संस्करण: 10  अक्टूबर- 2011

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क्या यू.पी. सरकार का राजनीतिक अध्याय समाप्त हो गया है?

            टी.के. अरूण तर्क देते है। नही। कांग्रेसनीत सरकार कुछ नीति विषयक निर्णयों के आधार पर आगामी संसदीय चुनाव पुन: जीत सकती है।

                क्या आप अगले चुनाव को नीलामी की राह पर या गुटबाजी की राह पर छोड़ देना चाहते है? बहुत सारे लोग इस प्रश्न के पीछे छुपी भावनाओं को ''ऊनी''नामक कार्टून चरित्र के माध्यम से व्यक्त करेंगे।

  ? टी.के. अरुण

 ( ''इकोनॉमिक टाइम्स'' से साभार)


खाने का स्वाद

चखकर ही पता चलता है।

        (अच्छे इरादों से किये गये काम के नतीजे भी अव्यवस्थित और दु:खदायी हो सकते है। समय को तेजी से 2020 तक आगे बढ़ाइये और देखिए कि जन लोकपाल बिल हमें वास्तव में कहाँ ले जाता है।)                 2020 का वर्ष है, टीम अन्ना का टीम अन्ना के लिये टीम अन्ना द्वारा बनाये गये लोकपाल बिल के संसद द्वारा पारित करने के पश्चात उथल-पुथल से भरे 9 वर्षों के बाद का समय।

? अब्दुल खालिक  

(लेखक अब्दुल खालिक लोक जनशक्ति पाटी के महासचिव है।)


मोदी बनाम आडवाणी

सत्ता षडयंत्रों के युग की वापसी

      प्रधानमंत्री पद को लेकर भाजपा में लालकृष्ण आडवाणी और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच चल रही रस्साकशी ने सत्ता षडयंत्र के उस काल की याद को जीवंत कर दिया जब सल्तनत हथियाने के लिए बेरहमी से अपनों का ही गला काट दिया जाता था। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके चाहने वालों की हरचंद कोशिश यही है कि बगावत या दबाव, कैसे भी हो, मोदी पार्टी को प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार्य हों।।

? विवेकानंद


क्या मोदी संस्कृति से

उबर सकेगी भाजपा ?

    भारतीय जनता पार्टी की गत दिनों सम्पन्न शीर्र्ष बैठक ने एक बार फिर साबित किया कि वह मोदी संस्कृति से उबर नहीं पा रही है। केंद्र सरकार की कथित विफलताओं के विरुध्द मोर्चा खोलने और आने वाले दिनों में पॉच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा हेतु बुलाई गई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिनी बैठक का पहला महत्त्वपूर्ण दिन मोदी-चर्चा की भेंट चढ़ गया क्योंकि वे सहमति देने के बावजूद बैठक में नहीं आये। 

? सुनील अमर


दिशाहीन उथल पुथल

भरा समय    

          र्ष 2011 का तीन चौथाई भाग बीत चुका है। वर्ष का यह भाग दुनिया और देश में हलचलों से भरा रहा है। दुनिया के हर कोने में कुछ ऐसा लगता रहा है कि जो कुछ चल रहा है वह ठीक नहीं है उसमें बदलाव चाहिए। वहीं दूसरी ओर बदलाव की ये चाहत कोई स्पष्ट विकल्प तलाशने में भी असमर्थ रही है जिससे एक विश्वव्यापी झुंझलाहट सी दर्ज होकर रह गयी है।।

 ? वीरेन्द्र जैन


पुस्तक समीक्षा

'गोडसे के वारिस'

भारत में हिन्दुत्व आतंकवाद पर नज़र'

     क्षिण एशिया के इस हिस्से में आतंकवाद का सवाल -विशेषकर धर्म के दोहन पर केन्द्रित अतिवादी समूहों की गतिविधियों का सवाल -चुनौती के रूप में खड़ा है। अमेरिका में हुए आतंकवादी हमले 9/11 की दसवीं सालगिरह पर फिर एक बार सभी ने इसे शिद्दत से महसूस किया। बहरहाल,इसे किसी सुचिन्तित योजना का हिस्सा कहें या सहज मानवीय भूल का परिणाम की चाहे अनचाहे आतंकवाद पर केन्द्रित यह विमर्श दुनिया भर में समुदायविशेष पर ही केन्द्रित रहता आया है। भारत की स्थिति भी इससे अलग नहीं रही है।

? संजीव कुमार


ऐसे नहीं बचेंगी बेटियां

       ध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर शिगूफेबाजी करने का फितूर सवार है। कभी वे न्याय यात्रा करते हैं तो कभी विकास यात्रा। कभी कार्यकर्ता गौरव दिवस मनाने लगते हैं,तो कभी औद्योगिक विकास के नाम पर चीन की यात्रा कर आते हैं। अब उन्होंने बेटी बचाओं अभियान का श्रीगणेश किया है। निश्चित रूप से घटता लिंगानुपात गंभीर चिंता का विषय है और लड़कियों को बचाया जाना ज़रूरी है,लेकिन बेटी बचाने के नाम पर सरकारी उत्थान कोरा दिखावा तो है ही, जन धन की बर्बादी भी है।

? महेश बाग़ी


महिलाओं की सुरक्षा की अनूठी बांग्लादेशी पहल

    बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अनेक बुनियादी सुधारों की प्रक्रिया प्रारंभ की है। उन्होंने जहां हमारे देश से संबंध सुधारने के सघन प्रयास प्रारंभ किये है वहीं उन्होंने धर्म निरपेक्षता को पुन: अपने देश का मुख्य आधार बना लिया है। बांग्लादेश के निर्माता मुजीर्बुरहमान ने अपने देश को धर्मनिरपेक्ष प्रजातंत्र घोषित किया था। बंगलादेश की स्थापना के कुछ वर्षों बाद उनकी निर्मम हत्या कर दी गई थी।

 

? एल.एस.हरदेनिया


सिर्फ लोकपाल नहीं प्रशासनिक सुधार भी जरूरी भ्रष्टाचार रोकने

     देश से भ्रष्टाचार निवारण के लिए अपनी समझ के अनुसार हर आदमी कोई न कोई उपाय सोचता है। अन्ना और रामदेव ने भी अपनी सोच के मुताबिक देश से भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए अभियान चलाया हुआ है। लेकिन क्या इनके सुझाए गए उपायों से देश से भ्रष्टाचार का खात्मा संभव है तो यह सोचना सिर्फ एक अच्छी कल्पना ही हो सकती है। उल्लेखनीय है कि देश में भ्रष्टाचार का कारण सरकारी सेवा,अनुदान की प्राप्ति और कार्यों के लिए सरकारी अनुमति की आवश्यकता और जगह जगह व्याप्त इंस्पैक्टर राज मुख्य है।

? डॉ. सुनील शर्मा


बच्चों की देखभाल के लिए

छुट्टी का कदम कितना महिला पक्षधर ?

    हाल मे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने यह स्वीकार किया कि विश्वविद्यालय से जुडे सभी कालेजों में महिला शिक्षक अब अपने चाइल्ड केयर लीव का उपयोग आसानी से कर पायेंगी। दरअसल विकल्प के अभाव में कई कालेजों की महिला शिक्षक बच्चों की देखभाल वाली छुट्टियां नहीं ले पा रही थीं। यूजीसी के स्पष्टीकरण के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि चाइल्ड केयर लीव पर जाने वाली शिक्षिकाओं की जगह तदर्थ तथा गेस्ट लेक्चरर की नियुक्ति की जायेगी।

 

? अंजलि सिन्हा


आर्थिक लाभ की दौड़ में दुग्ध के साथ साजिश

     'अमृतं क्षीर भोजनम्' की मान्यता आदिकाल से हमारे देश में चली आ रही है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी दूधा को पूर्ण पौष्टिक आहार माना जाता है। परंतु आज आर्थिक लाभ के लालच में उसमें की जाने वाली तरह-तरह की मिलावट ने अमृततुल्य दूध को भी जहरीला बना दिया है। दूध में पानी मिलाना तो सामान्य बात थी पर अब नकली दूध यानी सिंथेटिक दूध बनाकर तो सभी मानवीय मूल्यों को तिलांजलि दे दी गई है।

? डॉ. राजश्री रावत 'राज'


  10  अक्टूबर-2011

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