संस्करण: 11 जुलाई- 2011

कब हकीकत बनेगा

समान अवसर आयोग

? जाहिद खान

               हमारे मुल्क में समानता की चाह और उसके लिए जद्दोजहद का एक लंबा इतिहास है, जो आजादी के बाद भी हमारे संविधान में प्रतिबिंबित होता है। संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों में कानून के सामने बराबरी और रोजगार के समान अवसर के अधिकार शामिल हैं। जिन्हें नीति निर्देशक सिध्दांतों के जरिए और मजबूत किया गया। बाद में जोड़े गए अनुच्छेद 38 में साफ किया गया है कि राज्य आय की विषमता को कम करने की कोशिश करेगा। और सिर्फ व्यक्तियों बल्कि समूहों के बीच भी सुविधाओं और अवसरों की असमानता को दूर करने के कदम उठाएगा। लेकिन आजाद हिंदुस्तान का 64 साल का इतिहास बतलाता है कि संविधान की मुकद्दस कसमें समाज में मौजूद विषमता और भेदभाव के ताने-बाने में उलझकर बेअसर हो जाती हैं। लिहाजा, मुल्क के सामने एक बड़ा सवाल यह रहा है कि कानून में वर्णित औपचारिक समानता को सामाजिक धरातल पर वास्तविक रूप कैसे दिया जाए। बीते कुछ समय से लगातार यह महसूस किया जा रहा है कि शिक्षा और रोजगार में अवसरों की समानता बढ़ाने की कोशिशें आरक्षण तक महदूद नहीं रह जानी चाहिए। बल्कि विषमताओं के नए-नए रूपों की शिनाख्त और उनसे निपटने की तजवीजों पर लगातार सोच विचार और कार्रवाई जरूरी है। गोया कि समान अवसर आयोग, सरकार की इसी विचार मंथन की उपज है।

 

               साल 2006 में आई सच्चर कमेटी की रिपोर्ट ने अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति के बारे में जो निष्कर्ष निकाले और समुदाय के विकास के लिए जो सिफारिशें सुझाईं,उसमें सबसे अहम सिफारिश थी,सरकारी नौकरियों में मुस्लिम समुदाय के जानिब होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए समान अवसर आयोग की स्थापना करना। अफसोस ! रिपोर्ट को आए हुए 5 साल होने को आए लेकिन समान अवसर आयोग अभी तलक हकीकत नहीं बन पाया है। जबकि,सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने साल 2009में अपने चुनावी घोषणापत्र में मुसलमानों से वादा किया था कि हुकूमत में दोबारा लौटे तो समान अवसर आयोग कायम होगा। बहरहाल,यूपीए सरकार बहुमत से वापिस हुकूमत में आई और सत्ता संभालने के तुरंत बाद, राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने जून 2009 में संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए, अपने भाषण में समान अवसर आयोग गठित करने की, सरकार की प्रतिबध्दता का खास तौर पर जिक्र किया।

 

               एक ही मंच के नीचे सभी वंचित समूहों के लिए सकारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के नेक मकसद से बनाए जा रहे समान अवसर आयोग पर ऐसा नहीं कि सरकार ने अभी तलक कोई कार्रवाई नहीं की है। कार्रवाई हुई है। आयोग किस तरह से काम करेगा,गोया कि इसका लगभग मसौदा तैयार है। हाल ही में दर्जन भर संबंधित मंत्रालयों से मसौदे के बारे में उनकी राय मांगी गई। जाहिर है,उनकी टिप्पणी आने के बाद मसौदे को अंतिम रूप देकर कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। बहरहाल, आयोग का जो खाका अभी सामने निकलकर आया है, उससे मालूम चलता है कि यह व्यक्तिगत शिकायतों से अपने को दूर रखेगा और सिर्फ समूह या समुदाय के समानता के अधिकारों और उनके उल्लंघन पर नजर रखेगा। हालांकि, आयोग को दंडात्मक शक्तियां नहीं दी जाएंगी, लेकिन उसके पास दीवानी अदालत के अधिकार होंगे। जिनके जरिए वह मुख्तलिफ महकमों और निकायों से जानकारी मांगने और उनके दस्तावेजों की जांच करने का काम कर सकेगा। वह रोजगार, शिक्षा, आजीविका, स्वास्थ, आवास और ऋण आदि क्षेत्रों के लिए भी समान अवसरों की आचार संहिता बना सकेगा। यही नहीं,किसी संस्थान के बारे में संहिता के उल्लंघन की शिकायत मिलने पर आयोग के पास अदालत का दरवाजा खटखटाने का रास्ता भी होगा। प्रस्तावित मसौदे में नौकरी, शिक्षा और आवासीय योजनाओं में अल्पसंख्यकों के जानिब भेदभाव रोकने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। इन मामलों के दोषियों को एक बार में 3माह तक की सजा का प्रावधान है,जिसे बढ़ाया भी जा सकता है। और यह जुर्माना 5 लाख तक हो सकता है।

 

               आयोग की सीमाओं के मद्देनजर विशेषज्ञ समिति ने सुझाया है कि आयोग का एक अहम काम समान अवसरों के उल्लंघन के सबूतों को जुटाना होगा। इसके लिए बड़े स्तर पर शोध कार्य होंगे और आंकड़े जुटाए जुटाए जाएंगे। आंकड़ों के लिए जहां बाकायदा एक नेशनल डाटाबेस बनाया जाएगा, वहीं एक एसेसिंग एंड मॉनिटरिंग कमेटी भी बनाई जाना प्रस्तावित है। जाहिर है, इन दोनों के आधार पर मुल्क के सरकारी और निजि क्षेत्रों का विस्तृत ब्यौरा आयोग के पास उपलब्ध होगा। और वह इसके बिना पर जरूरी कार्रवाई करेगा। समान अवसर आयोग में सबसे बड़ी बात यह होगी कि यह सरकारी के साथ-साथ निजि क्षेत्र में मिलने वाले रोजगार और दक्षता विकास कार्यक्रमों की निगरानी भी करेगा।

 

               कुल मिलाकर, ऐसे समूह जो सामाजिक, आर्थिक विकास में किसी वजह से महरूम रह गए हैं, समान अवसर आयोग उन्हें अपनी आवाज रखने का मौका मुहैया कराएगा। दुनिया के तकरीबन सभी महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मुल्कों में वंचितों को इंसाफ दिलाने के लिए समान अवसर आयोग बनाए गए हैं। हमारे मुल्क में भी इसकी जरूरत लंबे अरसे से महसूस की जा रही थी। लिहाजा, सरकार ने सच्चर रिपोर्ट आने के तुरंत बाद इस बारे में सुझाव देने के लिए माधव मेनन की कयादत में एक विशेषज्ञ कमेटी बनाई। इस कमेटी की सिफारिशों के बिना पर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने समान अवसर आयोग विधेयक का मसौदा तैयार किया है। फिलवक्त, मसौदे पर संबंधित मंत्रालयों में विचार मंथन जारी है। और सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो समान अवसर आयोग जल्द ही हकीकत बनेगा।


 
? जाहिद खान