संस्करण: 10 जनवरी -2011

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दिग्विजय सिंह के पास है एक मुद्दा!

  नाजियों ने लोकतांत्रिक पार्टी बनाने का दावाकर 1933/34 में सत्ता हासिल की और राज्य के सभी संस्थानों को अपने नियंत्रण में लेकर लोकतंत्र को शर्मसार किया। >जाविद इकबाल


दिग्विजय सिंह के हमले से बौखलाया संघ


  अंतत: दिग्विजय सिंह यह सिद्ध करने में सफल हो ही गये कि 26/11/2008 को उनकी हेमंत करकरे से फोन पर बात हुई थी। >एल.एस.हरदेनिया


दंगे कैसे कराये जाते हैं ?
 

  युवराज मोहिते कहते हैं ''इस दौरान, सेनाप्रमुख को आ रहे टेलिफोन कॉल्स की वजह से बातचीत में लगातार व्यवधान पड़ रहा था। >सुभाष गाताडे


राजनीतिक दलों में लेवी प्रणाली का महत्व
 

  कोई भी व्यवस्था अपना स्वरूप अकेले नहीं गढ़ सकती। क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा, की तरह व्यवस्था का शरीर भी विधायिका, पुलिस, प्रशासन, न्याय, और फौज से मिल कर ही बनता है। >वीरेन्द्र जैन


व्यक्तित्व प्रचार की मार्केटिंग, आकर्षक विज्ञापन लुभावने नारे राज्यों की सत्ताऐं चल रही हैं, इन्हीं के सहारे
 

   विभिन्न राज्यों में सत्ताऐं चल रही हैं। खूब चल रही हैं। वाहवाहियां भी लूट रही हैं, केवल इसलिए कि मीडिया से उनके आकर्षक विज्ञापन जारी हो रहे हैं। >राजेन्द्र जोशी


प्रसंगवश

गुलाम मानसिकता का नमूना

  अंग्रेजों द्वारा हम पर थोपी गई बुराई का यह एक उदाहरण नहीं है। कई मामलों में ऐसी बुराइयां आज भी ढोई जा रही है। >महेश बागी


समाचार माध्यमों को साधने की कोशिश में उप्रसरकार

 

  पने को सामाजिक न्याय की पैरोकार बताने वाली उप्र क़ी मुख्यमंत्री मायावती ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने जिले के पत्रकारों को साधकर रखें >सुनील अमर


देश को झुग्गीमुक्त करने का संकल्प !

शहर का नीतिनिर्धारण और नये शहरों की दरकार है !

 

  केन्द सरकार के शहरी आवास और गरीबी उन्मूलन मन्त्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि वे अपने नगरपालिका नियमों में संशोधन करें। >अंजलि सिन्हा


जस्टिस ज्ञानसुधा निशाने पर क्यों?
 

  झारखण्ड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रह चुकीं ज्ञानसुधा मिश्रा इन दिनों अख़वार की सुर्खियों में हैं। उनपर चौतरफ़ा वाक् प्रहार हो रहे हैं। >डॉ ग़ीता गुप्त


भारत में वैश्विक बाजार की तलाश
 

  फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी की यात्रा को संतुलित ठहराया जा सकता है। क्योंकि सरकोजी ने जहां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता की पुरजोरी से पैरवी की >प्रमोद भार्गव


शराबबंदी के लिए जूझती महिलाएं

 

  ह कोई दस्यु उन्मूलन अभियान या छापामार कार्यवाही नही थी लेकिन दो जीप में भरकर श्रीमती उषा वर्मा सहित एक दर्जन महिलाओं के घर पहुचे पुलिसकर्मियों >अमिताभ पाण्डेय


सूचना के अधिकार हथियार को भोथरा करने की कोशिश

 

  मारे मुल्क में अवाम को लंबे संघर्ष के बाद जब जम्हूरियत के एक बड़े हथियार के रूप में सूचना का अधिकार कानून मिला, तो लगा कि हमें एक बहुत बड़ी कामयाबी मिल गई। >जाहिद खान


10 जनवर-2011 

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