संस्करण: 10 फरवरी-2014

मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार की

पोल खोलते छापे

? अमिताभ पाण्डेय

       ध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंच से भले ही भ्रष्टाचार के विरूध्द कडी कार्यवाही का ऐलान कर रहे हों लेकिन सत्तारूढ दल के नेताओं ने से लेकर प्रशासन से जुडे अधिकारियों कर्मचारियों पर इसका प्रभावी असर नहीं हो रहा है। खुद को पाक साफ बताने वाले पूर्व मंत्री, पूर्व केन्द्रीय मंत्री, बडे बडे विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों से लेकर इंजीनियर, पटवारी, सरपंच, सचिव तक हर कोई जॉच ऐजेन्सियों के निशाने पर है। हाल ही में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया भी जांच एजेंसियों के घेरे में आ गये। श्री जटिया पर केन्द्रीय श्रम मंत्री के पद पर रहते हुए नियुक्तियों में अनियमितताओं का आरोप है। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपात्र लोगों को भी नियुक्ति किये जाने के लिए अपनी सहमति दी थी। मंत्री ने लगे हाथ अपने बेटे राजकुमार को भी बड़े ओहदे पर सरकारी नौकरी में बिठा दिया। शिकायत हुई जांच चली तो गडबडियां खुलकर सामने आने लगी हाल ही में श्री जटिया के भोपाल स्थित निवास पर केन्द्रीय अपराध अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने छापा मारा।

              टीम ने श्री जटिया के भाई हरिओम के कामकाज की जांच पड़ताल की। हरिओम पर भी अपने भाई के माध्यम से अनेक अनियमितताएं करने सम्बंधी आरोप की चर्चा है जिनकी जांच भी सी बी आई ने तेज कर दी है।

              इसी बीच मध्यप्रदेश के सर्वाधिक चर्चित घोटालों में से एक व्यापमं घोटाले के मामले में लोकायुक्त ने अब राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ. पीयूष त्रिवेदी के घर भी छापा मारा। पीयूष व्यापमं घोटाले के केन्द्र बिन्दु पंकज त्रिवेदी के भाई है। छापे के दौरान अनेक बड़बड़ियों का पता चला है। उधर उज्जैन में कल फिर एक पटवारी के यहां मारे गये छापे में करोड़ों रूपये की चल अचल सम्पत्ति सामने आई है। तो सतना जिले में एक जनपद अध्यक्ष को 25 हजार की रिश्वत लेते रगें हाथों गिरफ्तार किया।

              भाजपा के बड़े नेताओं से लेकर छोटे नेताओं, प्रशासन के अधिकारियों कर्मचारियों के यहां मारे जा रहे छापों का सिलसिला लगातार चल रहा है। लगातार हो रही छापेमारी की कार्यवाही से जाहिर होता है कि नेता हों या अधिकारी, कर्मचारी जिसको जहां मौका मिल रहा है वहीं से भ्रष्टाचार कर अपने घर भरे जा रहे हैं।

              दूसरी ओर राज्य सरकार के मंत्री कई फैसले ऐसे भी कर रहे है जिनको लेकर भ्रष्टाचार विरोधी कार्यवाही पर सवाल खड़े हो गये हैं। जल संसाधन विभाग में विवादित कार्यप्रणाली के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ अधिकारी को सेवानिवृत्ति उपरांत लगातार तीसरी बार भी सेवावृध्दि के आदेश जारी कर दिये गये। एक अन्य मंत्री ने अपना विशेष सहायक बनाने के लिए ऐसे अफसर की नोटशीट लिख डाली जो अधिकारी भ्रष्ट आचरण के कारण 10 वर्ष तक निलम्बित रहा। देखने में यह भी आ रहा है कि राज्य सरकार के कुछ मंत्री अपने स्टाफ में भ्रष्ट आचरण के अफसरों, कर्मचारियों को रखने के लिए जिद पर अड़े है। कुछ मंत्रियों ने तो ऐसे अफसरों को अपने साथ रख लिया है जिन अफसरों के भ्रष्ट आचरण की जांच लोकायुक्त आर्थिक अपराधा अनुसंधान ब्यूरो में चल रही है। सवाल यह है कि यदि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना चाहते है तो फिर उनके मंत्रिमण्डल सदस्य भ्रष्ट अफसरों की बार-बार सिफारिश क्यों करते है?

            भ्रष्टाचार के मामले में हो रही छापेमारी की कार्यवाही को लेकर भी भाजपा नेताओं की कथनी और करनी में साफ अंतर देखा जा रहा है। जब भाजपा के नवनियुक्त राज्यसभा सदस्य और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सत्य नारायण जटिया के घर सी बी आई का छापा पड़ा तो मध्यप्रदेश के सारे नेता इसे ''केन्द्र सरकार की दुर्भावनापूर्ण कार्यवाही'' बताने में जुट गये। भाजपा नेताओं की माने तो कांग्रेस के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार सी.बी.आई. जैसी संस्थाओं से छापे डलवाकर भाजपा नेताओं की छवि खराब करना चाहती है। सी.बी.आई. को छापेमारी के लिए कांग्रेस नेता इशारा करते हैं।

              सी.बी.आई. जैसी केन्द्रीय जांच एजेन्सियों की छापेमारी की कार्यवाही को भाजपा नेता दुर्भावनापूर्ण बता रहे है लेकिन मधयप्रदेश में भाजपा सरकार से शासित हो रहे लोकायुक्त, केन्द्रीय अपराध अनुसंधान ब्यूरो, स्पेशल टास्क फोर्स की ओर से पूर्व मंत्री, उनके विशेष सहायक अथवा अधिकारियों के यहां जो कार्यवाही की जा रही है उस पर भाजपा नेता प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आते हैं। मधयप्रदेश की शासकीय जांच एजेंन्सियों छापेमारी की कार्यवाही से यह साबित कर रही है कि भ्रष्टाचार रूका नहीं है। अनेक नेता, अफसर, कर्मचारी मिलकर अन्याय करते हुए माल कमाने में लगे है। इसे रोकने में मुख्यमंत्री के निर्देश भी बेअसर हुए हैं।

 

? अमिताभ पाण्डेय