेडरल रिजर्व बैंक - जिसकी नीतियों का विश्व अर्थव्यवस्था पर भी फरक पड़ता है - और परिसम्पत्तियों के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी बैंकिंग और वित्तीय सेवा कम्पनी के तौर पर जानी जानेवाली स्टेट बैंक आफ इंडिया, इन दोनों बैंकों में पिछले दिनों एक जैसा 'इतिहास' रचा गया।

             स्टेट बैंक जिसका इतिहास लगभग दो सौ साल पुराना है और आज जिसकी शाखाओं की संख्या 15 हजार से भी अधिक हैं जिनमें से 157शाखाएं विदेशों में भी स्थित है उसमें तथा फेडरल रिजर्व (जिसे अनौपचारिक तौर पर 'फेड' भी कहा जाता है) -फेड जिसका गठन लगभग एक सौ साल पहले किया गया था, - जो अमेरिका की केन्द्रीय बैंकिंग प्रणाली है, 

 

? अंजलि सिन्हा


अब मंगलमय हो

भारत की मंगल यात्रा

        अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाते हुए हाल ही में हमारे देश ने अपने पहले मंगलयान 'मार्स आर्बिटर मिशन'(एमओएम)को प्रक्षेपित किया। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण के 44मिनट बाद मंगलयान के पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश कर जाने से इसका पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इसके साथ ही हमारा देश उन छह देशों की अग्रिम कतार में शामिल हो गया है, जिन्होंने इस जोखिम भरी यात्रा के समर्थन का खतरा उठाया। मंगलयान तीन चरणों में मंगल की कक्षा में प्रवेश करेगा। पहले चरण में मंगलयान चार हते तक धरती का चक्कर लगाएगा।

? जाहिद खान


विकास की कीमत चुका रही है दम तोड़ती क्षिप्रा नदी

      ल्द्वानी से करीब चालीस किलोमीटर यह जगह शिप्रा नदी का उद्गम स्थल है पर अब यह आबादी वाले इलाके में बदल चुकी है और नदी को धकेल कर किनारे कर दिया गया है। अब इसे नदी तभी कहा जा सकता है जब भारी बरसात के बाद सभी नदी नालों और गधेरों का पानी इसमें समा जाए। श्यामखेत से करीब पच्चीस किलोमीटर दूर खैरना के पास यह दूसरी पहाड़ी नदी से मिलकर कोसी में बदल जाती है। पर इससे पहले का शिप्रा नदी का सफ र और उसकी बदहाली को समझने के लिए श्यामखेत आना पड़ेगा। इस नदी की मूल धारा जहां से गुजरती थी वह कंकीट की सड़क बन चुकी है और जो खेत थे वे पाश इलाके में बदल चुके हैं। ऊंची कीमत पर पहले जमीन बिकी फिर उनपर आलीशान घर बना दिए गए।      

 

? राखी रघुवंशी


तुलसी एक पौधा नहीं,

विचार है

        ममें से शायद ही ऐसा होगा, जिसने अपने घर के ऑंगन में तुलसी का बिरवा न देखा होगा। आज कांक्रीट के जंगल में रहते हुए शायद आज की पीढ़ी को यह पता ही नहीं होगा कि तुलसी का बिरवा किस तरह से हमारे जीवन से जुड़ा हुआ है। आज की पीढ़ी तो इसके महत्व से पूरी तरह से अनजान है। पर हम जानते हैं कि किस तरह से घर में सुबह-सुबह माँ, भाभी, दादी, नानी या फिर दीदी ऑंगन में लगे तुलसी के बिरवे की पूजा करती थीं। सचमुच उसका महत्व था हमारे जीवन में। आज जब कुछ पुरानी फिल्मों में इस तरह के गाने देखने-सुनने को मिल जाते हैं, तब पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। देखा जाए तो फिल्मों एवं धारावाहिकों में ही आज तुलसी का बिरवा जीवित है। इसके अलावा इसे नर्सरी में भी देखा जा सकता है।  

? डॉ. महेश परिमल


  11 नवम्बर2013

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