संस्करण: 10 सितम्बर-2012

गुस्से में कार्यकर्ता , निशाने पर सरकार

?  अमिताभ पाण्डेय

                 ध्यप्रदेश में पिछले 9 वर्षो से शासन कर रही भाजपा सरकार से अब अपने ही कार्यकर्ता भी नाराज है। यह नाराजी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से लेकर मंत्री,मुख्यमंत्री तक के पुतले जलाये जाने और सडकों चौराहोंपर खुले आम हो रहे विरोध प्रदर्शन से साफ नजर आती र्है। सत्तारूढ दल के प्रभावशाली पदों पर बैठे कुछ नेताओं की मनमानी ,अफसरों के मनमाने आचरण, बढते भ्रष्टाचार को लेकर कार्यकर्ताओं का गुस्सा अपने नेताओं पर फूट पडा हैं। कमल निशान वाले जिस झण्डे को लेकर तन, मन, धन से समर्पित कार्यर्ताओं ने मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार बनवाई वही भाजपा का झण्डा पिछले दिनों कार्यकर्ताओं के पैरों तले इन्दौर में कुचलता देखा गया। पार्टी के झण्डे की इस हालत के लिए कार्यकर्ता इन्दौर में अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को खुले आम कोसते देखें गये। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कार्यकर्ताओं की यह नाराजी आनेवाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से दूर कर सकती है।

                उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षो में इन्दौर का नाम बढती अपराधिक गतिविधियों के लिए खूब चर्चित हुआ है। विपक्षी दल ही नहीं भाजपा से जुड़े कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी यह आरोप लगाए है कि इंदौर में बढ़ती गुंडागर्दी के लिए उनकी अपनी भाजपा के ही कुछ प्रभावशाली नेता जिम्मेदार है। यह प्रभावशाली नेता गुंडों को सरंक्षण दे रहे है ऐसे महौल में आम आदमी भयभीत है कि पता नहीं कब, कहां उसके साथ अपराधिक घटना हो जाए। अपराधियों, गुंडों को सरंक्षण का हाल यह है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरों ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर इंदौर को अपराधिक गतिविधियों के मामलों में देश का प्रमुख शहर माना है।

                  हाल ही में इंदौर में सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं के मनमानी तथा गुंडागर्दी से परेशान भाजपा कार्यकताओं ने खुलकर अपने गुस्से का प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं का समूह पहले भाजपा कार्यालय पहुंचा जहां कांच फोड़ दिए गए, कुर्सियां तोड़ दी गई। पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ करने के बाद भाजपा कार्यकर्ता इंदौर के प्रमुख बाजार राजबाड़ा में पहुंचे वहां इंदौर शहर भाजपा अध्यक्ष शंकर लालवानी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का पुतला जलाया। इस मौके पर भाजप और संघ से जुड़े कार्यकर्ताओं ने मध्यप्रदेश के उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और इंदौर के विधायक रमेश मेंदौला के विरोधा में देर तक नारे लगाए।

                पार्टी कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर गुस्सा था कि सत्तारूढ़ दल के कुछ प्रभावशाली नेता कार्यकर्ताओं के उपेक्षा कर गुंडागर्दी को सरंक्षण दे रहे है। इस मामले में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा त्वरित कार्यवाही नहीं किए जाने से कार्यकर्ताओं का धौर्य टूट गया। उन्होंने इंदौर में उग्र प्रदर्शन कर अपना गुस्सा निकाला अपने ही कार्यकर्ताओं द्वारा पुतला दहन,तोड़फोड़ किए जाने पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं राज्य सभा सदस्य प्रभात झा मीडिया को यह सफाई दे रहे थे कि ''यह तोड़फोड़, नारेबाजी हमारे कार्यकर्ताओं ने नहीं की, यह गुंडों का काम है''। वे यह नहीं बता पाए की गंडें सत्तारूढ़ दल के पार्टी कार्यालय में घुस कर तोड़फोड़ करने की हिम्मत कैसे कर सकते है। यदि गुंडों ने तोड़फोड़ की तो उनके विरूध्द पुलिस में शिकायत क्यों नहीं की गई।

                  मध्यप्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार ने एक ओर जहां भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा वहीं दूसरी ओर पार्टी के अनेक जिलाध्यक्ष,विधायक भी जनहित की समस्याओं का त्वरित समाधान न होने से नाराज है। भाजपा विधायक रामदयाल अहिरवार की माने तो अफसर उनके लिखे जनहित संबंधी पत्रों पर कोई कार्यवाही नहीं करते। वे कहते है कि लगभग एक हजार पत्रों में से अफसरों ने सौ पत्रों का जबाव भी नहीं दिया। यही स्थिति कुछ अन्य भाजपा नेताओं की भी है जिनकी सुनवाई मंत्री, अफसरों के यहां नहीं हो पाती है। नाम जाहिर न करने की शर्त पर एक वरिष्ठ भाजपा विधायक ने बताया कि उनके गृह जिलें में पुलिस अधिक्षक और कलेक्टर एक साल में दो-दो, तीन-तीन बार बदले जा रहे है यह पुलिस अधिक्षक और कलेक्टर ऊपर की सिफारिश से जिलों में पदस्थ होते है तो स्थानीय विधायकों और जन प्रतिनिधियों की परवाह नहीं करते। जन प्रतिनिधियों के काम करना तो दूर उनसे टेलीफोन पर बात करने से भी इन अधिकारियों को परेशानी होती है। ऐसे अधिकारी आम जनता की समस्याओं का समाधान करने में बिलकुल रूचि नहीं लेते है। अफसरों के इस मनमाने व्यवहार के कारण शिवराज सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों का लाभ समाज के वंचित और कमजोर वर्ग के लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है। वरिष्ठ भाजपा विधायक यह दावा करते है कि शिवराज सरकार ने किसानों और गरीब वर्ग के लोगों के लिए जितनी कल्याणकारी योजनाएं चलाई यदि अधिकारी ईमानदारी के साथ उनका क्रियान्वयन करने लगे तो आने वाले कई सालों तक मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार कायम रहेगी। अफसोस यह है कि अफसरों की मनमानी के कारण सरकार की योजनाओं का लाभ जनता तक पूरी तरह नहीं पहुंच रहा हैं

                 जब मधयप्रदेश में भाजपा सरकार के विधायकों, जिलाधयक्षों, कार्यकर्ताओं की सुनवाई ठीक से नहीं हो पा रही है तो फिर आम आदमी के आवेदन, निवेदन पर क्या कार्यवाही होती होगी? इसकी कल्पना आसानी से की जा सकती है। पार्टी में भ्रष्ट लोगों की बढ़ती घुसपैठ को लेकर समर्पित नेताओं कार्यर्ताओं में गहरी नाराजगी है। इस नाराजगी का कारण ढूढ़ने और उसे दूर करने की बजाय भाजपा हाईकमान नाराजगी जाहिर करने वालों पर ही कार्यवाही कर रहा है। अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब पार्टी में स्वार्थी,अवसरवादी तत्वों को सरंक्षण देने का खुलासा करने पर वरिष्ठ प्रदेश भाजपा उपाधयक्ष रघुनंदन शर्मा को उनके पद से हटा दिया गया था। पद से मुक्त हो जाने के बाद भी श्री शर्मा की तीखे तेवर कम नहीं हुए है वे आज भी पार्टी की नीतियों को नुकसान पहुंचाने वालों के विरूध्द बोलने से डरते नहीं है। पार्टी से वर्षों जुड़े रहे कुछ वरिष्ठ नेताओं की चिंता यह है कि गुंडा तत्वों पर सरंक्षण देने वाले नेताओं पर हाईकमान ने कार्यवाही नहीं की तो आने वाले दिनों में जनता के बीच जबाव देना मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल तो स्थिति यह है कि पार्टी के मैदानी कार्यकर्ता प्रभावशाली नेताओं की मनमानी से त्रस्त होते हुए भी मजबूर है। अफसोस यह है कि जो पदाधिकारी यह कार्यकर्ता स्वार्थी तत्वों भ्रष्ट लोगों को सरंक्षण देने वाले नेताओं के नाम उजागर करते है उनके उपर ही अनुशासन के नाम पर बदले के भावना से कार्यवाही की जाती है। ऐसे में कार्यकर्ताओं का गुस्सा धीरे-धीरे बढ़ रहा है। नेताओं की मनमानी के विरोध में प्रदर्शन का जो सिलसिला इंदौर से शुरू हुआ है,वह आने वाले दिनों में मधयप्रदेश के अन्य शहरों में भी दिखाई दे सकता है। कार्यकर्ताओं की यह नाराजगी चुनाव के ठीक पहले भाजपा नेताओं के लिए मुसीबत बन सकती है।

? अमिताभ पाण्डेय