संस्करण: 09जून-2008

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लेखन से देशद्रोह ?

क्या व्यक्तिविशेष के बारे में विवादास्पद कही जा सकनेवाली बातें प्रकाशित करना 'देशद्रोह और आपराधिक षडयंत्र' में शुमार किया जा सकता है ? अगर कानूनविदों की बात कहें तो वे निश्चित तौर पर इस सम्बन्धा में अलग राय रखते हैं, लेकिन जहाँ तक गुजरात की राजधानी के पुलिस महकमे का सवाल है तो इस सम्बन्धा में उसकी अलग राय जान पड़ती है। पिछले दिनों देश के एक अग्रणी अंग्रेजी दैनिक के शहर संस्करण के सम्पादक तथा रिपोर्टर >सुभाष गाताडे

      


संदर्भ : कर्नाटक चुनाव क्षेत्रीय दलों के राष्ट्रीय विकल्प
क्षेत्रीय दलों के राष्ट्रीय विकल्प बन जाने के मंसूबे फिलहाल दिवास्वप्न ही दिखाई दे रहे हैं। कर्नाटक चुनाव में क्षेत्रीय दलों का हाशिये पर सिमट जाना इस बात के संकेत हैं। उतर प्रदेश के चुनाव परिणाम के बाद मायावती की सोशल इंजीनियरिंग को बसपा के अखिल भारतीय विस्तार के रूप में देखा जाने लगा था, लेकिन मायावती के मुख्यमंत्री के रूप में सिंहासनारूढ़ होने के बाद जितनी भी विधानसभाओं >प्रमोद भार्गव


मंत्रियों का बैंक बेलेंस बढ़ रहा है विकास के नाम पर राज्य को लग रहा है चूना !
सार्वजनिक सेवा में उतरे तथा कथित राजनेतागणों की ऐसी ऐसी कारगुजारियां उजागर होती जा रही है कि जिसके कारण राजनीति की शुचिता कलंकित हो रही है। वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में भाजप >राजेन्द्र जोषी

          


  

मध्यप्रदेश में आयकर के छापे: छवि का सवाल बदहवास नेताओं के विरोधाभासी बयान
गत दिनों आयकर विभाग ने आय से अधिक सम्पत्ति रखने के मामले में प्रदेश के स्वास्थमंत्री अजय विश्नोई के भाई मित्र रिश्तेदार और उनके विभाग से जुड़े रहे अधिकारी, पार्टनर पत्रकार तथा बरामद बेहिसाबी धान के अलावा उसे विनियोजित करने वाले संस्थानों और बिल्डरों आदि के यहाँ लगभग पचास स्थानों पर छापे मारे और वहाँ से आवश्यक कागजात आदि जब्त >वीरेन्द्र जैन


विश्नोई के त्यागपत्र से सिध्द हुआ कि भाजपा के राज में भ्रष्टाचार बढ़ा है
ध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अजय विश्नोई के त्यागपत्र से भारतीय जनता पार्टी की नैतिक प्रतिष्ठा को गंभीर ठेस लगी है। भारतीय जनता पार्टी का हमेशा से दावा रहा है कि उनकी पार्टी एक अनूठी पार्टी है इस दावे का यह अर्थ है कि हमारी पार्टी में वे सारे दोष नहीं है जो अन्य पार्टियों में हैं। लगभग सभी पार्टियों के सदस्यों में भ्रष्टाचार का दुर्गुण प्रवेश कर पाया गया है। अभी हाल में एक मंत्री ने एक साक्षात्कार में बताया कि लोग मंत्री इसलिए बनना चाहते हैं कि ताकि संपत्ति अर्जित कर सकें >एल.एस.हरदेनिया

       


नेपाल में सूर्योदय के साथ घटाटोप
 दुनिया के सबसे युवा लोकतंत्र के रूप में प्रतिस्थापित नये नेपाल में माओवादी शक्तियों का कब्जा तो हो गया, किंतु बंदूक से गोली अब न निकले, संवैधानिक पदो का बंटवारा कैसे हो, पड़ोसी देशों खासकर भारत से सबन्ध अब कैसे रखें जायें, जैसे कई प्रश्न अनुत्तरित हैं। नेपाली कांग्रेस को वंश की पार्टी समझने वाले गिरिजा प्रसाद कोइराला व उनके सहयोगी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे थे, इसलिये जनता ने उन्हें परे रखा। राजा की वफादारी का लाभ >अंजनी कुमार झा


सावरकर का सच
क्षिणपंथी राजनीति के इस दौर को मिथकों के अन्वेषण और निर्माण का दौर कहा जा सकता है। अपने राजनैतिक उभार और बढ़ी हुई सामाजिक स्वीकार्यता के बावजूद इन छद्म राष्ट्रवादी ताकतों को इतिहास में अपना आधार तलाश करने की जरूरत महसूस हो रही है। जहाँ एक तरफ हजारों-लाखों साल पुराने पुष्ट-अपुष्ट मिथकों के सहारे अपनी पहचान निर्मित करने की कोशिश की जा रही है तो वहीं दूसरी ओर पिछले सौ-डेढ़ सौ सालों के इतिहास के तथ्यों के साथ असत्य तथा भ्रमों का घालमेल कर कुछ नायकों को अपने पाले में खींचने तथा साथ ही कुछ धूसर चरित्रों को उज्जवल बनाने के प्रयास भी जारी हैं। अंग्रेजी उपनिवेशवाद के >अशोक कुमार पाण्डे

              


मध्य-प्रदेश के सरकारी स्कूल और शिक्षक : दोनों ख़स्ताहाल
शिक्षा किसी भी देश के विकास की बुनियाद होती है। शिक्षित नागरिक ही देश की उन्नति में सहायक हो सकते हैं। संविधान के 45 वें अनुच्छेद के अनुसार 14 वष्र अर्थात्, आठवीं कक्षा तक नि:शुल्क शिक्षा सुलभ कराने का दायित्व सरकार का है मगर अद्यपर्यन्त इस दायित्व की ऐसी अवहेलना की गयी कि आज शिक्षा से जुड़ी अनेक समस्याएँ विकराल रूप धारण कर चुकी हैं। काफ़ी समय से सरकारी >डॉ. गीता गुप्त


रोजगार गारंटी योजना पर उठे सवाल
केन्द्र शासन द्वारा सभी राज्यों में लागू की गई रोजगार गारंटी योजना मध्यप्रदेश में बेहतर ढंग से क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। सरकारी प्रचार माध्यमो  में इसकी सफलता की जोरदार कहानियां देखने सुनने को मिल रही है। सफलता की इन कहानियों की तुलना में योजना के अमल में हो रही अनियमिताओं की चर्चा दिनों दिन बढ़ती जा रही है। कांग्रेस के छोटे कार्यकर्ता से लेकर बड़े पदाधिक >अमिताभ पाण्डेय

     


विज्ञान की पढ़ाई रूचिकर बने
रीक्षा परिणाम का समय है, छात्रों में खुशी और गम का माहौल है। देशभर की माध्यमिक  और सेकेंडरी परीक्षाओं के परिणाम घोषित हो रहे है। सफलता का प्रतिशत देश भर में भले ही भिन्न है परंतु एक बात में लगभग समानता है कि विज्ञान विषय में अनुत्तीर्ण होने वाले छात्रों का प्रतिशत सभी जगह अन्य विषयों की तुलना में अधिक है।>डॉ. सुनील शर्मा


17 जून-विश्व सूखा व मरूस्थलीकरण नियंत्रण दिवस पर विशेष ''बढ़ता रेगिस्तान-पर्यावरण के लिए संकट''
र्तमान समय में मरूस्थलीकरण संपूर्ण विश्व में पर्यावरण की एक मुख्य समस्या के रूप में उभर कर आया है। मरूस्थलीकरण से तात्पर्य इसे एक क्रमबध्द प्रक्रिया मानते हैं, जो जलवायु, प्राकृतिक वनस्पति, मृदा, जीव-जंतु तथा मानवीय क्रियाओं का परिणाम है एवं इसे मानव द्वारा पारिस्थितिक क्रम में अवरोध  >स्वाति शर्मा

 

          

 


छोटे परदे पर बड़ों का कब्जा
जकल मायानगरी के सितारे छोटे परदे पर कब्जा जमाने में लगे हैं। अब उन्हें पता चल गया है कि यह बुध्दू बक्सा बड़े काम का है। यही वह माध्यम है, जिससे गाँव-गाँव तक पहुँचा जा सकता है। टीवी आज सुदूर गाँव तक अपनी पहुँच गया है, इसे हम सभी जानते हैं। आज बॉलीवुड के कई अभिनेता टीवी पर आने की कोशिश कर रहे हैं, कुछ तो इसमें सफल भी हो गए हैं। >डॉ. महेश परिमल

          09जून2008

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