संस्करण: 10 मार्च-2014

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इतिहास बता नहीं

छुपा रही है भाजपा

     र्शनशास्त्र में एक बेहद प्रसिध्द तर्क है जिसके आधार पर अनुमान को ज्ञान का साधन माना जाता है-जहॉँ-जहाँ धुआ है वहाँ-वहॉँ आग है। दर्शनशास्त्र के इस लॉजिक को यदि मोदी और उनके इतिहास बोध पर लागू किया जाए तो हम आसानी से समझ सकते हैं कि नरेन्द्र मोदी जब भी इतिहास के सन्दर्भ में मुँह खोलेगें, गलत ही बोलेगें। इस परिपेक्ष्य में हमारे पास उदाहरणों की पूरी खेप है जब मोदी ने अपने इतिहास-बोध का परिचय दिया। चाहे वह सिकन्दर के गंगा तट पर आने का सन्दर्भ रहा हो या फिर, तक्षशिला को बिहार में बताना।     

? अनिल यादव


'साहेब' वो गलतियां कौन सी थीं...

        त्ता के लिए भारतीय जनता पार्टी कितनी लालायित है, इसके संकेत तो जहां तहां उसके नेता देते फिरते हैं,लेकिन इस लालच पर मुहर लगाने का काम किया खुद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने। पिछले दिनों राजनाथ सिंह ने अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं के सामने हाथ जोड़कर कहा कि अगर उनसे अतीत में कोई गलती हुई है तो वो सिर झुकाकर माफी मांगते हैं। बीजेपी की यह चुनावी रणनीति कितनी सार्थक होगी यह भविष्य के गर्भ में है,लेकिन मुस्लिम उम्मीदवारों से भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह द्वारा किसी गलतीय की माफी मांगने के बाद जिस तरह बीजेपी और उसके सहयोगियों में उठापटक मची,

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विवेकानंद


आओ हम ढोएं हिन्दुत्व की पालकी

     स्सी के दशक में उत्तर भारत के कुछ शहरों में एक पोस्टर देखने को मिलता था।

            रामविलास पासवान के तस्वीर वाले उस पोस्टर के नीचे  एक नारा लिखा रहता था 'मैं उस घर में दिया जलाने चला हूं, जिस घर में अंधेरा है।' उस वक्त यह गुमान किसे हो सकता था कि अपनी राजनीतिक यात्रा में वह दो दफा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुशंगिक संगठन भारतीय जनता पार्टी का चिराग़ रौशन करने पहुंच जाएंगे। 2002 में गुजरात जनसंहार को लेकर मंत्रिमंडल से दिए अपने इस्तीफे की 'गलती' को ठीक बारह साल बाद ठीक करेंगे, और .....

 ? सुभाष गाताड़े


1984 और 2002, कुछ विचारणीय तथ्य

      1984 में देश की प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गान्धी की उनके ही दो सिख सुरक्षा गार्डों द्वारा धोखे से की गयी हत्या के बाद उत्तोजित लोगों द्वारा सिखों का नरसंहार हुआ था जिसमें लगभग तीन हजार सिखों की हत्या हुयी थी। एक सूचना के अनुसार अभी भी दिल्ली गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी 2200विधावाओं को पैंसन दे रही है। यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद थी। स्वतंत्र देश के इतिहास में श्रीमती गान्धी सर्वाधिक लोकप्रिय और विवादस्पद प्रधानमंत्री रही हैं 

? वीरेन्द्र जैन


मोदी, मुलायम और दंगे  

              जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, उत्तर प्रदेश की सियासत और भी गरमाती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी, जो पिछले दो लोकसभा चुनावों से सत्ता का वनवास झेल रही है, वापसी के लिए अपने मूल हिन्दुत्ववादी विचारधारा और हिन्दू राष्ट्रवाद (मैं हिन्दू राष्ट्रवादी हूँ -मोदी) के सहारे इस वनवास से निकलने का जी तोड़ प्रयास कर रही है। इसीलिए संघ के समर्पित कार्यकर्ता और कट्टर छवि वाले नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया है।

 ?   मोहम्मद आरिफ


2002 में गुजरात के बहुसंख्यक पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने

मोदी के सामने घुटने टेक दिए थे

           माज में यदि वैमनस्य और हिंसा की घटनाएं होती हैं तो उसका मुख्य कारण नागरिकों के बीच परस्पर विश्वास की कमी होती है। राज्य की संस्थाएं, जिनमें विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका शामिल हैं, यदि प्रभावशाली हस्तक्षेप नहीं करती हैं तो इस तरह की घटनाएं दंगे का रूप ले लेती हैं।

? एल.एस.हरदेनिया


अपशब्दों के इस हमाम में सब नंगे हैं

      संसद और विधानभाओं में माननीय सदस्यों द्वारा आपस में गाली-गलौच, मार-पीट की घटनाएं कई बार सामने आने के बाद, ऐसा लगता है कि इन दिनों देश के राजनैतिक परिदृष्य में अपशब्दों और गालियों की बौछार का मौसम सा चल रहा है। अभी कुछ दिन पहले ही, केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेता सलमान खुर्शीद ने उत्तर प्रदेश में अपने संसदीय क्षेत्र फरूर्खाबाद में एक जनसभा के दौरान नरेन्द्र मोदी को 2002 के गुजरात दंगों को रोकने में नाकाम रहने के लिए नपुंसक कह डाला।

?  हरे राम मिश्र


कारगर होगी चुनाव आयोग की नई रोकथाम

     से समय में जब ये खबरें आ रही हों कि देश के एक प्रमुख राजनीतिक दल ने अपने प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी की छवि चमकाने के लिए देश की एक शीर्ष विज्ञापन कम्पनी को चार सौ करोड़ रुपये का ठेका दे दिया है तथा चुनाव से काफी पहले से ही यह राजनीतिक दल अपनी एक-एक रैली पर कई करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, तो दुनिया में अपनी निष्पक्ष और सख्त छवि के प्रसिध्द देश के चुनाव आयोग का चिंतित होना स्वाभाविक ही है। चुनावों में बढ़ते धन बल को हर हाल में रोकने के लिए कटिबध्द भारत के चुनाव आयोग ने आसन्न लोकसभा चुनावों के मद्दे-नजर कुछ नयी तैयारियाँ की हैं।  

? सुनील अमर


मातृशिशु मृत्यु दर पर

नियंत्रण कब मुमकिन होगा ?

        चंद्रमुनी कुमारी, उम्र 25 वर्ष, जो खुद राज्य में सहिया अर्थात गर्भवती महिलाओं के लिए अक्रेडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट थी, जिसने खुद 15-20 महिलाओं की स्वस्थ्य प्रसूति में सहायता प्रदान की थी, उसकी इलाज के अभाव में हुई मौत ने झारखण्ड के मातृ शिशु रक्षा की खेदजनक स्थिति की तरफ नए सिरेसे इशारा किया है। रांची के पास स्थित नामकुम की रहनेवाली चंद्रमुनी ने एक स्वस्थ्य बच्ची को जन्म दिया था और उसके बाद उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गयी। (इंडियन एक्स्प्रेस, 27 फरवरी 2014)  

? अंजलि सिन्हा


ट्राई ने एफएम रेडियो प्रसारण के लिए कम बैंडविड्थ की सिफारिश की

      

भारतीय दूरसंचार और प्रसारण नियामक अधिक रेडियो स्टेशनों की अनुमति देने के न्यूनतम चैनल स्पेसिंग को 800 किलोहर्ट्ज  से 400 किलोहर्ट्ज तक  कम करना चाहता है

नई दिल्ली। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने अधिक रेडियो स्टेशनों को अनुमति देने के लिए अब एफएम रेडियो प्रसारण हेतु चौनल स्पेसिंग को कम करके 800  किलोहर्ट्ज के स्थान पर 400 किलोहर्ट्ज  करने की सिफारिश की है।

        

? हमसमेत


क्या अब रूकेगा सहारा का गोरखधंधा?

        खिरकार सुप्रीम कोर्ट ने सहारा श्री को तिहाड़ पहुॅचा दिया, लेकिन इस बार सहारा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर कोई इमोशनल अपील वाला विज्ञापन जारी नहीं हुआ, जैसा कि अक्सर सेबी के विरोध में जब तब जारी किया जाता था। सहारा समूह की  यह विज्ञापनबाजी करोड़ों निवेशकों के की खरे पसीने की कमाई पर की जाती थी। वास्तव में  सहारा श्री कहलाने वाले सुब्रत राय का सड़क से महल और तिहाड़ तक की यात्रा का सारा ब्यौरा   और उसके  सहारा समूह का उद्भव और विकास आम आदमी को चमत्कृत कर सकता है।

? डॉ. सुनील शर्मा


मासूमों को प्ले स्कूल में भेजने का औचित्य?

      मार्च का महीना शुरू हो गया है। स्कूलों में बच्चों का प्रवेश का महासंग्राम शुरू हो गया है। कौन बच्चा अभी से ही कितना मेधावी है, इसके आधार पर उनका एडमिशन हो रहा है। यही नहीं उसके माता-पिता उसे पढ़ाने के लिए कितने योग्य हैं। इसके साथ यह भी देख लिया जाता है कि पालक बच्चे की मोटी राशि की फीस देने में सक्षम हैं या नहीं। छोटी-सी उम्र में बच्चे के सर पर इस बोझ को लादने में पालक जरा भी संकोच नहीं करते।       

? डॉ. महेश परिमल


  10 मार्च-2014

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