संस्करण: 11फरवरी-2008

 ''बिना ताज़ के राज कर रहा है संघ और (आर.एस.एस.)''
   राजेन्द्र श्रीवास्तव

        राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ स्वयं की राजनैतिक संगठन न मानकर विशुध्द सामाजिक संगठन घोषित करता रहा है। किन्तु इसकी कथनी और करनी में जमीन आसमान का अन्तर दिखाई देता है। इसका ताज़ा उदाहरण भारतीय जनता पार्टी को तो या मधयप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार को दोनों में ही आर.एस.एस. का हस्तक्षेप खुल्लमखुल्ला देखने को मिलता है। यहाँ व्यक्ति प्रमुख न होकर विचार और सिध्दान्त को प्रमुखता की बात कहीं जाती है किन्तु देखने में कुछ ओर ही नज़र आता है। विचार और सिध्दान्त गौण रह कर व्यक्ति प्रमुख ही हो जाता है। जब वह सत्ता और संगठन पर हावी हो।

पिछले दिनों साँची में पार्टी का चिंतन-मंथन शिविर लगाया गया। उपचुनावों में भाजपा की लगातार हार पर विचार किया गया। कुछ लोगों को खेमेबाज़ी ने दरकिनार कर दिया। ऐसे ही कुछ लोगों द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को आरोपों के घेरे में ले लिया था जिनके तथ्य भी झुठलाए नहीं जा सकते। किन्तु इन आरोपों को हवा की बयार में बहा दिया गया। क्योंकि मधय प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शिवराज सिंह को जैसा चाहे वैसा खड़ा किए हुए है। और शिवराज भी ऑंखे मुंदकर ''संघ गच्छामि'' कर चुके है। जिसकी वज़ह से ही उन्हें बिना मेहनत के सत्ता सुख का फल चखने का मौका मिला है और जो वास्तव में इसके हकदार थे आज भाजपा से अलग कर दिये गये है। कहने का अर्थ है यह सब दिशा-निर्देश आर.एस.एस. के अनुसार किया गया है। जिसकी जिम्मेदारी संघ की ओर से राष्ट्रीय सर कार्यवाहक को जाती है जो भाजपा प्रभारी भी बनाये गये है। जिन की वज़ह से शिवराज का भ्रष्ट राज फल फूल रहा है उसकी कमान पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी पूर्व कोषाधयक्ष की अहम भूमिका है। संघ के सरकार्यवाहक भ्रष्टाचार की गंगा में स्वयं स्नान कर रहे हैं। उन्हें शासन से वी.आई.पी. जैसी व्यवस्थाओं से नवाजा जाता है उनके आगे पीछे मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी घुमते है। इनकी सिफारिश पर नेटवेल कॉर्पोरेशन को 22 करोड़ का ठेका दिलाया गया। इन्दौर के कुख्यात बिल्डर जो इनके निकटवर्ती हैं ऐसे को टी.पी. स्कीम की धाज्जियां उड़ाकर 140 करोड़ रुपये भी गृह निर्माण योजना मंजूर करवाई गई। बैरागढ़ के पास अपने एक रिश्तेदार को राजस्व मंत्री पर दबाव डालकर जमीन दिलवाई। अपने भतीजे को जो विद्युत मण्डल का कर्मी है उसे पदोन्नत देकर अच्छी जगह स्थानान्तरण किया गया। इनकी सिफारिशों पर चार जिलों के पुलिस अधीक्षक, तीन जिलाधीश, छह वन विभाग के अधिकारी और सात आर.टी.ओ. की पदस्थापना की गई। प्रशासन निगम का एक विश्राम गृह अपने निकटवर्ती को लीज पर दिलवाया। महाकालेश्वर मन्दिर उज्जैन ट्रस्ट में अपने पुराने मित्र को ट्रस्टी बनवाया।

शिवराज को संघ की ओर से क्लीन चिट मिल जाने से उसके तीन व्यक्ति सत्ता प्रशासन को संचालित कर रहे हैं। शिवराज की धार्मपत्नी प्रशासन के अधिकारी, कार्यकर्ताओं को सीधा निर्देश देती हैं उनकी कई धांधों में भागीदारी है। रीवा की सीमेंट फैक्टरी में उनके 13 डम्पर विभिन्न नामों से लगाये गये है। शिवराज के साले संजय सिंह ने गोंदिया(महाराष्ट्र) रामनगर में 8 करोड़ रुपयों का एक प्लाट अगस्त 2007 में खरीदा। छिन्दवाड़ा जिले में 67 एकड़ माईनिंग लीज पर 30 वर्षों के लिये जुलाई 2007 में अनुबंध किया।

भोपाल में साढ़े सोलह करोड़ की लागत से चार स्थानों पर भूमि खरीदी गयी। जो एक्स अस्पताल के पास, मन्दाकिनी सोसायटी के सामने कोलार, सेक्टर-बी अरेरा कॉलोनी और टी.टी. नगर में है।

भोपाल इन्दौर हाइवे रोड़ पर होशंगाबाद से 4 कि.मी. पूर्व दो वेयर हाउसिंग गोदाम निर्माणाधीन है। इन्दौर के आई.टी. पार्क में तीन प्लॉट खरीदे हैं। रिलायंस का पॉवर प्रोजेक्ट के पास 65 एकड़ भूमि खरीदी गई है। कोल ब्लॅक के अलाटमेंट की कार्यवाही चल रही है। इन सारी सम्पत्तियों के क्रय में पत्नी साधाना सिंह, साला संजय सिंह के साथ भू-माफिया और ठेकेदार दिलीप सूर्यवंशी की मुख्य भूमिका रही है। संघ के सहकार्यवाह स्वयं बहती गंगा में डूबकी लगा रहे है फिर भला वे इस पर अंकुश कैसे लगा सकते है। संघ के इस अधिकारी का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय महासचिव प्रभात झा जो आपके निजी सचिव भी है, म.प्र. शासन में सहकार्यवाह के नाम से मंत्री, अधिकारी और संगठन के लोगों को घौंस देते रहते है जो स्वयं बिहार के जिला बदर आरोपी रहे। जिन्होंने ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक रहे श्री पाठक के माधयम से बिहार से अपनी फाईल समाप्त करवाई थी। ग्वालियर में सम्पत्ति इकट्ठी कर रखी है और पत्रकार भाजपा पदाधिकारी के रूप में अभुत धान संग्रह किया है। प्रभात झा के बाद अनिल दवे जो भाजपा के वरिष्ठ उपाधयक्ष हैं।उन्हें एकात्मता परिसर प्रदेश भाजपा कार्यालय की भवन समिति ने पिछले वर्ष एकमत होकर कार्यालय से निवास छोड़ने के लिये कहा था, लेकिन संघ सरकार्यवाह की छत्रछाया के रहते उन्हें कोई हटाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है। भोपाल और इन्दौर में भारी सम्पत्ति स्थापित की हैं। गैर सरकारी संगठन के पदाधिकारी बन कर भारी धानराशि एकत्रित करने में जुटे हैं।भाजपा के प्रदेशाधयक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर जो नीचे से ऊपर पहुँचे किन्तु सत्ता की चकाचौंधा में बोतल और कबूतरबाज़ी में लिप्त हो गये हैं इनके आश्वासनों से कार्यकर्ताओं में भी भारी असंतोष व्याप्त है यह सरकार्यवाह और शिवराज सिंह की रबर स्टॉम्प हैं। चौथे व्यक्ति संघ के प्रचारक रहे राजनीति से अछूते माखन सिंह को भाजपा का सर्वेसर्वा इसलिये बनाया क्योंकि उनकी आर.एस.एस. के प्रति निष्ठा है। उन्होंने पूर्व सर्वेसर्वा की तरह विधायक से लेकर मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों से धन संग्रह नहीं किया। इनकी छवि अच्छी है किन्तु संगठन में अभी पकड़ मज़बूत नहीं बन पायी है यह सरकार्यवाह के यसमेन जो है। इन चारों व्यक्तियों की वज़ह से प्रदेश शासन की भ्रष्ट नाव डगमगाते हुए चल रही है।इस प्रकार हम कह सकते है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शह पर भ्रष्टाचार को प्रश्रय मिल रहा है,शिवराज को।

राजेन्द्र श्रीवास्तव