संस्करण: 11फरवरी-2008

 ''मोबाइल-जेब में बज़ती खतरे की घंटी''
   स्वाति शर्मा

क्या आपको पता है कि आपकी जेब में ही आपका एक शत्रु बैठा है। जी हाँ, यह सच है कि मोबाइल फोन भी आपका एक बहुत बड़ा शत्रु हो सकता है। आज अपने चारों तरफ नज़र दौड़ाएँ तो जाने कितने ही व्यक्ति आपको मोबाइल पर बात करते नज़र आ जाएँ। क्या बच्चे और क्या बूढ़े, मोबाइल सभी की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका हैं, जिसके बिना जीवन की अब हम कल्पना ही नहीं कर पाते हैं। लेकिन मोबाइल से जुड़े कई खतरनाक पहलू भी हैं। विशेषकर गाड़ी चलाते वक्त इस पर बात करना बहुत घातक हो सकता है। इससे न सिर्फ़ हम अपनी बल्कि दूसरों की जिंदगी भी खतरे में डालते हैं, इसीलिए ज़रूरी है कि ड्राइविंग के समय मोबाइल का इस्तेमाल न करें।अगर कोई फोन कॉल करना या रिसीव करना है, तो पहले वाहन पार्क करें, फिर बात करें।

मोबाइल का लंबे समय तक शरीर से संपर्क व लगातार बातें करना भी हानिकारक है। चाहे बात करें या न करें, मोबाइल से हमेशा इलेक्ट्रॉनिक मैग्नेटिक तरंगे निकलती रहती हैं। जब कॉल आता है या किया जाता है तो इसकी फ्रिक्वेंसी बढ़ जाती है। हालाँकि इन तरंगों के प्रभाव को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है, परंतु शोधा जारी हैं और नित नई रिपोर्ट सामने आती जा रही हैं। मोबाइल से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले भाग कान, दिमाग और हृदय हैं। एक स्वीडिश संस्था ने दावा किया है कि लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल करने से टयूमर होने का खतरा बढ़ जाता है। इस रिपोर्ट के अनुसार 10 वर्ष या इससे अधिक समय तक इसका इस्तेमाल करने से व्यक्ति के श्रव्य तंत्र पर घातक असर पड़ सकता है। श्रव्य तंत्र के उस हिस्से में टयूमर होने का खतरा चार गुना अधिक बढ़ जाता है, जिस हिस्से से मोबाइल फोन का ज्यादा संपर्क होता है। हालाँकि शुरू में टयूमर में कैंसर के लक्षण् नहीं होते। लेकिन अगर इसे हटाया नहीं गया तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। मोबाइल की तरंगों से कान का संतुलन भी बिगड़ता है, इससे वस्टाइगो नामक बीमारी हो सकती है, इसमें चक्कर आते हैं। वैसे संस्था के शोधाकर्ताओं ने इसे निर्णायक रिपोर्ट नहीं माना है, फिर भी संभावनाओं से इंकार नहीं किया है।

मोबाइल को हृदय के पास अर्थात शर्ट के बाएँ जेब में नहीं रखना चाहिए। हृदय पर घंटी बजने से स्पंदन प्रभावित होता है। साथ ही जिनके हृदय में पेसमेकर है, उन्हें तो मोबाइल पर बात भी ज्यादा नहीं करना चाहिए। पेसमेकर पहले ही बाहर से हार्ट को इलेक्ट्रीसिटी देता है, अगर इस पर और इलेक्ट्रिक रेंज निकली तो शॉर्ट हो सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। यूरोप में किए गए एक शोध में बताया गया है कि मोबाइल तरंगे डी.एन.ए. को भी क्षतिग्रस्त करती हैं। सात यूरोपीय देशों में 12 शोध समूहों द्वारा लगातार 4 वर्षों तक किए गए शोधा के बाद वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला है। ब्रेन की बीमारियों में भी यह सीधा प्रभाव डालता है।

ये तो बात हुई मोबाइल फोन के शारीरिक स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभावों की बात, लेकिन इसके द्वारा कई तरह की मनोवैज्ञानिक बीमारियाँ भी हो सकती हैं। पिछले कुछ वर्षों में यह मानसिक तनाव का मुख्य कारक बन कर उभरा है। दुनिया में तनावग्रस्त लोगों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है, मगर तनाव उन लोगों को अधिाक और भयंकर हो रहा है, जो मोबाइल का प्रयोग कर रहे हैं। इसकी वज़ह यह है कि लोग मोबाइल को स्विच ऑफ नहीं कर पाते हैं और कई बार न चाहते हुए भी बात करना पड़ती है और अनचाहे लोगों व अनचाही बातों से संपर्क तनाव बढ़ाता रहता है। मनोवैज्ञानिक के अनुसार इससे एकाग्रता में कमी आती है, फ्रेस्टशन भी बढ़ता है। व्यक्ति एब्सेंट माइंडेड या कन्फ्यूज्ड भी हो सकता है। मोबाइल के जीवन में बढ़ते महत्व के चलते लोगों में विशेषकर किशोरों व युवाओं में लोगों के साथ सीधो बातचीत करने में हिचकिचाहट जैसी प्रवृत्ति पैदा होने लगी है। लोग व्यक्तिगत संपर्क के बजाय समय बचाने के लिए फोन पर ही संपर्क कर लेते हैं, इससे उनके आत्मविश्वास में धीरे-धीरे कमी आती जाती है। वे लोगों का प्रत्यक्ष्च सामना करने में हिचकिचाने लगते हैं। हालाँकि शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर मोबाइल के पड़ने वाले इन प्रभावों को बताने वाले शोध अभी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुँचे हैं, परन्तु इनमें छिपी सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता।

आज मोबाइल फोन एक बेहद आवश्यक व सुविधाजनक ज़रूरत बन चुका है। यह मानवनिर्मित आधुनिक वैज्ञानिक खोजों में से एक है, जिसकी कल्पना भी करीब पंद्रह साल पहले नहीं की जा सकती है। आज एक से एक नई तकनीक का मोबाइल फोन में समावेश होता जा रहा है। लोग इनका गलत इस्तेमाल करने से भी नहीं चूकते, मोबाइल में लगे वीडियो कैमरा के गलत प्रयोग की खबरें हम आए दिन अखबारों में पढ़ते रहते हैं। आज ग्लोबलाइजेशन के चलते, दुनिया में हर जगह इसकी पहुँच है। तो क्यों न मानव इस सुविधा का उपयोग जीवन को और गतिशील बनाने के लिए सावधानी से करे, अन्यथा हमारे अविष्कार हमारे जीवन में उजाला भरने के बजाय उनमें अंधोरा फैला देंगे।

स्वाति शर्मा