संस्करण: 10नवम्बर-2008

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असली हिंदू कौन?

क्या विश्व हिंदू परिषद के पास आपके या मेरे लिए बोलने का अधिकार है? क्या वे हमारे विचारों को प्रदर्शित करते हैं? क्या हम उनके आचरण या व्यवहार को अपना सकते हैं? वे स्वयं को विश्व हिंदू परिषद कहते हैं, लेकिन कौन कहता है कि वे हम सभी का प्रतिनिधित्व करते हैं।  > करन थापर


रोजगार गारंटी

एनआरईजीए : एक बढ़िया संतुलन

मोसांगी के पी. सोमम्मा पूछते हैं कि वह लोग गर्मियों के मौसम में स्कूल खुले क्यों नहीं रखते? नलगोंडा गांव में पारे के 43 डिग्री सेल्सियस के निशान को पार करने और इस स्थिति में जब हम बहुत थोड़ी सी जगह में खुद को >पी.साईनाथ


''दिग्विजय सिंह ने छह साल पहिले क्या गलत कहा था''

इन्दौर, मालेगाँव बम धमाकों में आतंक विरोधी पुलिस बल (ए.टी.एस.) द्वारा हुई धारपकड़ में भा.ज.पा. के अनुषांगिक संगठन भारतीय विद्यार्थी परिषद की सक्रिय सदस्य रही प्रज्ञा सिंह ठाकुर उर्फ साधवी पूर्ण चेतनानन्द गिरी के गिरफ्तार होने से छह साल पहिले म.प्र. के तत्कालीन   >सुरेन्द्र जग्गी


  

यदि हिन्दू आतंकवादी कहना आपत्तिजनक है तो इस्लामिक आतंकवादी कहना क्यों उचित है?

साधवी प्रज्ञा ठाकुर और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद संघ परिवार एक हास्यापद स्थिति में आ गया। संघ परिवार की साधवी के गिरफ्तार होने के बाद पहिले पूरी चुप्पी, फिर दबी जुबान से समर्थन और यकायक खुला जोरदार समर्थन। > एल.एस.हरदेनिया


घोषणा पत्र की नहीं बची अहमिहयत-

चुनावी महायज्ञ में उच्चारित किए जाने वाले राजनैतिक-मंत्रों की एक पोथी भर है

 

जब जब केन्द्र और राज्यों में आम निर्वाचन के महायज्ञ की बेदियां तैयार होती हैं, तब तब विभिन्न राजनैतिक दल इस महायज्ञ की पारंपरिक अनिवार्यता के प्रति सजग हो उठते हैं। इस महायज्ञ के दौरान कई तरह की रश्मों की अपनी परम्परायें बन चुकी हैं। > राजेन्द्र जोशी


दो नम्बर का समय

यदि पौराणिक प्रतीकों के माध्यम से कहा जाये तो यह वैसे ही भ्रमित करके छलने का समय है जैसे कि रामकथा में रावण साधु का भेष रख कर आया था। आज के राजनीतिज्ञ भी इसी तरह भेष बना कर आये हुए लोग हैं और मूल समस्याओं को दूसरी समस्या के नाम  > वीरेन्द्र जैन


रोशन कंगूरों की स्याह बुनियाद

विकास क्या है और इसके वास्तविक पैमाने कौन से होने चाहिए इसे लेकर एक सनातन बहस चलती ही रही है। लेकिन समाजवादी रूस के पतन के बाद जैसे-जैसे दुनिया भर में नवउदारवादी नीतियों का वर्चस्व स्थापित होता गया है विकास का अर्थ आर्थिक वृध्दि तक  >अशोक कुमार पाण्डेय


नारी उत्थान और पण्डित नेहरू

राष्ट्रपिता गांधी के बाद अगर सच्चे अर्थों में कोई देश का कर्णधार हुआ है तो वह नेहरूजी हैं। वे राष्ट्र के सच्चे सेवक, कुशल राजनीतिज्ञ, विद्वान, त्याग की मूर्ति, मानवता के सच्चे पुजारी और भारत के सफल प्रधानमंत्री थे। वे भारत के ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के नेता >डॉ.गीता गुप्त


मौलिक अधिकारों में शामिल हुआ शिक्षा का अधिकार

यूपीए सरकार ने लम्बे समय से लंबित पड़े शिक्षा के अधिकार संबंधी विधेयक पर आखिरकार अपनी मुहर लगा दी है. अब शिक्षा का अधिकार हमारे मौलिक अधिकारों में शुमार हो जायेगा. इस विधेयक के तहत 6 से 14 साल की उम्र तक के बच्चों को मुफ्त >जाहिद खान


मानसिक और शारीरिक बोझ बचपन का खात्मा करता है।

पिछले पच्चीस वर्षों से शिक्षा में 'एक आवाज गूंजी है' वह है बच्चे के बस्ते का बोझ कम करें। इस कथन में दो तरह के विद्यालय है (1) सरकारी विद्यालय (2) निजी विद्यालय, आम तौर से सबकी निगाहें सरकारी विद्यालयों की तरफ जाती है, वैसे तो वहाँ बड़ा बस्ता >जीवनसिंह ठाकुर


आखिर सुख है कहाँ ?

पिछले महीने से शुरू हुई विश्व आर्थिक मंदी ने अनेक करोड़पतियों को रोडपति बना दिया है। इस दौरान भारतीय मूल के लक्ष्मी मित्तल के शेयर के मूल्य में 2500 अरब की कमी हुई। मित्तल के निजी शेयर का मूल्य 3300 अरब रुपए से घटकर 800 अरब रुपए हो गया। >डॉ. महेश परिमल


10नवम्बर2008

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