संस्करण: 11फरवरी-2008

कॉर्पोरेट जगत के आकर्षण में खोता देशप्रेम
   डॉ. राजश्री रावत 'राज'

ग्लोबलाइज़ेशन, बाज़ारवाद और प्रतियोगिता के इस दौर में हर युवा को तलाश होती है एक ऐसे कैरियर की जहाँ उसे डिग्री के साथ-साथ ऐसी नौकरी या रोज़गार प्राप्त हो जहाँ वह अधिक से अधिक धन कमा सके। ऐसी रोजगार परक शिक्षा मिले जिससे धानोपार्जन का लक्ष्य अधिक से अधिक हासिल किया जा सके।

कुछ वर्षों पहले तक युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में चुनाव कम ही होते थे। डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक और इन सबमें यदि छात्र नहीं जा पाता तो सेना अंतिम चुनाव होता था। आज बैकिंग, कम्प्यूटर, साफ्टवेयर, और आई.टी. क्षेत्र के अलावा कारपोरेट जगत के अन्य लुभावने क्षेत्रों के कारण डॉक्टरी, इंजीनियरिंग, वकालत और शिक्षा के क्षेत्र में छात्र जाना पसंद नहीं करते हैं। इनके अलावा अनेकों क्षेत्र है जैसे रेडियो कार्यक्रम निर्माण् प्रसारण, पत्रकारिता, रचनात्मक लेखन कम्प्यूटर शिक्षा, बाल सुरक्षा पोषण आहार, नर्सिंग, मानव अधिकार, उपभोक्ता संरक्षण, पर्यावरण, पर्यटन, प्रबंधान, लाइब्रेरी, आटोमेशन रिटेलिंग, इंनिनियरिंग के नए क्षेत्र जैसे मर्चेंट इंजीनियरिंग आदि में युवावर्ग बड़ी उत्सुकता से अपने भविष्य के प्रति आशावादी होकर प्रेरित होता है। इन सबके आकर्षण से आकर्षित छात्र देश की रक्षा, सम्मान और कल्याण के लिए सेना में नौकरी ढूंढ़ने का प्रयास करना भूलते जा रहे हैं। यही कारण है कि अभी पिछले दिनों आर्मी दिवस के अवसर पर सेनाधयक्ष जनरल दीपक कपूर ने सेना में अफसरों की कमी और योग्य उम्मीदवार न मिलने पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो भविष्य में फौजी ट्रेनिंग को अनिवार्य बनाने पर विचार करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि सेना में 11200 अफसरों की कमी है और इस कमी के लिए उन्होंने कारपोरेट जगत के लुभावने वेतन और अन्य सुविधाओं को कारण बताया। उन्होंने बताया कि सेना की छवि कुछ घटनाओं के कारण खराब रही है। हालांकि पहले सेना की सेवा को आम जनता द्वारा हमेशा ही सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। सरहदों पर देश और देश की जनता की सुरक्षा के लिए खड़े इन जांबाजों के लिए पैसा कुछ मायने नहीं रखता। इनके दिल तो सब देश के लिए धाड़कते हैं। जिस्म पर सेना की वर्दी इनके दिलों को जोश और देशप्रेम से भर देती है। बदले में देश से इन्हें सम्मान और प्रेम मिलता है।

यू. एन. मिशन की रिपोर्ट में भारतीय सेना को दुनिया की बेस्ट आर्मीज़ में शुमार किया गया है। भारतीय सेना मधय अफ्रीका, युरोप और मधय एशिया में यू.एन. द्वारा चलाया जा रहे शांति अभियानों में भाग लेती रही है।

दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अच्छी सेना आकार में भले ही दुश्मन को बौना साबित कर दे, लेकिन सेना में आधुनिकीकरण की धीमी रफ्तार, अफसरों की कमी और अंतर्कलह जैसे मोर्चो पर जीतना इसके लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

सबसे बड़ी चुनौती ऑफिसर की कमी है सेना में 14500 ऑफिसर कम है। और यह कमी और अधिक चिंताजनक इसलिए है क्योंकि इस आंकड़े का 90: यानी 11,450 कैप्टन और मेजर रैंक के अधिकारियों का है। यह कमी आसानी से पूरी होती नहीं दिखती। कम वेतन युवाओं को इस प्रोफेशन में आने से रोक रहा है। पूर्व चीफ़ ऑफ आर्मी स्टॉफ जनरल जे.जे. सिंह ने 14 अप्रैल 2007 को छठे वेतन आयोग के समक्ष यह वेतन 5 गुना बढ़ाने के लिए प्रस्ताव रखा था। यदि यह वेतन बढ़ जाता तो युवावर्ग अच्छे वेतन के लोभ से इस ओर भी आकर्षित होता। 5 हजार से अधिक ऑफिसर्स समय से पहले रिटायरमेंट के लिए आवेदन कर चुके हैं। इससे भी अफ़सरों की कमी हो जाती है। आंतरिक कलह के कारण सेना में सुसाइड के मामले बढ़ने से भी युवावर्ग सेना के प्रति आकर्षण खोता जा रहा है। भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के प्रकरणों के बढ़ने पर हुए कोर्ट मार्शल लोगों को सेना से दूर रहने की ओर प्रेरित करते हैं।

यही सब कारण है कि सेना में अफ़सरों की कमी दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। कारपोरेट जगत के लुभावने वेतन ने सेना में कैरियर के विकल्प को बहुत पीछे छोड़ दिया है। कुछ लोग लड़कियों को इस क्षेत्र में पर्दापण की राय नहीं देते तथा कुछ के परिवार ही नहीं चाहते कि युवा पीढ़ी सेना में जाए।

राष्ट्र की रक्षा, सम्मान और उन्नति के लिए युवावर्ग को अपनी जिम्मेदारी समझकर इस ओर धयान देना होगा। भौतिक दिखावे, और पैसों की चकाचौंधा के सामने देश के हित को भूल जाना, हमारी संस्कृति और हमारे खून में नहीं है। आवश्यकता सिर्फ इस बात की है कि युवा वर्ग के सामने सेना का प्रचार सही तरीके से हो। उनमें नैतिक दायित्वों को जगाने का प्रयास किया जाये साथ ही सरकार द्वारा सेना में भी वेतनमान बढ़ाया जाये। सेना को अत्याधुनिक तकनीकों से आर्टिलरी, आर्म्ड, एयर डिफेंस, एविएशन और मैकेनाइज्ड इन्फ्रेन्ट्री को अत्याधुनिक किया जाये। अन्तर्कलह और भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता जैसे कलंक जो सेना की छवि को बिगाड़ने का काम करते हैं, दूर किया जाये ताकि हमारे देश का युवावर्ग फिर से देश प्रेम का जज्बा देश के कल्याण और सुरक्षा के लिए मर मिटने को तैयार कर सके। उनके दिलों में जोश, देशप्रेम और साहस भर सके। हमारे में युवा पैसों की चकाचौंधा को ठुकरा कर देश से मिलने वाले सम्मान की कीमत समझ सकें।

डॉ. राजश्री रावत 'राज'