संस्करण: 11 जुलाई- 2011

घातक है :

युवाओं में रेव पार्टियों का चलन

? डॉ. गीता गुप्त

               महानगरों के नवधनाढय युवाओं में रेव पार्टियों का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है। मुम्बई के निकट खंडाला, लोनावला, कर्जत, अलीबाग आदि स्थानों पर ये पार्टियां आयोजित की जाती हैं। इनमें पूरी रात लाउड ट्रांस म्यूज़िक, मध्दिम रोशनी में युवाओं के थिरकते बदन, हाथों में मदिरा की बोतल या सिगरेट और रगों में दौड़ता हुआ एलएसडी, चरस और गांजे आदि का नशा विकासशील भारत की युवा पीढ़ी का जो चेहरा उजागर करता है,वह निश्चय ही चिन्ताजनक है। इन युवाओं के माता-पिता के पास अपार धन-सम्पदा है,वे खूब धन कमा रहे हैं लेकिन उनके पास अपने बच्चों को देने के लिए समय नहीं है। वे अपनी सन्तान को सिर्फ़ दौलत दे सकते हैं, प्यार-दुलार, संस्कार और सीख देने की फुर्सत उन्हें नहीं है। ऐसे युवा आदर्श और लक्ष्यविहीन होकर रेव पार्टियों में जीवन के सुख और आनन्द की तलाश कर रहे हैं।

 

               इण्डियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में हाल ही में प्रकाशित एक लेख के अनुसार ड्रग्स के विदेशी व्यापारी भारतीय युवाओं को अपना निशाना बना रहे हैं। रेव पार्टियों में एसिड व इक्सटैसी, एलएसडी, हशीश, गांजा, कोकीन, केटामाइन, जीएचबी (फैंटेसी) आदि मादक पदार्थों का उपयोग पार्टी ड्रग्स के तौर पर होता है जो अत्यंत घातक हैं। ज्ञातव्य है कि नारकोटिक्स सेल विशेष रूप से मादक पदार्थों के गैरकानूनी धांधो को रोकने के लिए ही बनाया गया है, लेकिन इधर जो घटनाएं प्रकाश में आई हैं उनसे यह सिध्द होता है कि नशे के व्यापारियों ने एण्टी नारकोटिक्स सेल में सेंधा लगा दी है।

 

               पिछले दिनों अन्तरराष्ट्रीय मादक पदार्थ निरोधक दिवस पर मुम्बई से एक सौ किलोमीटर दूर मुम्बई-पुणे एक्सप्रेस वे पर खालापुर स्थित माउण्ट व्यू रिजॉर्ट में एक रेव पार्टी आयोजित की गई, जिसमें मुम्बई, पुणे, कोल्हापुर और बेंगलुरु तक के युवाओं ने भाग लिया। इस पार्टी में हर तरह के मादक पदार्थ उपलब्ध कराये गए। चर्चा है कि गत तीन वर्षों से एण्टी नारकोटिक्स सेल में कार्यरत 42 वर्षीय पुलिस इंसपेक्टर अनिल जाधव ने इस रेव पार्टी के लिए ड्रग्स उपलब्ध करवाये। दरअसल जाधव को मादक पदार्थों, से भरे एक कमरे से हिरासत में लिया गया इसलिए आशंका है कि पार्टी उनकी देखरेख में ही चल रही थी। इसमें बीस से तीस वर्ष के लगभग तीन सौ युवा शामिल थे और 60 लड़कियों सहित अधिकतर विद्यार्थी थे।

 

               हालांकि अनिल जाधव एक कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में जाने जाते थे। पर यह मामला कोई अपवाद नहीं है। मुम्बई पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी हत्या,बलात्कार और घोटालों में लिप्त पाए गए हैं। अनिल जाधव के साथ उनके एक सहयोगी सुनील धुले के अलावा पार्टी के आयोजक स्नेहजीत साजलकर, कुशन कुमार, सुजान कुमार और होटल प्रबंधक राहुल खन्ना को भी गिरफ्तार किया गया। एक व्यक्ति विकी शाह लापता है। ज्ञातव्य है कि उक्त रेव पार्टी का आयोजन फेसबुक के माधयम से किया गया था जिसमें प्रवेश शुल्क एक हज़ार रुपये था। कर्जत की इस रेव पार्टी का निमंत्रण कई दिनों पूर्व फेसबुक के एक विशेष पृष्ठ पर डाउनलोड कर दिया गया था जिसे एक ख़ास कम्युनिटी के मेम्बर ही देख सकते थे। उल्लेखनीय है कि इन पार्टियों में अमीर घरों के युवा, बी.पी.ओ. में कार्यरत, यंगस्टर्स और कॉलेज के विद्यार्थी ही नहीं, मॉडल, सेलिब्रिटी और फिल्मी सितारे भी भाग लेते हैं।

 

               मुम्बई और पुणे में रेव पार्टियों का चलन पुराना पड़ चुका है। 4 मार्च 2007 को पुणे के पास खालापुर में चल रही रेव पार्टी में छापा मारकर पुलिस ने तीन करोड़ रुपये के ड्रग्स जब्त किये थे और 27 लड़कियों सहित कुल 151 युवाओं को हिरासत में लिया था। ये सभी कॉलेज के विद्यार्थी थे। 6 अक्तूबर 2008 को मुम्बई में जुहू के पब 72 डिग्री ईस्ट की रेव पार्टी पर पुलिस छापे में 240 युवाओं सहित आठ ड्रग्स पेडलर, एक फिल्म स्टार का बेटा और कुछ विदेशी भी हिरासत में लिए गए थे। मुम्बई में ही 2009 में 27 जून, 20 जुलाई और 26 जुलाई को लोखंडवाला, जुहू और कोलाबा में रेव पार्टियों में पुलिस ने छापे मारे और कोकीन, हशीश जैसे महंगे ड्रग्स, विदेशी शराब, कण्डोम के पैकेट और नक़द राशि बरामद की थी। वहां कुछ बार बालाएं भी पायी गई थीं। 4 अगस्त 2010 को पुणे के टॉप मैनेजमेण्ट इन्स्टीटयूट सिम्बॉयसिस के 254 लड़कों और 235 लड़कियों को पुणे शोलापुर हाइवे स्थित एक फार्म हाउस में चल रही रेव पार्टी से हिरासत में लिया गया था। ऐसे मामले अब बढ़ते ही जा रहे हैं। यदि जल्द ही मादक पदार्थों की ओर बढ़ते युवा क़दमों को नहीं रोका गया और पुलिस बल में फैली अराजकता को नियंत्रित नहीं किया गया तो देश को इसके भयानक दुष्परिणाम भुगतनें होंगे।

 

              निस्संदेह मादक पदार्थों के अवैध कारोबार को रोका जाना नितान्त आवश्यक है, लेकिन क़ानूनी प्रतिबंध मात्र से इसमें सफलता नहीं मिल सकती। मादक पदार्थों के सेवन पर प्रतिबंध भी युवाओं को नशे के चंगुल से नहीं बचा सकता। विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनने जा रहे भारत के युवा ही इस देश का भविष्य हैं,यह स्मरण रखते हुए प्रत्येक माता-पिता और समाज यदि मिलकर प्रयास करें तो रेव पार्टियों  सहितकहीं भी मादक पदार्थों के चलन को हतोत्साहित किया जा सकता है। इसमें मीडिया की अहं भूमिका हो सकती है। सरकार को भी चाहिए कि वह ऐसी पार्टियों पर विराम लगाने के लिए कठोर क़दम उठाये। क़ानूनी प्रावधान, सामाजिक जागरूकता और मीडिया के सकारात्मक प्रयासों से युवाओं का सही मार्गदर्शन किया जा सकता है। इस दिशा में अविलम्ब ठोस पहल की जानी चाहिए।


 
? डॉ. गीता गुप्त