संस्करण: 10 फरवरी-2014

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गरीब पर गंदी मोदी नीति ?

     योजना आयोग के शहरी इलाके में रहने वाले लोगों को बीपीएल श्रेणी के लिए 32रुपए रोजाना और गांव में रहने वालों के 26रुपए रोजाना कमाई के मानक पर काफी विवाद उठा था।भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने तो इसे लगभग केंद्र सरकार का पाप ही करार दिया था। लेकिन उसी पार्टी के धुरंधर नेता और प्रधानमंत्री बनने के लिए छटपटा रहे नरेंद्र मोदी की सरकार ने गुजरात में बीपीएल परिवारों के लिए नए मानक तय किए हैं।    

? विवेकानंद


जहर की खेती और

उत्तर प्रदेश का खेत

        दि उन्हें जहर की खेती नहीं करनी होती तो वे गुजरात के अनुभवी कृषक अमित शाह को गुजरात क्यों भेजते? क्या यहाँ कई योगी और 1992 के अनुभवी पहले से ही मौजूद नहीं थे। पर जिस तरह गाँजे अफीम की अवैध खेती से हमारे अन्नदाता कहलाने वाले कुछ किसान जल्दी रहीस हो जाना चाहते हैं उसी तरह कुछ रजनीतिक दल जहर की खेती करके जल्दी सत्ता हथिया लेना चाहते हैं। वाचाल, अशिष्ट और मुँहफट लोग ज्यादा जोर से बोल कर अर्थ का अनर्थ कर देने की भी पात्रता रखते हैं। जब राहुल गान्धी ने अपनी भावुक अभिव्यक्ति में अपनी माँ के ममत्व भरे उस वाक्य को सार्वजनिक किया था ......

?

वीरेन्द्र जैन


यह बात सच है कि मोदी समेत संघ परिवार

जहर की खेती करता है

     स समय सोनिया गांधी का एक वक्तव्य और राहुल गांधी का एक इंटरव्यू सारे देश में बहस का मुद्दा बना हुआ है। सोनिया गांधी ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि देश के लोग उन्हें कामयाब नहीं होने देंगे जो जहर की खेती करते हैं। सोनिया ने लोगों से इस तरह के तत्वों से सावधान रहने की सलाह दी। सोनिया ने अपने भाषण में न तो किसी पार्टी व न ही किसी नेता का नाम लिया था। परंतु चोर की दाढ़ी में तिनका की कहावत को सही सिध्द करते हुए नरेन्द्र मोदी भड़क उठे और कह बैठे कि सबसे ज्यादा जहर कांग्रेस ने बोया है।

 ? एल.एस.हरदेनिया


खौफ की राजनीति में

गुम होते सवाल

      त्तर प्रदेश के मुसलमान वोटरों के लिए भले ही इसे सामान्य समझ की एक बात भर माना जाय कि अगर नरेन्द्र मोदी देश का प्रधानमंत्री बनने में कामयाब हो गये तो, देश और प्रदेश के मुसलमानों का जीवन बेहद ही असुरक्षित और दूभर हो जायेगा। इस समझ के सामान्य तथ्य देश राजनीति में भले ही मौजूद हैं लेकिन,आज-कल समाजवादी पार्टी समेत कुछ अन्य दलों द्वारा जिस तरह से मुस्लिम समाज के बीच नरेन्द्र मोदी के नाम पर मुसलमान वोटरों के भयादोहन की राजनैतिक रणनीति अपनायी जा रही है उससे यह साफ हो चुका है कि .....

? हरे राम मिश्र


विरोध को दबाने का गुजरात माडल

राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा रहा है

              ब देश पूरी तरह से चुनावी माहौल में है। हालांकि अभी चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं हुई है लेकिन यह बात साफ है कि मई तक लोक सभा चुनाव पूरी तरह संपन्न हो जायेगें । इस बीच बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी की मीडिया प्रोफाइल बेहतर से बेहतरीन होती जा रही हैं। बी बी सी की एक रिपोर्ट के मुताबिक लगभग सभी टीवी चौनलों पर समाचारों और विश्लेषणों में अचानक मोदी की ओर झुकाव दिखने लगा है।कुछ विश्लेषणात्मक रिपोर्टों के अनुसार कई कॉर्पोरेट मालिकों ने अपने चौनलों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि....

 ?   शेष नारायण सिंह


निष्ठुर पति-

भावी प्रधानमंत्री

           रेंद्र मोदी की छवि निरंकुश व्यक्ति की रही है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में वह कठोर प्रशासक माने जाते हैं। भाजपा तथा आरएसएस में वह तानाशाह के रूप में जाने जाते हैं। न तो वह पार्टी के किसी बड़े नेता की सुनते हैं और न ही आरएसएस के पदाधिकारियों की। कहा जाता है कि पिछले गुजरात विधान सभा चुनावों में उन्हों ने संघ के लोगों को भी कह दिया था कि वे उनके पक्ष में प्रचार न करें,इसलिये संघ के लोगों ने केशुभाई पटेल के लिये प्रचार किया परंतु मोदी फिर भी विजयी रहे। भाजपा के पास एक से बढ़ कर एक कुशल राजनेता हैं जिन्हें सत्ता तथा संगठन चलाने का दीर्घ अनुभव है।

? मोकर्रम खान


हिन्दुत्व के विमर्श में स्त्री

      किसी अलसुबह अगर एक प्रतिष्ठित महिला का चरित्रहनन करने का सिलसिला शुरू हो जाए, उनके मोबाइल नम्बर को सार्वजनिक शौचालय से लेकर पास के रेलवे स्टेशन में सार्वजनिक तौर पर लिख दिया जाए,उन्हें धमकाने,उनके समर्थन में उतरे लोगों को आतंकित किया जाए,और इस मुहिम में लगे लोगों के चेहरे भी जाने पहचाने हों, तो क्या किया जाना चाहिए ? यह एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया होगी कि उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत हो और ऐसे उत्पीड़कों को सज़ा मिले।

?  सुभाष गाताड़े


धारा 377:

कौन तय करेगा प्राकृतिक-अप्राकृतिक, वैध-अवैध

     सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 पर दाखिल पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका केन्द्र सरकार तथा नाज़ फाउण्डेशन ने दायर की थी। न्यायमूर्ति एच एल दत्त और न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की खंडपीठ ने पुनर्विचार करने से इन्कार किया है। मामला यह है कि संविधान की धारा 377जो कि समलैंगिक सम्बन्धों को अपराध की श्रेणी में रखती है,उसे समाप्त करने के लिए लम्बे समय से मांग उठती रही है। संघर्षरत लोगों को उस समय बड़ी राहत मिली थी जब दिल्ली हाईकोर्ट ने केस पर यह फैसला दिया था कि समलैंगिक सम्बन्ध अपराध नहीं हैं। (2 जुलाई 2009) 

? अंजलि सिन्हा


मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार की

पोल खोलते छापे

        ध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंच से भले ही भ्रष्टाचार के विरूध्द कडी कार्यवाही का ऐलान कर रहे हों लेकिन सत्तारूढ दल के नेताओं ने से लेकर प्रशासन से जुडे अधिकारियों कर्मचारियों पर इसका प्रभावी असर नहीं हो रहा है। खुद को पाक साफ बताने वाले पूर्व मंत्री, पूर्व केन्द्रीय मंत्री, बडे बडे विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों से लेकर इंजीनियर, पटवारी, सरपंच, सचिव तक हर कोई जॉच ऐजेन्सियों के निशाने पर है।  

? अमिताभ पाण्डेय


म.प्र. के व्यापम घोटाले का विरोध

चाय चौपाल तक पहुॅचे!

      म.प्र. में व्यापम यानि व्यावसायिक परीक्षा मण्डल में हुए घोटालों की पर्ते लगातार खुलती जा रही हैं। इस घोटाले में नित नई जानकारी प्रकाश में आ रही हैं।इसके जरिये नियम, कानून और नैतिकता को परे रख म.प्र. में हजारों अपात्रों को सुपात्र बनाकर नौंकरियों से नवाजा गया है और मेडीकल शिक्षा के एमबीबीएस और एमडी पाठयक्रमों में प्रवेशित कराया गया है। एमबीबीएस में प्रवेश के लिए आवश्यक पीएमटी परीक्षा की धज्जियॉ उड़ा दी गई है इसमें धांधली के एक मामले में  उम्मीदवार ने स्वयं ही स्वीकार किया है कि वह परीक्षा में बैठे बगैर ही मेरिट में आकर एमबीबीएस में सिलेक्ट हो गया!       

? डॉ. सुनील शर्मा


सुमनी झोडिया :

एक अद्भुत साहस की मिसाल

        20 वर्ष पुरानी बात है जब सुमनी झोडिया और लंबे अरसे से पीडित उसके आदिवासी समुदाय की जिन्दगी ने करवट ली। उड़ीसा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीजू पटनायक 1991 में रायगढ़ जिले के दौरे पर थे। वहाँ के सिरीगुड़ा गाँव की एक अशिक्षित किन्तु निडर आदिवासी महिला भीड़ में से आगे आई और क्षेत्र में देशी शराब की दुकानों को सरकार द्वारा लायसेंस जारी करने के विरूध्द जोर-जोर से चिल्लाना शुरू किया।

? धृतिकाम मोहन्ती


प्रदूषण की सारी सीमाएं तोड़ता चीन

      कुछ दिनों पहले अखबार में एक तस्वीर प्रकाशित की गई थी, जिसमें चीनी सूर्योदय-सूर्यास्त देखने के लिए बहुत बड़ी स्क्रीन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस पर कुछ लोग सोच सकते हैं कि चीन ने विज्ञान के क्षेत्र में कितनी प्रगति कर ली कि इतनी बड़ी स्क्रीन बनाने लगा, जिसमें लोग सूरज के दर्शन कर सकें। इस तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि चीन प्रगति की दौड़ में इतनी तेजी से भाग रहा है कि उसे पता ही नहीं है कि उत्पादन के लिए वह जो फैक्टरियां चला रहा है, उसे चलायमान रखने के लिए इतना अधिक कोयला जलाना पड़ रहा है कि आज वहां की वायु जहरीली हो गई है।       

? डॉ. महेश परिमल


  10 फरवरी-2014

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