संस्करण: 10 फरवरी-2014

म.प्र. के व्यापम घोटाले का विरोध

चाय चौपाल तक पहुॅचे!

? डॉ. सुनील शर्मा

        म.प्र. में व्यापम यानि व्यावसायिक परीक्षा मण्डल में हुए घोटालों की पर्ते लगातार खुलती जा रही हैं। इस घोटाले में नित नई जानकारी प्रकाश में आ रही हैं।इसके जरिये नियम, कानून और नैतिकता को परे रख म.प्र. में हजारों अपात्रों को सुपात्र बनाकर नौंकरियों से नवाजा गया है और मेडीकल शिक्षा के एमबीबीएस और एमडी पाठयक्रमों में प्रवेशित कराया गया है। एमबीबीएस में प्रवेश के लिए आवश्यक पीएमटी परीक्षा की धज्जियॉ उड़ा दी गई है इसमें धांधली के एक मामले में  उम्मीदवार ने स्वयं ही स्वीकार किया है कि वह परीक्षा में बैठे बगैर ही मेरिट में आकर एमबीबीएस में सिलेक्ट हो गया! वास्तव मे म.प्र. का व्यापम घोटाला आजादी के बाद से अब तक का देश सबसे घृणित और महाघोटाला बन गया है इसमें मात्र कुछ सैंकड़ा या हजार युवाओं के हितों से खिलवाड़ हुआ हो ऐसा नहीं वरन इसमें प्रदेश और देश के लाखों युवाओं के हितों पर डाका डाला गया हैं। वैसे म.प्र. के मुख्यमंत्री एक हजार फर्जी नौकरी की बात को खुद स्वीकार कर चुकें है। आश्चर्य है सत्ता प्रमुख इसमें गड़बड़ी की बात को स्वीकार करता है और कार्यवाही के नाम पर घिसा पिटा एसटीएफ जॉच का राग अलापता है और बार बार सीबीआई जॉच की बार नकारता है आखिर क्यों ?

                अगर जिस व्यवस्था में एक हजार लोग फर्जी तरीके से नौकरियॉ बटोर सकते हैं तो बाकीं सुपात्र हों इस बात की क्या गारण्टी हो सकती है? व्यापम घोटाला में आरोपी के तौर पर सबसे अहम नाम प्रदेश के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा का नाम सामने आया था, महाघोटाले में आरोपी के तौर पर इनके नाम  पर भी एफआईआर  दर्ज कराई गई थी मगर इन पर कोई कार्यवाही की गई हो ऐसी बात अभी तक सामने नहीं आई है।इनका कार्यालय सहायक जिसका इस घोटाले में अहम् किरदार माना जा रहा है वो अभी तक एसटीएफ की पहुॅच से बाहर है।  नौकरियों में और प्रवेश के लिए भर्ती नेताओं की चिट्ठियों, सिफारिशों और लेनदेन की बात सामने आ रही है लेकिन इन पर क्या कार्यवाही की गई यह बात अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रतीत होता है कि सारी व्यवस्था सत्ताधारी पार्टी के नेताओं की संलिप्ता की सफाई में लगी हुई हैं।

                जहॉ तक नियम और नैतिकता की बात करने में बीजेपी और उसके पितृ संगठन आरआरएस के नेता ही सबसे आगे दिखाई पड़ते हैं लेकिन वास्तविकता में इनकी करतूतें व्यापम घोटाले के रूप में सामने आ रही है। कांग्रेंस के नेता आौर नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे व्यापम के साथ साथ पीएससी परीक्षाओं में घोटाले की बात कर रहें हैं तो इसमें तनिक भी संदेह नहीं होना चाहिए की पीएससी में घोटाला नहीं हुआ है। पीएससी की परीक्षा के माध्यम से कालेजों में प्रोफेसरों की भर्ती में विवि के कुलपति रहे आरएसएस के कार्यकर्ता की सुपुत्री को अपात्र होते हुए भी प्रोफेंसर पद पर नियुक्ति की बात सामने आई हैं। बैकलाग भर्ती में भी सत्ताधारी पार्टी के नेताओ के संबंधियों को सुपात्र बनाय गया हैं। अपात्रों को नौकरियॉ बॉटने का खेल काफी लंबा है माखनलाल चर्तुवेदी पत्रकारिता विवि में नियुक्तियों के मामले में  सत्ता के शिखर की संलिप्तता सबके सामने है फिर कोर्ट में मामला  पहॅुचने पर आश्चर्य जनक ढंग से नौकरी पाने वालों के त्यागपत्र भी हो गए! आखिर म.प्र. में क्या हो रहा है ? म.प्र. में नौंकरियॉ बिकने लगी हैं शायद? बात यहीं खत्म नहीं होती है- जन अभियान परिषद जो सत्ताधारी पार्टी की विचारधारा का प्रचारित करता है आज से चार पॉच साल पहिले इसमें भी बड़े पैमाने पर फर्जी तरीके से नौकरियों की बात सामने आई थी इसमें विभिन्न पदों पर येन केन प्रकरणेन संघ और विद्यार्थी परिषद से जुड़े लोगों को ही नौंकरियॉ  दी गई हैं।जन अभियान परिषद,पीएससी और व्यापम सबमें घोटाला आखिर कैसे?  पीएससी जैसी संस्था जिसके माधयम से  देशभर के लाखों युवा अपने भविष्य को संवारने का स्वप्न देखते हैं और उसकी साख को ही बट्टा लग जाए तो प्रदेश की छवि का क्या होगा? व्यापम जिसकी निष्पक्षता पर शायद ही कभी प्रश्न चिंह लगा हो ? वो संगठन बाजार में बिक गया और लाखों युवाओं के भविष्य और स्वप्नों को तार तार कर हो गए! वास्तव में चिंतनीय है निंदनीय है और धृणित है और इसमें सत्ता में संल्पिता की बात सारे देश में उजागर होना चाहिए। अब व्यापम घोटाले का विरोध नुक्कड़ और चाय चौपाल तक पहुॅचना चाहिए ताकि आगे की पीढी निश्चिंत होकर एक बार फिर पीएमटी परीक्षा की तैयारी कर सके।

? डॉ. सुनील शर्मा